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Thursday, 13 June, 2024
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वीरप्पन की बेटी और NTK की कृष्णगिरी से उम्मीदवार विद्या रानी बोलीं, ‘मेरे पिता मेरी प्रेरणा हैं’

विद्या की राजनीतिक यात्रा 2020 में बीजेपी के साथ शुरू हुई. अब, एनटीके उम्मीदवार के रूप में वे घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं — शिक्षित युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर, स्थानीय किसानों के लिए पानी.

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चेन्नई: तमिलनाडु के कृष्णागिरी में विद्या रानी विरासत और महत्वाकांक्षा की महान शख्सियत की तरह उभरती हैं. कुख्यात वन डाकू वीरप्पन की बेटी, जिसने दशकों तक तमिलनाडु और कर्नाटक में कानून प्रवर्तन को अपने नियंत्रण में रखा, विद्या अपने पिता की अदम्य भावना से प्रेरणा लेती हैं.

बुधवार को स्पेशल टेलीफोनिक इंटरव्यू में उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “मैं अपने पिता को बड़ी प्रेरणा मानती हूं क्योंकि मेरे आस-पास के लोग ज़िंदगी भर मुझे बताते रहे कि उन्होंने क्या किया है.”

वीरप्पन की मौत के 20 साल बाद भी उसके इतिहास पर विवाद है, बावजूद इसके 33 साल की विद्या, नाम तमिलर काची (एनटीके) में शामिल हो रही हैं. दिप्रिंट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी प्रमुख सीमान के दृष्टिकोण की प्रतिध्वनि मिलती है, जो उनके पिता के आदर्शों पर चलते हैं.

श्रीलंकाई गृहयुद्ध (1983-2009) की प्रतिक्रिया में 2010 में गठित एक तमिल राष्ट्रवादी पार्टी, एनटीके ने अभी तक किसी भी चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती है. 2016 के विधानसभा चुनाव में चुनावी शुरुआत करने वाली पार्टी ने उस साल 1.06 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया, जो 2021 में बढ़कर 6.89 प्रतिशत हो गया.

लॉ ग्रेजुएट, विद्या की यात्रा 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ शुरू हुई और अब कृष्णागिरी सीट से एनटीके की उम्मीदवार बनकर वे निर्णायक मोड़ लेने वाली हैं.

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कृष्णगिरि से दिप्रिंट से बात करते हुए विद्या ने कहा कि ZEE5 डॉक्यू-सीरीज़ कूस मुनिसामी वीरप्पन भी उनके लिए पार्टी में शामिल होने के लिए एक प्रेरणा थी क्योंकि इसने उन्हें याद दिलाया कि उनके पिता क्या करने की इच्छा रखते थे.

जयचंद्र हाशमी, प्रभावती और वसंत बालाकृष्णन की तिकड़ी द्वारा निर्देशित 2003 में आई सीरीज़ वास्तविक फुटेज और कई लोगों के इंटरव्यू का उपयोग करके वीरप्पन की ज़िंदगी को उजागर करती है, जिसमें नक्कीरन गोपाल जैसे पत्रकार शामिल हैं, जिन्होंने वीरप्पन, एन. राम और अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता रोहिणी का इंटरव्यू लिया था. श्रृंखला में एनटीके प्रमुख सीमन भी हैं.

उन्होंने कहा, “इसे देखने के बाद मैं लगातार उन सभी बातों के बारे में सोच रही थी जो मेरे पिता ने वीडियो में कही थीं. उन्होंने जो कहा वो वैसा ही था जैसा सीमान चाचा बताते हैं. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने पिता के सभी अच्छे विचार, जो मेरे जैसे हैं, रखना चाहती हूं. इसलिए, मुझे लगा कि यह सही दिशा है.”

धर्मपुरी जिले के नेरूपुर गांव में पली-बढ़ी विद्या का बचपन परिवार की दीवारों तक सीमित न होकर, समुदाय के बीच बीता. अपने बचपन के बारे में बात करते हुए, जो उन्होंने सात साल की उम्र तक अपनी नानी के साथ बिताया, उन्होंने कहा, “बचपन से ही, मैं हमेशा जनता के करीब रही हूं. मैं उनके द्वारा पाली गई बच्ची थी, परिवार द्वारा नहीं.”

