नई दिल्ली: भारत ने शनिवार को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बदलती सुरक्षा जरूरतों से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने की ज़रूरत के बीच एक बड़े नागरिक सुरक्षा बल के गठन का ऐलान किया.
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछली सदी की ज़रूरतों के हिसाब से बनाई गई नागरिक सुरक्षा व्यवस्थाएं आज पुरानी हो गई हैं. इसलिए, लाल किले की प्राचीर से मैं घोषणा करता हूं कि आने वाले दिनों में हम नागरिक सुरक्षा का एक मजबूत नेटवर्क बनाएंगे.”
उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को बढ़ाने की जरूरत इसलिए है ताकि हर मोर्चे पर देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
नागरिक सुरक्षा के उपाय तत्काल आपात स्थिति से निपटने, लोगों की सुरक्षा करने और आपदा से नष्ट या क्षतिग्रस्त हुई जरूरी सेवाओं और सुविधाओं को फिर से शुरू करने के लिए बनाए गए हैं. इसका उद्देश्य लोगों की जान बचाना, संपत्ति के नुकसान को कम करना, उत्पादन को जारी रखना और लोगों का मनोबल बनाए रखना है.
पिछले कई वर्षों में नागरिक सुरक्षा की अवधारणा पारंपरिक हथियारों से हुए नुकसान से निपटने से आगे बढ़कर परमाणु हथियारों, जैविक और रासायनिक युद्ध तथा प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के खतरों को भी शामिल करने लगी है.
पीएम ने कहा, “आज युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़े जा रहे हैं. ये डेटा सेंटर, बैंकिंग सेक्टर और दूसरी जगहों पर भी लड़े जा रहे हैं. हमें न केवल अपने रक्षा हथियारों को आधुनिक बनाना है, बल्कि अपने नागरिकों को भी तैयार करना है.”
उन्होंने कहा कि देश के नागरिक सुरक्षा क्षेत्र में आधुनिक सिस्टम और ऐसी व्यवस्थाएं होंगी जो लोगों को आज के सुरक्षा खतरों से बचाने में सक्षम होंगी. पीएम ने कहा, “हम उन्हें आधुनिक सिस्टम से परिचित कराएंगे और आधुनिक खतरों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यवस्थाएं बनाएंगे.”
ऐतिहासिक रूप से, 1962 में आपातकाल घोषित होने तक भारत सरकार की नागरिक सुरक्षा नीति मुख्य रूप से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नागरिक सुरक्षा उपायों की जरूरत के बारे में जागरूक करने और उस समय की इमरजेंसी रिलीफ ऑर्गनाइजेशन (ERO) योजना के तहत बड़े शहरों और कस्बों के लिए नागरिक सुरक्षा योजनाएं तैयार रखने के लिए कहने तक सीमित थी.
1962 में चीन के हमले और 1965 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद नागरिक सुरक्षा की नीति और उसके दायरे को लेकर काफी बदलाव के बारे में सोचा गया. इसके बाद मई 1968 में संसद ने नागरिक सुरक्षा अधिनियम पास किया.
फिलहाल, यह अधिनियम पूरे देश में लागू है और इसमें अन्य चीजों के अलावा, वास्तविक लड़ाई के स्तर तक न पहुंचने वाले ऐसे उपायों का प्रावधान है, जिनके जरिए भारत में किसी व्यक्ति, संपत्ति, स्थान या क्षेत्र को हवा, जमीन या समुद्र से होने वाले दुश्मन के हमले से सुरक्षा दी जा सके. यह नागरिक सुरक्षा कोर बनाने और उसके लिए नियम-कायदे बनाने का अधिकार भी देता है.
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