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Monday, 27 April, 2026
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एआईएफएफ ने दूसरी बार अपने महासचिव को बर्खास्त किया, भूटिया ने अध्यक्ष चौबे का इस्तीफा मांगा

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(फिलेम दीपक सिंह)

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) पूर्व भारतीय कप्तान बाईचुंग भूटिया ने देश में फुटबॉल के प्रशासन में मौजूदा अव्यवस्था के लिए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष कल्याण चौबे को जिम्मेदार ठहराते हुए मंगलवार को उनके इस्तीफे की मांग की जबकि शाजी प्रभाकरन को महासचिव के रूप में दूसरी बार बर्खास्त किया गया।

एआईएफएफ की कार्यकारी समिति ने मंगलवार को प्रभाकरन को महासचिव पद से हटा दिया जबकि इससे दो महीने से अधिक समय पहले सात नवंबर को ‘विश्वास के उल्लंघन’ के लिए आपात समिति ने ऐसा ही किया था।

आठ दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने प्रभाकरन की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 जनवरी को अपने नवीनतम आदेश में कहा था कि प्रभाकरन को एआईएफएफ की आपात समिति ने बर्खास्त किया था जबकि महासंघ का संविधान केवल कार्यकारी समिति को यह अधिकार देता है।

उच्च न्यायालय ने हालांकि कहा था कि उसका आठ दिसंबर का आदेश याचिकाकर्ता (प्रभाकरन) का कार्यकाल रद्द करने के लिए एआईएफएफ को कार्यकारी समिति की बैठक करने से नहीं रोकता।

एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘‘हां, शाजी प्रभाकरन को मंगलवार को बैठक मे कार्यकारी समिति ने महासचिव के रूप में बर्खास्त किया।’’

भूटिया ने मंगलवार को एआईएफएफ की कार्यकारी समिति की बैठक में हिस्सा लिया जिसे सात नवंबर को प्रभाकरन की बर्खास्तगी पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था। प्रभाकरन को शुरुआत में बैठक में नहीं बुलाया गया था लेकिन वह बाद में वर्चुअल रूप से इसमें शामिल हुए।

भूटिया ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैंने कार्यकारी समिति से कहा कि कल्याण चौबे और कोषाध्यक्ष किपा अजय को भी इस्तीफा देना चाहिए। सिर्फ शाजी प्रभाकरन को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए। कार्यकारी समिति की स्वीकृति के बिना फैसले करने के लिए ये तीनों बराबर जिम्मेदार थे।’’

इस दिग्गज पूर्व फुटबॉलर ने कहा, ‘‘ये तीनों फैसले कर रहे थे और अगर शाजी को हटाया जाता है तो अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को भी हटाया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय फुटबॉल अव्यवस्था का सामना कर रही है, खेल में राजनीति है, प्रभार संभालने के एक साल से कुछ अधिक समय में लोग एक दूसरे के पीछे पड़े हैं, यह सही नहीं है। हांगझोउ एशियाई खेलों के साथ-साथ एशियाई कप के दौरान राष्ट्रीय टीम को अधर में छोड़ दिया गया था जहां टीम के पास ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त समय नहीं था।’’

एक अन्य सूत्र ने भूटिया की बात की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रभाकरन ने कार्यकारी समिति के सदस्यों से पूछा किया ‘विश्वास का उल्लंघन’ के दायरे में क्या आता है।

भूटिया ने साथ ही कहा कि उन्होंने पारदर्शिता के लिए एआईएफएफ की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) या कार्यकारी समिति की बैठकों का सीधा प्रसारण करने का प्रस्ताव रखा है।

दोहा में एएफसी एशियाई कप के ग्रुप चरण से भारत के बाहर होने पर भूटिया ने कहा, ‘‘एशियाई खेल और एशिया कप भारत के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट हैं और दोनों में टीम का प्रदर्शन काफी खराब रहा, खिलाड़ियों या कोच के कारण नहीं बल्कि एआईएफएफ के शीर्ष अधिकारियों के कारण।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में टीम ने हांगझोउ पहुंचने के कुछ घंटों बाद ही अपना पहला मैच खेला। एशियाई कप में टीम को ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। ’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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