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Saturday, 24 October, 2026
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पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा हैदराबाद, रोज 8,000 टैंकरों का सहारा, तीन दिन में एक बार सप्लाई

हैदराबाद के 16 मंडलों में से सिर्फ़ तीन में ही मॉनसून के दौरान काफ़ी बारिश हुई, जिससे तेलंगाना की राजधानी के 1.5 करोड़ लोगों को टैंकरों से पानी खरीदने के लिए जूझना पड़ा.

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हैदराबाद: हैदराबाद के 1.5 करोड़ लोग पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं. इसकी वजह अलग-अलग इलाकों में पानी की असमान उपलब्धता, खेती और उद्योगों में पानी की बढ़ती मांग और अल नीनो के कारण मानसून में हुई कम बारिश है. तेलंगाना के 600 से ज्यादा मंडलों में से 330 से अधिक मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. वहीं, राज्य की 6,000 से ज्यादा झीलों में से सिर्फ करीब 500 में ही पानी बचा है. यह जानकारी राज्य के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक है.

हैदराबाद में 16 मंडलों में से सिर्फ तीन में पर्याप्त बारिश हुई है. इसके चलते कई इलाकों के लोग पानी के टैंकर खरीदने के लिए मजबूर हैं. शहर में ऐसी ही स्थिति 25 साल पहले भी बनी थी, जब जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिरने के कारण शहर में पानी खत्म होने का खतरा पैदा हो गया था.

राज्य की राजधानी में पानी के टैंकरों की बुकिंग बढ़कर रोजाना 6,000 से 8,000 तक पहुंच गई है. हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (HMWSSB) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) अशोक रेड्डी ने अधिकारियों को टैंकर चलाने वाले और ऑपरेटरों को बोर्ड से जोड़ने और उनका रजिस्ट्रेशन शुरू करने का निर्देश दिया है.

सिकंदराबाद कैंटोनमेंट और हैदराबाद के बाहरी इलाकों के कई हिस्सों में पानी की गंभीर कमी की खबरें सामने आई हैं. यहां लोगों को तीन से चार दिन में सिर्फ एक बार पीने का पानी मिल रहा है.

अशोक रेड्डी ने इस हफ्ते की शुरुआत में हुई समीक्षा बैठक में कहा, “कम बारिश के कारण सिंगूर डैम और नागार्जुन सागर डैम में पानी का स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर गया है. ऐसे में HMWSSB पानी बचाने के लिए शहर के बड़े हिस्सों में हर दूसरे दिन पानी देने की व्यवस्था को बदलकर हर तीन दिन में एक बार पानी देने की योजना पर काम कर रहा है.”

हैदराबाद के आउटर रिंग रोड (ORR) के दायरे में आने वाले 2,053 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र कोर अर्बन रीजन इकोनॉमी (CURE) में पानी की सप्लाई उस्मान सागर, हिमायत सागर, सिंगूर डैम और नागार्जुन सागर डैम से होती है. इन जल स्रोतों को कृष्णा और गोदावरी नदी घाटियों से पानी मिलता है.

सिंचाई और कमांड एरिया डेवलपमेंट (Irrigation & CAD) विभाग के मुताबिक, उस्मान सागर में पानी का स्तर उसकी कुल क्षमता 3.5 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) से घटकर 2.2 TMC रह गया है. वहीं, हिमायत सागर में 2.5 TMC की कुल क्षमता के मुकाबले सिर्फ 2.1 TMC पानी बचा है. सिंगूर डैम में 29.9 TMC की कुल क्षमता के मुकाबले करीब 3.4 TMC पानी बचा है. वहीं, नागार्जुन सागर डैम में 312 TMC की क्षमता के मुकाबले 184.2 TMC पानी मौजूद है. HMWSSB ने पानी की इमरजेंसी घोषित कर दी है. आशंका है कि कुछ जलाशयों में दिसंबर के मध्य से लेकर महीने के आखिर तक पानी खत्म हो सकता है.

रेड्डी ने कहा, “हम पानी की वैकल्पिक व्यवस्था तलाश रहे हैं. इसमें गोदावरी ड्रिंकिंग वॉटर स्कीम के जरिए अतिरिक्त पानी लाना और कृष्णा नदी से ज्यादा पानी लेने की संभावना शामिल है. हिमायत सागर और उस्मान सागर में अतिरिक्त फिल्टर बेड बनाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है. इसके अलावा, ट्रीट किए गए गंदे पानी का इस्तेमाल निर्माण कार्यों, बागवानी और औद्योगिक गतिविधियों में करने पर भी विचार हो रहा है.”

HMWSSB सभी 16 मंडलों में भूजल संसाधनों का आकलन करने के लिए पानी का ऑडिट कर रहा है. हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन एरिया के स्पेशल चीफ सेक्रेटरी जयेश रंजन ने अधिकारियों को पानी बचाने और बिजली की खपत कम करने के लिए एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है.

सूखे के महीने करीब आने के साथ पानी का संकट और गंभीर होता जा रहा है. ऐसे में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों ने शुक्रवार को एक आपात बैठक बुलाई. इसमें आने वाले महीनों में पीने के पानी की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी योजनाओं की समीक्षा की गई. बिजली और वित्त मंत्री भट्टी विक्रमार्क राज्य के सरकारी उपक्रम सिंगरेनी कोलियरीज में कोयले के भंडार की भी समीक्षा कर सकते हैं.

