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Tuesday, 11 June, 2024
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योगी के बायोग्राफी लेखक ने कैसे भारत के युवाओं को मोदी को वोट देने की ‘101 वजहें’ दी हैं

शांतनु गुप्ता की ‘मोदी को वोट देने की 101 वजहें’ प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल (दूसरे) के आखिरी दशक का गुणगान करती है और इसका टार्गेट पहली बार वोट देने वाले मतदाता हैं.

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नई दिल्ली: इस ग्राफिक उपन्यास के पहले पन्ने पर राजनीतिक स्पेक्ट्रम के अलग-अलग धाराओं के दो पत्रकार एक टेलीविजन स्टूडियो में आमने-सामने बैठे हैं. एक सवाल करता है कि उसे 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट क्यों देना चाहिए. दूसरे ने एक नहीं, बल्कि 101 वजहों के साथ जवाब दिया – हर एक को परिश्रमपूर्वक कॉमिक की तरह से प्रस्तुत किया गया.

101 Reasons, Why I Will Vote for Modi’, शांतनु गुप्ता द्वारा लिखी गई किताब है, जो 2017 में योगी आदित्यनाथ की बायोग्राफी, ‘The Monk Who Became Chief Minister’ के लिए जाने जाते हैं. अंग्रेज़ी और हिंदी में प्रकाशित, ग्राफिक नॉवेल प्रधानमंत्री मोदी के (दूसरे) कार्यकाल में पिछले दशक की प्रशंसा करता है और यह पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर केंद्रित है.

उपन्यास में गुप्ता खुद एक पात्र हैं, जो पाठक और उसके प्रतिद्वंद्वी रिपोर्टर – जिसका नाम रवि भाई है, जो कि वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार पर आधारित है – दोनों को समय और स्थान के जरिए से यह समझा रहा है कि मोदी ने भारत को कैसे बेहतरीन बना दिया है. उनकी किताब मोदी के नेतृत्व में नए भारत का दस्तावेजीकरण करने वाले प्रकाशनों की सीरीज़ में सबसे नई है. यह बढ़ते ज्ञान-उत्पादन उद्योग का हिस्सा है जो भाजपा को नए नैरेटिव गढ़ने में मदद कर रहा है.

गुप्ता ने कहा, “मुझे पता था कि मैं किताब लिखना चाहता हूं, लेकिन मैं इसे अनोखे ढंग से लिखना चाहता था. इस तरह की किताबों की शेल्फ लाइफ कम होती है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि यह पिछले 10 साल में मोदी के काम का एक अच्छा सार-संग्रह साबित होगी.”

अगर मोदी आगामी 2024 का लोकसभा चुनाव हार जाते हैं – जो कि गुप्ता का मानना है कि असंभव है – तो ग्राफिक नॉवेल के अप्रासंगिक होने का जोखिम है और अगर वे जीत जाते हैं, तो इसे मतदाता के लिए सामान्य ज्ञान के रूप में खारिज किया जा सकता है, लेकिन योगी की बायोग्राफी और उसके बाद के ग्राफिक नॉवेल पिछले वाले की सफलता को देखते हुए, गुप्ता को उम्मीद है कि उनका नया काम भी समय की कसौटी पर खरा उतरेगा.

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शैलियों का एक प्रदर्शन

यह उपन्यास शेवनिंग-गुरुकुल फेलोशिप पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बिताए गए समय के दौरान राजनीतिक टिप्पणी में कॉमिक्स के उपयोग पर गुप्ता के शोध का एक उदाहरण है.

10 चैप्टर्स में से हर एक अलग ग्राफिक शैली को दिखाता है, जो गुप्ता चैप्टर की थीम से मेल खाता है. उदाहरण के लिए सेना का अनुभाग जापानी मंगा तकनीक का उपयोग करता है — क्योंकि मंगा पुरुष पात्रों को मर्दाना और सुंदर बनाता है. अर्थव्यवस्था पर चैप्टर काले और सफेद रंग में है क्योंकि यह एक सादा विषय हो सकता है, जबकि मोदी के तहत भारत के ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ पर अन्य खंड को नीले रंग की शैली में दिखाया गया है.

परिचित व्यक्ति पूरे उपन्यास में दिखाई देते हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर को कई विशाल पैनल मिलते हैं, जबकि सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भारत के बुनियादी ढांचे पर एक चैप्टर में प्रमुखता से दिखाया गया है. गृह मंत्री अमित शाह का भी अपना पैनल है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मोदी के साथ पैनल स्पेस साझा करने का मौका मिलता है, जबकि जो बाइडन, डोनाल्ड ट्रंप, बोरिस जॉनसन और शी जिनपिंग जैसे विदेशी राजनीतिक दिग्गज अतिथि की भूमिका में हैं.

