देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्यपाल पद की शपथ लेने पर ढाल सिंह बिसेन को बधाई दी. उन्होंने भरोसा जताया कि बिसेन के राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से राज्य को फायदा मिलेगा.
धामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर बिसेन को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति को देवभूमि के लिए बहुत खुशी की बात बताया.
देवभूमि उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करने पर डॉ. ढाल सिंह बिसेन जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में आपकी नियुक्ति देवभूमि के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। पूर्ण विश्वास है कि एक मार्गदर्शक के रूप में आपके लंबे राजनीतिक… pic.twitter.com/nSsEHPH5ET
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) October 19, 2026
धामी ने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल के रूप में शपथ लेने पर डॉ. ढाल सिंह बिसेन जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में आपकी नियुक्ति देवभूमि के लिए बहुत खुशी की बात है.”
धामी ने भरोसा जताया कि बिसेन का अनुभव और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण राज्य के प्रशासन को बेहतर बनाने में मदद करेगा.
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि आपके व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से उत्तराखंड को मार्गदर्शन मिलेगा. साथ ही, जनसेवा के प्रति आपका समर्पण और संवैधानिक मर्यादा के प्रति आपकी प्रतिबद्धता राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेगी. आपके सफल कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.”
इससे पहले सोमवार को ढाल सिंह बिसेन ने देहरादून के लोक भवन में उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ ली. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे.
शपथ लेने के बाद मीडिया से बात करते हुए बिसेन ने राज्य की सेवा करने का अवसर देने के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया. उन्होंने उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ और ‘वीरभूमि’ बताया.
बिसेन ने कहा, “इस देवभूमि की सेवा करने का अवसर देने के लिए मैं देश के शीर्ष नेतृत्व का दिल से आभार जताता हूं. उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति का केंद्र है. यह चार पवित्र धामों की भूमि है. यहां आदि कैलाश और जागेश्वर धाम जैसे अन्य दिव्य और पवित्र स्थल भी हैं. यह भूमि अपने खास पर्यटन स्थलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. देवभूमि होने के साथ-साथ यह वीरभूमि भी है, जहां लगभग हर परिवार का कम से कम एक सदस्य देश की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों में सेवा देता है.”