नई दिल्ली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बैठक की. इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन किया. साथ ही ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) से संबंधित वर्ष 2023-24 और वित्तीय वर्ष 2024-25 की तकनीकी रिपोर्ट भी जारी की गई.
बैठक में GEP के जरिए राज्य के वन, जल, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण और कार्बन अवशोषण जैसी पर्यावरणीय सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन पर चर्चा हुई. धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए GEP का मॉडल स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, कार्बन अवशोषण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े प्रयासों को वैज्ञानिक आधार दिया जाना चाहिए.
धामी ने वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों के लिए सरल, सहज और कम लागत वाला बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित रखने के बजाय घरों और स्थानीय स्तर पर अपनाने योग्य मॉडल विकसित किए जाएं.
नीति में हिमनद विज्ञान, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रवास, कौशल विकास और नवाचार को प्राथमिकता वाले क्षेत्र बनाया गया है.