उनकी मां जेल में थीं और उनके पिता जंगल की गोद में थे, गांव उनका अभयारण्य, उनका संरक्षक था. उन्होंने कहा, “मैं पूरे गांव की बच्ची थी. मैं जहां भी गई, सभी ने मेरा ख्याल रखा. अब, मैं उन्हें यह लौटाना चाहती हूं.”


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बीजेपी से एनटीके तक, उनका राजनीतिक सफर

विद्या ने 2020 में राजनीति में कदम रखा. उनके अनुसार, यह फैसला तत्कालीन भाजपा के कन्याकुमारी सांसद पोन राधाकृष्णन के 2019 में एक स्थानीय पार्टी नेता के माध्यम से उनके संपर्क में आने के बाद लिया गया.

उन्होंने बताया, “मैं शुरू से ही तमिलनाडु के लोगों के लिए कुछ करना चाहती थी. जब मैं पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई, तो मैंने सोचा कि मुझे वो मौका दिया जाएगा. मैं इस दिशा में काम भी कर रही थी.”

यह दावा करते हुए कि उन्होंने बीजेपी के साथ अपने कार्यकाल के दौरान ज़मीनी हकीकत सीखी, विद्या ने कहा, “जब मैं बीजेपी में शामिल हुई, तो मैं राजनीति में नई थीं. उन्होंने मुझे बुलाया और मैं भी राजनीति को समझना चाहती थी. मेरे मन में मोदीजी (पीएम नरेंद्र मोदी) के लिए बहुत सम्मान है. मैं अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही थी. यह एक विकल्प था और मैंने इसे चुन लिया.”

हालांकि, वे 2023 में भाजपा में निष्क्रिय थीं, कृष्णागिरी में 60 बच्चों का प्रीस्कूल चलाने में व्यस्त थीं, जो वे पिछले तीन साल से कर रही हैं.

बाद में, एनटीके नेता सीमान ने उनसे संपर्क किया. उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “जब लोकसभा चुनाव आए, तो वे (सीमन) मेरे नाम की घोषणा करना चाहते थे और मुझे सीट दी गई. यह मेरे लक्ष्य की ओर पहला कदम है.”

विद्या के अनुसार, एनटीके में जाने का उनका फैसला उनके राज्य की सेवा करने की इच्छा से प्रेरित था.

उन्होंने कहा, “एक राष्ट्रीय पार्टी की प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी होती है. उदाहरण के तौर पर अगर आप कावेरी मुद्दे को लें तो कर्नाटक सरकार पानी देने को तैयार नहीं है, लेकिन यहां (तमिलनाडु) लोगों को पानी की ज़रूरत है. इसलिए, जब केंद्र सरकार की बात आती है, तो उन्हें राज्यों पर एक समान नज़र डालनी होगी. वे किसी एक का पक्ष नहीं ले सकते.”

उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में, “हमें केंद्र सरकार से हर अधिकार के लिए संघर्ष करना होगा.”

‘लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस करना’

अपनी पहली चुनावी यात्रा शुरू करते हुए विद्या, अपने अभियानों के दौरान, खुद को जनता के बीच गर्मजोशी से घिरा हुआ पाती हैं, उनकी आंखें खुशी और मान्यता के आंसुओं से चमकती हैं.

उन्होंने कहा, “जब मैं प्रचार के लिए बाहर जाती हूं, तो लोग मुझे (वीरप्पन की बेटी की तरह) नहीं पहचानते. मेरी बात सुनने के बाद, उनकी प्रतिक्रिया अत्यधिक सकारात्मक होती है, कुछ के तो खुशी के आंसू भी निकल आते हैं. मैं तो यही देखती हूं.”

उन्होंने कहा, वीरप्पन की बेटी के रूप में बड़ा होना एक ही समय में साहसिक और सार्थक था. “इसकी अपनी मुश्किलें थीं, लेकिन मैंने इससे सीखा और बड़ी हुई हूं. इस तरह मुझमें परिपक्वता आई और मैंने जिन कठिनाइयों का सामना किया, उनके अनुसार अपने चरित्र का निर्माण किया.”

