नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को लेकर एक बार फिर जोर दिया. विपक्ष इसे चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने के लिए परिसीमन की चाल मानता है.
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में अपना समर्थन देने की अपील की.
इस साल की शुरुआत में संसद में विधेयक के अटकने की बात करते हुए मोदी ने कहा कि यह राजनीतिक सपना ‘राजनीति के अखाड़े’ का शिकार हो गया था. अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए पीएम ने कहा कि भारत की बेटियां हर क्षेत्र में हमेशा आगे रहती हैं—चाहे STEM हो या खेल.
मोदी ने कहा, “हमने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया. लेकिन किसी न किसी कारण से पिछले 40 वर्षों से यह सपना लगातार राजनीति के अखाड़े का शिकार होता रहा है.”
आरक्षण लागू करने को “समय की ज़रूरत” बताते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से “महिलाओं को आरक्षण देकर उनका सम्मान करने में साथ आने” की अपील की.
उन्होंने कहा, “आज यहां लाल किले की प्राचीर पर तिरंगे के नीचे खड़े होकर मैं देश की सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील और आग्रह करता हूं: आइए, महिला सशक्तिकरण के चैंपियन बनिए. आगे आइए, महिलाओं का सम्मान कीजिए और यह सुनिश्चित कीजिए कि हमारी माताओं और बहनों को जल्द से जल्द विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले.”
प्रधानमंत्री ने विपक्ष से कहा कि वे “इसका श्रेय खुद ले सकते हैं”, लेकिन महिलाओं को “उनका हक” दें. उन्होंने कहा, “उन्हें भारत की नीतियां बनाने में योगदान देने दीजिए…आप श्रेय ले सकते हैं, आप तारीफ ले सकते हैं, लेकिन कृपया हमारी माताओं और बहनों को उनका हक दीजिए.”
मोदी ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य ‘लखपति दीदी’ योजना का लाभ तीन करोड़ महिलाओं तक पहुंचाना था, लेकिन वह इस लक्ष्य को पहले ही पार कर चुकी है और अब छह करोड़ महिलाओं को इसका लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है.
मोदी सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पास कराने पर जोर दे रही थी. इसमें लोकसभा की संख्या बढ़ाने और परिसीमन की प्रक्रिया कराने का प्रस्ताव है, लेकिन अप्रैल में संसद में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के बाद यह विधेयक गिर गया था. विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इसके खिलाफ वोट किया था. 12 साल में मोदी सरकार की यह पहली ऐसी विधायी हार थी. विधेयक के पक्ष में 298 वोट मिले, जबकि 230 वोट इसके खिलाफ पड़े.
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी मानसून सत्र में इस विधेयक को फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही थी, लेकिन नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर युवाओं के विरोध और इसके बाद अधिकारियों की कार्रवाई के बाद पैदा हुए हालात में मानसून सत्र लगातार हंगामे से प्रभावित रहा.
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