रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित सुकमा जिले का दौरा किया. उन्होंने राहत शिविरों का जायजा लिया और बाढ़ से प्रभावित लोगों से सीधे मुलाकात की.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले तीन-चार दिनों से हुई भारी बारिश के कारण साबरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया. इससे नदी किनारे बसे गांवों में पानी भर गया और कोंटा नगर पालिका के चार वार्ड जलमग्न हो गए.
सीएम साय ने बताया कि जिला प्रशासन ने तुरंत राहत शिविर बनाए. बाढ़ के कारण जिन लोगों के घरों में पानी भर गया, उन्हें इन शिविरों में रखा गया. करीब 3,000 लोगों को 19 राहत शिविरों में रखा गया है. उनके लिए खाने और पानी की व्यवस्था की गई है.
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त घरों का जायजा लिया और राहत शिविरों में दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की.
साय ने कहा, “आज हमने क्षतिग्रस्त घरों का जायजा लिया और लोगों से मुलाकात कर उनसे बातचीत की. हमने राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया. लोग संतुष्ट हैं और सरकार की ओर से दी जा रही मदद से खुश हैं.”
राहत उपायों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और बाढ़ से हुए नुकसान का जल्द से जल्द आकलन करने के निर्देश दिए हैं.
उन्होंने कहा, “मैंने अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें बाढ़ के पानी से हुए सभी नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. इसमें घरों, पशुओं और फसलों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा. इसके बाद जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाएगा.”
मुख्यमंत्री ने लोगों के घरेलू सामान को हुए भारी नुकसान को देखते हुए अपने विवेकाधीन कोष से अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया.
उन्होंने कहा, “करीब 300 परिवारों के घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है. मैंने निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से इन परिवारों को 10,000 रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाए.”
इससे पहले सोमवार को सूचना मिली थी कि डोंगाघाट गांव के पास इंद्रावती नदी के उत्तरी किनारे पर कच्ची झोपड़ियों में 10-12 लोग फंसे हुए हैं. इसके बाद भारतीय वायुसेना की सेंट्रल एयर कमांड की एक टीम उन्हें खोजने और बचाने के लिए रवाना हुई.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, इलाके में पूरी तरह तलाशी लेने के बाद टीम ने लोगों को एक कच्ची झोपड़ी की छत पर इकट्ठा पाया. तेज बहते बाढ़ के पानी के कारण इस झोपड़ी की छत के गिरने का खतरा था.
समय कम होने और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए वायुसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. एक गरुड़ कमांडो को कमजोर छत पर उतारा गया. उसने वहां फंसे लोगों की मदद की. इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर में खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला गया.
प्रेस रिलीज के मुताबिक, महिलाओं और बच्चों समेत कुल 12 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया.