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Friday, 16 October, 2026
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‘मुंबई के कारोबारी को राज्यसभा सीट बेची’, योगी का अखिलेश पर हमला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महीने हुए चुनाव में सपा की ओर से रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा भेजने के संदर्भ में यह बयान दिया.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरोप लगाया है कि उसने एक अमीर कारोबारी को राज्यसभा की सीट बेच दी और अपने ‘पीडीए’ यानी ‘पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक’ के नारे को नजरअंदाज किया.

योगी ने यह बयान अखिलेश यादव की ओर से रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी को इस महीने की शुरुआत में हुए चुनाव में राज्यसभा भेजने के फैसले के संदर्भ में दिया. इस चुनाव में सपा ने बिना मुकाबले दो सीटें जीती थीं. सपा के दो विजेताओं में से एक नाथवानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है. उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं. उन्होंने इस साल अप्रैल में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर यह सीट जीती थी.

बुधवार को वाराणसी में शिक्षकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए योगी ने पीडीए के प्रति सपा की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा, “जो लोग पीडीए के नारे लगाते रहते थे… जब राज्यसभा के टिकट देने की बारी आई, तो वह पीडीए कहां चला गया?”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम पहले दिन से कहते आ रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में पीडीए का मतलब ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ या ज्यादा से ज्यादा ‘पराया धन अपना’ है.”

योगी ने कहा कि सपा नेता ने जीती गई सीटों में से एक पर अपने चाचा राम गोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया. जबकि वह एक सीट पर काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी यादव नेता को चुन सकते थे.

उन्होंने आरोप लगाया, “दूसरी सीट पर वे किसी दलित या किसी और को उम्मीदवार बना सकते थे. यहां तक कि अपने पारंपरिक वोट बैंक से किसी मुस्लिम को भी टिकट दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने मुंबई के एक अमीर कारोबारी को सीट बेच दी.

‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ और ‘पराया धन अपना’—दोनों बातें सही साबित हुई हैं.”

भर्ती विवाद को लेकर योगी ने सपा पर निशाना साधा

मुख्यमंत्री ने भर्ती में कथित गड़बड़ियों को लेकर सपा की पिछली सरकार पर भी हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं के भविष्य से समझौता किया था.

उन्होंने 2013 में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अनिल यादव को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने का जिक्र किया. उनके चयन पर सवाल उठने के बाद 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी. योगी ने दावा किया कि अनिल यादव इस पद के योग्य नहीं थे.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान एक ऐसे उम्मीदवार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में पहला स्थान हासिल किया था, जिसे हाई स्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक—तीनों में तीसरे दर्जे के अंक मिले थे.

योगी ने आरोप लगाया, “यह कैसी अराजकता और गुंडागर्दी थी? युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था. वहीं, राज्य में दंगे, अशांति और माफिया तत्व हावी थे.”

सपा की राज्यसभा में जीत

योगी की यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर 9 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद आई है. इन सभी सीटों पर उम्मीदवार बिना मुकाबले चुने गए थे. भाजपा ने आठ सीटें जीतीं, जबकि सपा को दो सीटें मिलीं.

सपा की ओर से चुने गए उम्मीदवारों में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव तथा कारोबारी नाथवानी शामिल थे.

नामांकन दाखिल करने के कुछ ही दिनों बाद नाथवानी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट से पार्टी के भीतर बेचैनी पैदा हो गई थी. कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि भाजपा और मोदी का विरोध करने वाली सपा उनके उम्मीदवार बनाए जाने का बचाव कैसे करेगी.

गुजरात के कारोबारी नाथवानी रिलायंस समूह से जुड़े हैं. उन्होंने 9 अक्टूबर को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक लंबा संदेश पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने सार्वजनिक पद पर मोदी के 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी थी. उन्होंने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने तक के राजनीतिक सफर को दिखाने वाला एक वीडियो भी साझा किया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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