लखनऊ: प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में फिर से सक्रिय हो रही हैं. उनकी नज़र समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ पार्टी के प्रस्तावित गठबंधन में बड़े फायदे पर है—ज्यादा सीटों पर. उन्होंने राज्य के नेताओं से 120-130 विधानसभा सीटों का हिसाब तैयार करने को कहा है, जहां कांग्रेस को लगता है कि उसका मजबूत दावा है. इसका मकसद 2017 जैसी स्थिति से बचना है, जब पार्टी को लगा था कि सीट बंटवारे में सपा का पलड़ा भारी रहा था.
इन चर्चाओं के बीच ऐसी अटकलें थीं कि राज्य से जुड़े फैसलों में राहुल गांधी की कोर टीम मुख्य भूमिका निभाएगी. राहुल गांधी की टीम के करीबी माने जाने वाले राजेंद्र पाल गौतम को इन चर्चाओं के बीच राज्य का प्रभारी बनाया गया था. हालांकि, अजय राय को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद प्रियंका एक बार फिर यूपी के मामलों में सक्रिय हो गई हैं.
प्रियंका गांधी फिलहाल कांग्रेस की महासचिव हैं और उनके पास कोई खास जिम्मेदारी नहीं है. वह 2019 से 2023 तक उत्तर प्रदेश की प्रभारी थीं. हालांकि, उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें जीती थीं.
कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका ने यूपी के वरिष्ठ नेताओं से 120-130 विधानसभा सीटों की एक सूची तैयार करने को कहा है, जहां पार्टी को लगता है कि उसका मजबूत दावा है. इस आकलन में 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में उन सीटों पर पार्टी के अपेक्षाकृत अच्छे प्रदर्शन को भी देखा जाएगा.
प्रियंका की फिर से सक्रियता के साथ उनकी कोर टीम के सदस्य भी राज्य में सक्रिय हो गए हैं. हालांकि, उनकी निजी सचिव रहीं संदीप सिंह अब यूपी के मामलों में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन अनिल यादव और शाहनवाज खान अभी भी इसमें शामिल हैं. हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाई गईं आराधना मिश्रा और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद को भी प्रियंका का करीबी माना जाता है.
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सपा के साथ बातचीत में प्रियंका की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. पार्टी के एक नेता ने उन्हें राहुल गांधी से ज्यादा सख्त बातचीत करने वाली नेता बताया.
यूपी कांग्रेस के एक नेता ने दिप्रिंट को बताया, “यूपी में 100 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां 2012 के बाद से समाजवादी पार्टी नहीं जीती है. सपा इन सीटों में से हमें 50-60 सीटें देने की पेशकश कर सकती है, लेकिन हम करीब 100 ऐसी सीटें चाहते हैं, जहां चुनावी समीकरण हमारे पक्ष में ज्यादा बेहतर हैं और जहां हम वास्तव में कम से कम 45-50 सीटें जीतने का लक्ष्य रख सकते हैं.”
पार्टी के नेता ने कहा कि कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव जैसी स्थिति नहीं चाहती, जहां गठबंधन के साथी को दी जाने वाली सीटों का फैसला करने में सपा का पलड़ा भारी माना गया था.
उन्होंने कहा, “अब लोग राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को वोट देने के लिए तैयार हैं. उत्तर प्रदेश में 2024 के गठबंधन की राजनीतिक कहानी भी कांग्रेस ने तय की थी. 2019 में जब सपा ने बसपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, जिसे आम तौर पर महागठबंधन कहा गया, तब उसने सिर्फ पांच लोकसभा सीटें जीती थीं. 2024 में इंडिया गठबंधन के तहत सपा की सीटों की संख्या बढ़कर 37 हो गई. गठबंधन ने कांग्रेस को दलित मतदाताओं का समर्थन मजबूत करने में भी मदद की.”
सपा ने कांग्रेस से आधिकारिक सूची मिलने से इनकार किया
इस बीच, यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया है कि पार्टी ने सपा के साथ बड़ी संख्या में सीटों वाली एक सूची साझा की है.
गौतम के करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्होंने सपा को 175 विधानसभा सीटों की एक सूची भेजी थी, जिन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया था. पहली श्रेणी में पार्टी अपने दावे से कोई समझौता नहीं करना चाहती. दूसरी श्रेणी में बातचीत की गुंजाइश है, जबकि तीसरी श्रेणी की सीटों पर फैसला दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं पर छोड़ा जाएगा. सूत्रों ने चौथी श्रेणी के लिए तय मानदंड के बारे में जानकारी नहीं दी.
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सपा के लिए गठबंधन का समन्वय संभालने वाले वरिष्ठ सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि सपा को कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक सूची नहीं मिली है.
सिंह ने दिप्रिंट से कहा, “गठबंधन पर बातचीत की एक प्रक्रिया होती है. सबसे पहले दोनों पार्टियां समन्वय समितियां बनाती हैं. कांग्रेस ने अभी तक ऐसी कोई पहल नहीं की है.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर वे दावा कर रहे हैं कि 200 सीटों की सूची सपा नेतृत्व को दी गई है, तो उन्हें बताना चाहिए कि यह कब दी गई और क्या कोई आधिकारिक बैठक हुई थी. अगर कोई सूची अनौपचारिक माध्यमों से साझा की गई है, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाएगा.”
सिंह ने कहा कि सपा गठबंधन की जिम्मेदारियों को समझती है, लेकिन उसे उम्मीद है कि कांग्रेस बातचीत को गंभीरता से लेगी.
उन्होंने कहा, “जब भी राहुल गांधी विदेश जाते हैं, कांग्रेस खेमे से गठबंधन को लेकर गलत खबरें आने लगती हैं. अभी तक कोई समझौता तय नहीं हुआ है.”
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