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Wednesday, 16 September, 2026
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‘रीढ़ सीधी रखिए और UPI टैक्स वापस लीजिए’ :राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना

उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने पूरी तरह झुक जाने का फ़ैसला किया है.

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने बुधवार को सरकार से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ कमर्शियल UPI ट्रांजैक्शन पर लगाए जा रहे चार्ज को वापस लेने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से अमेरिका को फायदा होगा.

राहुल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और अपनी दादी इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया.

X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, “एक बार इंदिरा गांधी जी से पूछा गया था कि आपका झुकाव लेफ्ट की तरफ है या राइट की तरफ…? उन्होंने जवाब दिया था—न लेफ्ट की तरफ, न राइट की तरफ, मैं अपनी रीढ़ सीधी रखती हूं.”

उन्होंने कहा, “लेकिन मोदी जी का सिद्धांत अलग है. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह झुकने का फैसला कर लिया है.” उन्होंने कहा, “अमेरिका को भारी मुनाफा देने के लिए उन्होंने UPI पर चार्ज लगाया है और हर एक भारतीय पर टैक्स लगाया है.”

“मोदी जी, अपनी रीढ़ सीधी रखिए और UPI टैक्स वापस लीजिए.”

LoP ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया था कि अगर दुकानदारों पर फीस लगाई गई तो ग्राहकों से सीधे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा.

उन्होंने मंगलवार को कहा था, “सरकार कहती है कि ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदारों पर लगाई गई फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जोड़ दी जाएगी, सीधे ग्राहक की जेब से.”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने पोस्ट किया कि “U-turn Ustad को अपने इस पलटी मारने की सफाई देनी चाहिए.”

रमेश ने 11 जून, 2025 को वित्त मंत्रालय की ओर से किए गए एक पोस्ट को शेयर किया. इसमें कहा गया था, “UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाए जाने को लेकर की जा रही अटकलें और दावे पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और भ्रामक हैं.”

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस है जो कोई कारोबार क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या कुछ ज्यादा रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन जैसे डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए देता है.

बुधवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने भी कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने के फैसले पर सवाल उठाया.

उन्होंने कहा, “UPI चलाने में सालाना 20,700 करोड़ रुपये का खर्च आता है. पिछले साल RBI ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया. सरकार और RBI उस सरप्लस का सिर्फ 7 फीसदी इस्तेमाल करके UPI का पूरा खर्च उठा सकते हैं.”

श्रीनेत ने अगस्त और सितंबर में MDR को लेकर मोदी सरकार के कदमों का भी जिक्र किया.

उन्होंने कहा, “अगस्त में मोदी सरकार ने कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक पेश किया, जिससे UPI पर MDR लागू करने का रास्ता साफ हुआ. 6 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा था कि MDR को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है.”

उन्होंने कहा, “14 सितंबर को देर रात एक नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें 2,000 रुपये से ज्यादा के कमर्शियल UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया गया.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह UPI को कमजोर करने और अमेरिकी कंपनियों को इसकी कमाई में ज्यादा हिस्सा देने की कोशिश थी.

उन्होंने कहा, “यह अमेरिका के कहने पर किया गया है, जिसमें समझौता कर चुके प्रधानमंत्री ट्रंप के दबाव के आगे झुक रहे हैं.”

नए फ्रेमवर्क में क्या कहा गया है

वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन में खुद 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन के लिए MDR की दर तय नहीं की गई थी. इसमें कहा गया था कि 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या किसी दूसरे तरीके से कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे.

इसके बाद मोदी सरकार ने नया MDR फ्रेमवर्क घोषित किया. 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के तय व्यक्ति से व्यापारी  (person-to-merchant) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा. 75,000 रुपये और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा. व्यक्ति-से-व्यक्ति (person-to-person) ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे, जबकि छोटे दुकानदारों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे.

सरकार ने कहा कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि दुकानदार MDR का खर्च ग्राहकों से न वसूलें. वहीं, UPI ऐप प्रोवाइडर प्लेटफॉर्म या छिपे हुए चार्ज नहीं लगा सकेंगे.

सरकार का अनुमान है कि नए फ्रेमवर्क से करीब 96 फीसदी मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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