नई दिल्ली: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 मई को पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा की और मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयासों तथा बढ़ते दुग्ध उत्पादन पर चर्चा की. प्रदेश में औसत दुग्ध संकलन 9.67 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दर्ज हुआ जो पिछले वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है. पिछले छह महीनों में यह 11 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक रहा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है और लक्ष्य इसे पहले स्थान पर पहुंचाने का है. प्रदेश में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गईं तथा अंबेडकर कामधेनु, विद्यासागर गौसंवर्धन और डेयरी प्लस सहित कई योजनाएं संचालित हैं.
दुग्ध उत्पादकों को 2025-26 में 1609 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जो पिछले वर्ष के 1398 करोड़ रुपये से 15 प्रतिशत अधिक है तथा प्रति लीटर खरीद मूल्य में 2.50 से 8.50 रुपये वृद्धि की गई. इंदौर में 3 लाख लीटर क्षमता का मिल्क पाउडर प्लांट शुरू किया गया तथा ग्वालियर प्लांट के आधुनिकीकरण और शिवपुरी डेयरी के पुनर्जीवन के कार्य हुए हैं.
सांची ब्रांड के अंतर्गत घी की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी है तथा दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध की बिक्री में भी वृद्धि हुई है. बैठक में मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.