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Sunday, 5 July, 2026
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बांकीपुर उपचुनाव में BJP के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगे प्रशांत किशोर

जन सुराज ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को मैदान में उतारा है. इससे बीजेपी के साथ सीधी टक्कर होगी, क्योंकि यह सीट राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के कारण खाली हुई थी.

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नई दिल्ली: जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर आगामी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे. यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है.

इसकी घोषणा रविवार को पार्टी अध्यक्ष मनोज भारती ने की. अब इस सीट पर जन सुराज पार्टी और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होगा.

प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ूंगा. हम सिर्फ विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि बिहार में एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं.”

बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम इसे बिहार में एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत मानते हैं. यह किसी एक व्यक्ति का गढ़ नहीं है, बल्कि बिहार की जनता का गढ़ है. चीजें निश्चित रूप से बदलेंगी. लोगों को सबसे अच्छे उम्मीदवार को वोट देना चाहिए, जो इस नई राजनीति की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता हो.”

उन्होंने आगे कहा, “हम सिर्फ विधानसभा सीटों के लिए चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करना चाहते हैं. जब हम चुनाव लड़ रहे हैं, तब बिहार के मतदाताओं पर राज्य के लिए एक नई शुरुआत करने की जिम्मेदारी है. हम अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. हमारा किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं है. लेकिन जो भी हमारा समर्थन करना चाहता है, उसका स्वागत है.”

किशोर ने अपनी पार्टी के साथियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने उन पर भरोसा जताते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी है.

उन्होंने कहा, “मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि पिछले चार साल से जन सुराज ही मेरा जीवन रहा है. और अगले दस साल तक, जब तक बिहार में बदलाव का सपना पूरा नहीं हो जाता, मेरा कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है. मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की जिम्मेदारी को उसी लक्ष्य की ओर एक कदम मानता हूं.”

घोषणा के बाद जश्न. | JSP

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशोर ने मोदी सरकार और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, “सम्राट चौधरी के आचरण, चरित्र और सार्वजनिक छवि पर जनता का भरोसा नहीं है. जनता ने नीतीश कुमार को चुना था. सम्राट चौधरी पिछली खिड़की से मुख्यमंत्री बने. हम लंबे समय से यह बात कह रहे हैं और अब जनता पर जिम्मेदारी है कि वह जन सुराज पार्टी को चुनकर अपना जनमत दे.”

उन्होंने कहा, “चाहे प्रधानमंत्री मोदी के ‘बॉस’ (नितिन नबीन) की सीट पर चुनाव लड़ने की बात हो या उस सीट पर जहां सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद चुनाव हो रहा है. जो काम जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में नहीं कर सकी, वह इस बार बांकीपुर की जनता कर सकती है.”

किशोर ने आगे कहा कि नवंबर 2025 में लाखों लोग जन सुराज के विचारों और प्रयासों से जुड़े थे.

लेकिन चुनाव नतीजों के बाद, उनके मुताबिक, कई लोग निराश और हतोत्साहित हो गए.

उन्होंने कहा, “उनमें से ज्यादातर लोगों का मानना है कि अगर जन सुराज बांकीपुर उपचुनाव जीतता है, तो इससे न सिर्फ आंदोलन मजबूत होगा बल्कि बिहार में बदलाव की सोच को भी नई ताकत मिलेगी. मैं इस जिम्मेदारी को विनम्रता से स्वीकार करता हूं और अपने सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और नेताओं का धन्यवाद करता हूं.”

बांकीपुर विधानसभा सीट अप्रैल 2026 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उनके विधायक पद से इस्तीफा देने पर खाली हुई थी. इस सीट पर उपचुनाव 30 जुलाई को होगा.

उन्होंने कहा, “अगर आप जन सुराज का एक प्रतिनिधि चुनकर भेजेंगे, तो हम 242 विधायकों पर भारी पड़ेंगे और जनता की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर लेकर उनकी आवाज बनेंगे.” उन्होंने उपचुनाव के प्रतीकात्मक महत्व पर भी जोर दिया.

प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को दो साल की बिहार यात्रा ‘जन सुराज पदयात्रा’ पूरी करने के बाद जन सुराज पार्टी की स्थापना की थी. उन्होंने 2021 में राजनीतिक सलाहकार का काम छोड़ने के बाद यह पदयात्रा शुरू की थी और राज्य के हजारों गांवों का दौरा किया.

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन खुद प्रशांत किशोर ने चुनाव नहीं लड़ा था. पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली और उसे सिर्फ 3.4 प्रतिशत वोट मिले.

बांकीपुर सीट को हाई-प्रोफाइल सीट माना जाता है और यह भाजपा का मजबूत गढ़ रही है. पहले इसे पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था. नितिन नबीन के पिता और भाजपा के वरिष्ठ नेता किशोर प्रसाद सिन्हा ने 1995 से 2006 में अपने निधन तक इस सीट से कई बार जीत हासिल की थी.

पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने राजनीति में कदम रखा और 2006 के उपचुनाव में पहली बार यह सीट जीती.

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में नितिन नबीन ने लगातार पांचवीं बार यह सीट जीती थी. उन्होंने राजद उम्मीदवार को करीब 50,000 वोटों के अंतर से हराया था.

बांकीपुर में 25 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता नितिन नबीन के कायस्थ समुदाय से आते हैं. इसके अलावा यहां भूमिहार, राजपूत, यादव और कुर्मी मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है.

प्रशांत किशोर ने पिछले साल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था ताकि वह पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दे सकें. बाद में उन्होंने माना कि यह शायद “गलती” थी.

भाजपा ने अभी तक इस सीट के लिए आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना होगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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