हैदराबाद में बावड़ियों को दोबारा ठीक करने और उन्हें बचाने के लिए अकार्मा फाउंडेशन के साथ काम करने वाली वरिष्ठ आर्किटेक्ट चिन्मयी मोक्षगुंडम ने इस स्थिति को चिंताजनक बताया.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “आंकड़े डराने वाले हैं, लेकिन विडंबना यह है कि पानी मौजूद है. समस्या यह है कि हम यह नहीं समझ पाए हैं कि पानी का सही तरीके से प्रबंधन कैसे किया जाए. हैदराबाद के ORR क्षेत्र में 150 से ज्यादा बावड़ियां हैं. इन्हें जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों से पानी मिलता है. अफसोस की बात है कि अब ये कचरा फेंकने की जगह बन गई हैं.”

उन्होंने कहा कि अगर करीब 400 साल पहले बनी इन बावड़ियों को दोबारा ठीक करके इस्तेमाल लायक बनाया जाए, तो हैदराबाद में पानी का संकट कम से कम 50 फीसदी तक घट सकता है.

पानी बचाने के उपाय

HMWSSB और तेलंगाना सरकार ने आने वाले महीनों में पानी की कमी को रोकने और पानी बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं.

हैदराबाद में पहली बार एक खास पहल के तहत वॉटर बोर्ड 1 नवंबर से ग्रीन वॉटर टैंकर सेवा शुरू करेगा. इसका मकसद ट्रीट किए गए गंदे पानी का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाना है. इन टैंकरों के जरिए रियल एस्टेट सेक्टर, बागवानी और ऐसे दूसरे कामों के लिए ट्रीट किया हुआ पानी दिया जाएगा, जिनमें पीने के पानी की जरूरत नहीं होती.

बोर्ड ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए PAANI (Promote Awareness And Nurture Initiatives for saving water) ऐप के जरिए एक पहल भी शुरू की है. इसके तहत स्वयंसेवक पानी से जुड़ी समस्याओं की जानकारी दे सकेंगे.

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, जिनके पास नगर प्रशासन और शहरी विकास (MA&UD) विभाग की जिम्मेदारी भी है, ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों और पीने के अलावा दूसरे कामों के लिए बोरवेल खोदने की अनुमति सीमित करने का निर्देश दिया है. हालांकि, ऐसे कामों के लिए पहले से मौजूद बोरवेल को और गहरा किया जा सकता है.

पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की थी कि वे एक पूरा फसल चक्र टाल दें. उन्होंने कहा था कि सरकार के पास खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं है. तेलंगाना में सर्दी देर से शुरू होने के कारण सरकारी सूत्रों का अनुमान है कि पानी का संकट अगले आठ महीने तक, यानी अगले साल जून तक बना रह सकता है.

सरकार ने पीने के पानी का गलत इस्तेमाल करते पाए जाने वाले लोगों पर जुर्माना लगाने का भी ऐलान किया है. पहली बार नियम तोड़ने वालों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, जिन रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और मकान मालिकों की लापरवाही के कारण छत पर रखी पानी की टंकियां या मोटर पंप चलते रहने से पानी बहकर बर्बाद होता है, उन पर ज्यादा जुर्माना लगाया जाएगा.

HMWSSB के मैनेजिंग डायरेक्टर ने पिछले शुक्रवार को एक सम्मेलन में बताया कि नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है. इसके अलावा, HMWSSB एक्ट, 1989 के तहत पानी और सीवरेज के कनेक्शन हमेशा के लिए काटे भी जा सकते हैं.

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन भी सरकार के साथ मिलकर पानी बचाने के प्रयास तेज कर रही हैं. यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (UFERWAS) ने हैदराबाद और साइबराबाद में ‘एवरी ड्रॉप काउंट्स’ नाम से एक अभियान शुरू किया है. इसके तहत आवासीय इलाकों में पानी की स्थानीय स्तर पर होने वाली कमी को रोकने के लिए सात सूत्रीय योजना बनाई गई है. इसमें बागवानी में पानी का इस्तेमाल कम करना और कार धोने तथा घरों के सामने की जगह साफ करने के लिए रिसाइकिल किए गए पानी का इस्तेमाल करना शामिल है.

अर्बन डेवलपमेंट फोरम के प्रमुख एम. श्रीनिवास ने कहा कि सरकार ने ये कदम उठाने में बहुत देर कर दी है और वह लोगों का भरोसा जीतने में नाकाम रही है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “पिछले सितंबर में गणेश चतुर्थी के दौरान करीमनगर में मूर्तियों के विसर्जन के लिए पानी नहीं था. उस समय तालाबों में पानी भरने और मूर्तियों का विसर्जन करने के लिए टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा था. सरकार को पानी की कमी से निपटने के लिए पहले ही एक कार्ययोजना तैयार कर लेनी चाहिए थी. सिंचाई, कृषि, उद्योग और नगर प्रशासन विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण सभी लोग इस संकट का सामना कर रहे हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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