चेन्नई: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) के सामने एक असामान्य स्थिति है. सत्ता में आने के बाद यह पहली विधानसभा उपचुनाव में जा रही है, लेकिन वाम दल, जो सरकार को बाहर से समर्थन देते हैं, दो सीटों पर TVK के उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं और दलबदल समेत कई दूसरे मुद्दों को लेकर TVK को निशाना बना रहे हैं.
वाम दलों ने 6 अक्टूबर को होने वाले मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने के बजाय अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
CPI और CPI(M) ने जोर देकर कहा कि वे किसी औपचारिक गठबंधन या मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं हैं और राष्ट्रपति शासन या अप्रत्यक्ष BJP प्रभाव को रोकने के लिए मुद्दों के आधार पर बाहर से समर्थन देते रहेंगे. साथ ही, उपचुनावों के जरिए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक लाइन भी सामने रखेंगे.
TVK इन उपचुनावों को अपनी चुनावी ताकत और नए गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा के तौर पर देख रही है, हालांकि उसे दोनों सीटों पर जीत का भरोसा है.
ये सीटें तब खाली हुईं जब AIADMK की विधायक मरगथम कुमारवेल ने मदुरंतकम से और पी. सत्यबामा ने धारापुरम से अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में ‘दो पत्तियों’ के चुनाव चिन्ह पर जीतने के कुछ ही हफ्तों बाद इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गईं.
TVK ने तुरंत दोनों को अपने ‘सीटी’ चुनाव चिन्ह पर धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में फिर से टिकट दे दिया. इस गठबंधन में कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML शामिल हैं. वाम दलों ने इस मोर्चे में शामिल होने या इन उम्मीदवारों का समर्थन करने से इनकार कर दिया और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया.
CPI(M) के राज्य सचिव पी. षणमुगम और CPI के राज्य सचिव एम. वीरापांडियन ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में दलबदल के मुद्दे को अपने प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाया है. इन क्षेत्रों में इन उम्मीदवारों के खिलाफ प्रदर्शन भी हो चुके हैं.
वे इन उपचुनावों को “थोपे गए” चुनाव बताते हैं, न कि किसी स्वाभाविक वजह से हुए चुनाव. उनका कहना है कि विधायकों ने नतीजे आने के सिर्फ 20 दिन बाद पार्टी छोड़कर मतदाताओं को “धोखा” दिया और TVK का उन्हें दोबारा टिकट देना दिखाता है कि दलबदल को इनाम दिया जा रहा है.
षणमुगम ने अपने प्रचार के दौरान कहा कि गांवों में TVK के उम्मीदवारों को “लोग भगा रहे हैं” और सवाल किया कि अगर वे फिर चुने गए तो क्या गारंटी है कि वे दोबारा पार्टी नहीं बदलेंगे.
उन्होंने कहा, “जिन AIADMK विधायकों ने इस्तीफा दिया है, वे 20 दिनों के अंदर इस्तीफा देकर TVK में शामिल होने का कोई उचित कारण नहीं बता सकते. लोगों की भावनाओं के खिलाफ ऐसा फैसला लेना बिल्कुल गलत है. क्या गारंटी है कि वे दोबारा ऐसा नहीं करेंगे?”
CPI(M) मदुरंतकम में तमिलनाडु अछूत प्रथा उन्मूलन मोर्चे की महासचिव पी. सुगंती को उम्मीदवार बना रही है, जबकि CPI ने धारापुरम में निर्माण मजदूर और स्थानीय नेता पी. लक्ष्मणन को उम्मीदवार बनाया है. दोनों पार्टियां CPI(ML) लिबरेशन के साथ मिलकर वाम मोर्चे के रूप में चुनाव लड़ रही हैं और उन्होंने लोकतांत्रिक ताकतों से समर्थन की अपील की है.
दलबदल से लेकर कानून-व्यवस्था तक
वाम दलों ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया है. उन्होंने राज्य में हाल की हत्याओं की निंदा की है और 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निजी निवेश को लेकर पारदर्शिता की कमी का आरोप भी लगाया है.
वाम दलों ने बिजली कटौती, सफाई कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन और किसानों के कर्ज माफी के मुद्दों को लेकर भी TVK सरकार को निशाना बनाया है.
