नई दिल्ली: मध्यप्रदेश में विकास को गति देने के लिए 3 मई को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमिपूजन किया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के नैनोद गांव में इस परियोजना की शुरुआत की, जिसकी लागत 2360 करोड़ रुपये है. इस कॉरिडोर के जरिए उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
सरकार ने भूमि अधिग्रहण में किसानों को 4 गुना मुआवजा देने के साथ 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस देने का फैसला किया है. इससे किसानों को विकास में भागीदार बनाने की पहल की गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मजबूती देगी.
करीब 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और 52 के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी. 75 मीटर चौड़ी सड़क और बफर जोन इसे भविष्य के विस्तार के लिए सक्षम बनाएंगे.
सरकार का दावा है कि इस परियोजना से क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण होगा और लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा. विपक्ष ने हालांकि दावों पर सवाल उठाए हैं, लेकिन राज्य सरकार इसे किसानों और उद्योग दोनों के लिए बड़ा कदम बता रही है.