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Wednesday, 17 June, 2026
होमरिपोर्टविरासत से विकास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश, सांस्कृतिक संरक्षण को नई पहचान

विरासत से विकास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश, सांस्कृतिक संरक्षण को नई पहचान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को विकास से जोड़ा जा रहा है

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नई दिल्ली: मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को विकास से जोड़ने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विरासत से विकास” मंत्र को आधार बनाकर प्रदेश में सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन विकास को नई गति दी जा रही है.

उन्होंने बताया कि उज्जैन में विश्व की पहली “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी” की स्थापना भारतीय ज्ञान परंपरा और कालगणना को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इस पहल का विस्तार अब देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक किया जा रहा है. वहीं, आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तहत विकसित हो रहे एकात्म धाम को अद्वैत वेदांत, सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है. परियोजना के दूसरे चरण में 2195 करोड़ रुपये की लागत से अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सनातन परंपराओं, लोक संस्कृति और महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है. धार्मिक पर्यटन के विस्तार से स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है.

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