पत्तिनापक्कम में प्रस्तावित नए सचिवालय का मुद्दा भी विवाद का एक कारण है. वाम दलों ने इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन किया. सरकार ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, लेकिन CPI(M) ने फिर भी प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन के दौरान षणमुगम ने कहा कि TVK को सिर्फ 34 प्रतिशत वोट मिले हैं और सरकार CPI(M) और CPI जैसी राजनीतिक पार्टियों के समर्थन से चल रही है.
पिछले हफ्ते TVK से समर्थन वापस लेने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “अगर आप अपनी मर्जी के हिसाब से काम करेंगे और फैसले लेंगे, तो हमें भी फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.”
वाम दलों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की भी सीधे तौर पर आलोचना की है. उन्होंने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन पर उनके निजी हमलों को लेकर उनकी आलोचना की.
शिक्षा मंत्री राजमोहन ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा कि पार्टी लोगों के समर्थन पर निर्भर है और उसे जीत का भरोसा है. उन्होंने कहा कि वाम दलों के साथ संबंध अभी भी कायम हैं.
विजय दो चरणों में प्रचार करने वाले हैं. वे हर विधानसभा क्षेत्र में दो दिन बिताएंगे और जनसभाओं तथा रोड शो को संबोधित करेंगे.
प्रचार में सरकार के पहले 100 दिनों के कामकाज को सामने रखने पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही पार्टी की पहुंच को मध्यम उम्र और बुजुर्ग मतदाताओं तक बढ़ाने की कोशिश होगी. अभी पार्टी का मजबूत आधार युवा और महिला मतदाता हैं.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि एक लक्ष्य पांच अन्य सीटों पर संभावित उपचुनावों से पहले माहौल बनाना भी है.
केए सेंगोट्टैयन और अन्य नेताओं समेत मंत्री और महासचिव जमीन पर रहकर पार्टी कार्यकर्ताओं के काम का समन्वय कर रहे हैं.
पार्टी सोशल मीडिया पर भी अपना अभियान जारी रखे हुए है. इसके लिए खास इंस्टाग्राम पेज और विजय की फिल्मों के गानों पर बनाए गए रील्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनसे पार्टी को विधानसभा चुनाव जीतने में मदद मिली थी.
अपने डिजिटल अभियान के तहत पार्टी विपक्ष के हमलों का जवाब देने वाले वीडियो भी चला रही है. उदाहरण के लिए, सत्यबामा का पेज “धोखा” देने के आरोपों का जवाब देते हुए यह बताता है कि दूसरी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के नेता भी पहले एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते रहे हैं.
पार्टी ने शुरुआत में गठबंधन के नेताओं MDMK नेता वाइको, VCK नेता थोल. थिरुमावलवन, कांग्रेस नेता माणिकम टैगोर और अन्य लोगों को स्टार प्रचारक के रूप में सूचीबद्ध किया था. लेकिन चुनाव आयोग की आपत्तियों और विपक्ष की शिकायतों के बाद सूची में बदलाव किया गया. शिकायत में कहा गया था कि किसी पार्टी के सिर्फ अपने नेताओं को ही स्टार प्रचारक बनाया जा सकता है.
मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा के खिलाफ मुख्य आरोप राजनीतिक अवसरवाद और जनादेश के साथ धोखा करने का है.
दोनों ने AIADMK के टिकट पर चुनाव जीता था. मरगथम ने मदुरंतकम में दूसरी बार जीत हासिल की थी. सत्यबामा ने धारापुरम से अपना पहला चुनाव जीता था, लेकिन इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर TVK का दामन थाम लिया, जिसके कारण उपचुनाव कराने पड़े.
आलोचकों, खासकर वाम दलों और AIADMK का कहना है कि उनके दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने से दलबदल को इनाम मिल रहा है.
दोनों सीटें पारंपरिक रूप से AIADMK के मजबूत गढ़ रही हैं. यहां तक कि एक सीट हारना भी TVK के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि उपचुनावों में आमतौर पर सत्तारूढ़ पार्टी को फायदा मिलता है.
TVK इसके जवाब में उम्मीदवारों को अनुभवी स्थानीय चेहरों के रूप में पेश कर रही है, जो अब एक स्थिर सरकार के साथ हैं. पार्टी विकास और भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर भी जोर दे रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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