ED का यह अनुमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जनवरी में दाखिल की गई चार्जशीट में बताए गए निष्कर्षों से मिलता है. CBI ने इसमें कहा था कि 250 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय और सिंथेटिक घी घोटाला हुआ, जिसमें 68 लाख किलोग्राम मिलावटी वनस्पति फैट शामिल था. इसमें मुख्य रूप से पाम ऑयल और केमिकल एस्टर का इस्तेमाल किया गया था.
अपने निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने एक प्रेस रिलीज जारी की. इसमें कहा गया कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को कथित तौर पर मिलावटी घी की सप्लाई 2019 से 2024 तक पांच साल के दौरान की गई. यह प्रेस रिलीज 18 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ED के आधिकारिक हैंडल के जरिए जारी की गई.
ED ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को भी गिरफ्तार किया. आरोप है कि उन्होंने मिलावट करने वाली चीजें खरीदीं और सप्लाई कीं और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी तैयार किया. ED की जांच के अनुसार, कुल 230 करोड़ रुपये के मिलावटी घी में से करीब 96 करोड़ रुपये का घी उनकी फैक्ट्री में तैयार किया गया था.
ED ने X पर कहा, “मंगला को TTD घी मिलावट मामले में PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया और उन्हें आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में माननीय स्पेशल कोर्ट (PMLA) के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.” ED ने यह भी कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है.
ED, Hyderabad has arrested Kailash Chand Mangla promoter of M/s Sukriti Food Pvt. Ltd. on 17.09.2026 under Section 19 of the PMLA, 2002 in connection with the Tirumala Tirupati Devasthanams (TTD) ghee adulteration case. He was produced before the Hon’ble Special Court (PMLA),… pic.twitter.com/Etpn4Qo4jH
— ED (@dir_ed) September 18, 2026
एजेंसी ने मंगला को इस मामले में साजिश में शामिल लोगों में से एक बताया है. एजेंसी के अनुसार, उन्होंने मिलावट वाली चीजों की खरीद में मदद की और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी तैयार किया. ED की प्रेस रिलीज में कहा गया कि एजेंसी ने उन पर कई फ्रंट कंपनियों के जरिए मिलावटी घी की सप्लाई में तालमेल करने का भी आरोप लगाया है. इनमें श्री वैष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और ए.आर. डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
ED ने कहा कि उसकी जांच में पता चला कि मिलावटी घी कथित तौर पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई केमिकल, जिनमें MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवसेट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर शामिल हैं, का इस्तेमाल करके बनाया गया था. इसके बाद इसे TTD को एगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय के घी के रूप में सप्लाई किया गया.
ED ने फरवरी में PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करने के बाद TTD प्रसाद के घी में मिलावट के मामले की आधिकारिक जांच शुरू की थी. यह मामला तिरुपति ईस्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ा था. इस FIR में TTD को मिलावटी घी की धोखाधड़ी वाली सप्लाई करने का आरोप लगाया गया था.
जांच अपने हाथ में लेने के बाद ED ने पैसों के लेन-देन का पता लगाना शुरू किया. इसमें शेल कंपनियां, हवाला लेन-देन और पांच साल के दौरान नकली घी सप्लाई के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बिचौलियों या TTD अधिकारियों को दी गई रिश्वत शामिल थी. जांच में यह भी सामने आया कि कैलाश चंद मंगला ने घी और रिफाइंड पाम ऑयल की बिक्री और खरीद से जुड़े झूठे रिकॉर्ड बनाए और संभालकर रखे. इसका मकसद मिलावट वाली चीजों के असली इस्तेमाल को छिपाना और असली गाय के घी के उत्पादन और सप्लाई का झूठा रूप दिखाना था.
इससे पहले ED ने भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर और डायरेक्टर विपिन जैन को भी गिरफ्तार किया था. आरोप है कि उन्होंने TTD को मिलावटी घी बनाने और धोखे से सप्लाई करने की पूरी व्यवस्था तैयार की थी. यह गिरफ्तारी मामले की जारी जांच के तहत की गई थी.
TDP की राष्ट्रीय प्रवक्ता ज्योत्सना तिरुनागरी ने कहा, “ED के निष्कर्ष एक बेहद चिंताजनक तस्वीर दिखाते हैं. 2019 से 2024 के बीच करीब 230 करोड़ रुपये का मिलावटी घी कथित तौर पर TTD को सप्लाई किया गया. यह कोई एक बार की घटना नहीं थी. इससे पता चलता है कि पिछली YSRCP सरकार के पांच साल के दौरान बड़े स्तर पर, बहुत सोच-समझकर और व्यवस्थित तरीके से मिलावट की गई. इसके लिए पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए.”
यह मामला सितंबर 2024 में सामने आया था. उस समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने NDA विधायक दल की बैठक में सार्वजनिक बयान दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछली YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार के कार्यकाल में पवित्र तिरुपति लड्डू प्रसाद तैयार करने में घटिया चीजों का इस्तेमाल किया गया था. इनमें बीफ टैलो, सूअर की चर्बी और मछली का तेल जैसे जानवरों से मिलने वाले फैट शामिल थे.
कई जांच एजेंसियों को जांच में लगाया गया. CBI ने अक्टूबर 2024 में मामले की जांच अपने हाथ में ली. उसने TTD को तिरुपति लड्डू प्रसाद के लिए नकली घी की सप्लाई में हुए व्यवस्थित भ्रष्टाचार और बड़े वित्तीय धोखाधड़ी, नकली मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और केमिकल मिलावट की जांच की.
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद, कोर्ट के आदेश पर जांच पांच सदस्यों वाली एक स्वतंत्र टीम को सौंप दी गई. इस टीम की निगरानी सीधे CBI डायरेक्टर कर रहे थे.
प्रसाद और घी के सैंपल नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की CALF लैब में भेजे गए. इसकी रिपोर्ट में बताया गया कि जांच किए गए घी के सैंपल में बाहरी फैट की मात्रा काफी ज्यादा थी. इसके बाद पूरे देश में धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर काफी आक्रोश पैदा हुआ.
इस रिपोर्ट के आधार पर CBI की अगुवाई वाली SIT ने आधिकारिक तौर पर मौके पर जांच शुरू की. उसने केस की फाइलें अपने हाथ में लीं और NDDB से मिले लैब डेटा की समीक्षा की. इसके बाद इस साल जनवरी में उसने नेल्लोर की एक अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा की. CBI की रिपोर्ट में कुल 36 लोगों और डेयरी कंपनियों के नाम शामिल किए गए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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