नेरुपुर में अपने बचपन का एक किस्सा साझा करते हुए, एनटीके उम्मीदवार ने कहा कि वे ग्रामीणों से अपने पिता की कहानियां सुनकर बड़ी हुई हैं. ऐसी ही एक कहानी को याद करते हुए उन्होंने कहा, “एक जंगल में एक बुजुर्ग दंपत्ति जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठा कर रहे थे, तभी उनका सामना मेरे पिता से हुआ…दंपति ने अपने बीच एक ही धोती साझा की, पुरुष ने इसे अपनी कमर के चारों ओर पहना और एक फटा हुआ टुकड़ा अपने कंधे पर लपेटा, जबकि महिला ने दूसरा आधा पहना. मेरे पिता को देखकर, उन्होंने अपना काम बंद कर दिया और उस आदमी ने तुरंत अपने कंधे के कपड़े से महिला को ढंक दिया…”

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “…उनकी स्थिति से प्रभावित होकर, मेरे पिता ने अपनी 25 लोगों की पूरी टीम के लिए 500 रुपये की सीमित धनराशि होने के बावजूद, उदारतापूर्वक उस व्यक्ति को पैसे दिए और उससे अपने लिए एक साड़ी और एक धोती खरीदने का आग्रह किया.”


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चुनावी वादे: पानी, रोज़गार

विद्या के मुताबिक, उनके चुनावी वादों में शिक्षित युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करना और स्थानीय किसानों के लिए पानी सुनिश्चित करना शामिल होगा.

कृष्णागिरि निर्वाचन क्षेत्र, जहां से मौजूदा कांग्रेस सांसद ए. चेल्लाकुमार हैं, ने 1951 के आम चुनावों के बाद से पार्टी को नौ बार सत्ता दिलाई, इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) (पांच बार) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) को (तीन बार) वोट मिले हैं.

इस साल विद्या कांग्रेस के पूर्व विधायक के. गोपीनाथ, एआईएडीएमके के वी. जयप्रकाश और भाजपा के सी. नरसिम्हन के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “यहां के आसपास के सभी गांवों तक पानी नहीं पहुंचता है. मैं उन सभी जल निकायों की जांच करने और उन्हें ठीक करने के बारे में सोच रही हूं जो इस्तेमाल में नहीं हैं. वे जल कनेक्टिविटी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करेंगी.”

उन्होंने कहा कि उनकी सूची में एक और एजेंडा शिक्षित युवाओं को छोटे पैमाने के व्यवसाय शुरू करने के लिए कर्ज़ लेने में मदद करना है. उन्होंने कहा कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करके वन क्षेत्र के पास रहने वाले स्थानीय लोगों के जीवन का भी उत्थान करेंगी.

विद्या ने कहा, “मैं 200 प्रतिशत आश्वस्त हूं, जनता सकारात्मक है और मेरा समर्थन करना चाहती है.” उनके अनुसार, जिले में स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उनके परिचय के कारण उन्हें इस सीट के लिए चुना गया था.

उन्होंने ज़ोर दिया, “लोग राज्य में एनटीके के विकास के लक्ष्य के बारे में जागरूक हो रहे हैं. सरकार को लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवा देने में सक्षम होना चाहिए, न कि केवल मुफ्त सुविधाएं. एनटीके ऐसा करने में सक्षम होगी.”

उन्होंने कहा, “राज्य 70 साल तक द्रविड़ पार्टियों के हाथों में था. मैं केवल एक ही चीज़ की उम्मीद करती हूं. मेरे पिता ने सीरीज़ में कहा था कि एक बार जब वे बाहर आएंगे, तो वे राजनीति में शामिल होंगे और आज़ादी दिलाएंगे – बेरोज़गारी से मुक्ति, रोज़मर्रा की समस्याओं से मुक्ति, चिकित्सा सेवाओं की कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी से मुक्ति. वे चाहते थे कि लोग सच में खुश और संतुष्ट रहें.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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