गुप्ता ने योगी को मुख्य पात्र की तरह शामिल नहीं किया, इसके बजाय केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन बायोग्राफी लेखक होने के नाते, वे कुछ पाठ्य संदर्भों और दो ग्राफिक संदर्भों को लिखने से खुद को रोक नहीं सके. इनमें से एक हैं अयोध्या में राम मंदिर की पृष्ठभूमि में योगी.

मोदी सर्वव्यापी हैं, अलग-अलग अध्यायों में अलग-अलग कार्टून का अवतार ले रहे हैं.

कुछ भी सीमा से बाहर नहीं है: प्रधानमंत्री के वायरल योग आसन को एक अध्याय में सीपिया/मौन शैली में प्रस्तुत किया गया है, जबकि न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में चमकदार रोशनी के तहत भारी भीड़ के लिए उनका विजयी संबोधन यथार्थवादी कला शैली में दिखाया गया है.

गुप्ता आगाह करते हैं कि उनकी किताब 2014 में आई बाल नरेंद्र कॉमिक सीरीज़ से अलग है. वे बच्चों की किताबें थीं. यह किताब थोड़े अधिक उम्र के पाठकों के लिए है.

गुप्ता ने कहा, “यह किताब पहली बार के मतदाताओं पर लक्षित नीतिगत टिप्पणी है, जो 2014 में आठ या नौ साल के रहे होंगे.”

वे आम लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए काल्पनिक पात्रों का उपयोग करते हैं, जो बताते हैं कि कैसे मोदी की विभिन्न योजनाओं और पहलों ने उनकी ज़िंदगी को बेहतर बनाया है. मोदी को वोट देने का हर कारण भगवा रंग में गिना गया है.

गुप्ता को मूल रूप से यह विचार एक साल पहले आया था. हालांकि, ऑक्सफोर्ड में उनकी तीन महीने की फेलोशिप समाप्त होने के बाद उन्होंने जनवरी में थीसीस पूरी की. एक नियमित टीवी पैनलिस्ट के रूप में गुप्ता के पास पहले से ही मोदी के कार्यकाल के बारे में बात करने के लिए कईं बिंदु थे, लेकिन उन्होंने खुद को पीएम के लिए वोट करने के लगभग 95 कारणों पर अटका हुआ पाया. आखिरकार, वे छह और वजहें जोड़ने में सफल रहे.

उनके प्रकाशक, इतिहास अकादमी ने 101 कारणों पर टिके रहने का सुझाव दिया – क्योंकि यह किताब के शीर्षक को स्पेशल बनाता है जब कोई व्यक्ति सवाल पूछता है.


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मोदी के भारत की एक सैर

टेलीविजन स्टूडियो से गुप्ता का किरदार मोदी आलोचक को सीधे उत्तर प्रदेश ले जाता है.

वहां, वे कई पात्रों में से सबसे पहले मिलते हैं, कलावती नाम की एक बनारसी महिला, जिसके जीवन में पीएम आवास योजना से काफी सुधार हुआ है, जिसने उसे पक्का घर बनाने के लिए 4 लाख रुपये दिए. फिर, कॉमिक रमावती की ओर बढ़ती है, जो ज़ोर देकर कहती हैं कि मोदी और योगी के तहत नए यूपी में महिलाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

गुप्ता का कहना है कि वे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से अवगत हैं जो यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध को सबसे ज्यादा बताता है, लेकिन चेतावनी देते हैं कि इसे संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए. यह प्रति व्यक्ति अपराध की ओर इशारा करता है, जो यूपी जैसे घनी आबादी वाले और बड़े राज्य में अनिवार्य रूप से अधिक होगा. उन्होंने कहा, “यूपी से होने के नाते, मैं दिखाना चाहता था कि महिलाओं की सुरक्षा में कैसे सुधार हुआ है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अपराध नहीं हो रहे हैं, लेकिन उनमें कमी आई है और कार्रवाई बहुत सख्त है — यही मैं दिखाना चाहता था.”

लेकिन गुप्ता मानते हैं कि एक मूल निवासी और योगी के जीवनी लेखक के रूप में यूपी के बारे में उनके अपने पूर्वाग्रह हो सकते हैं. उन्होंने कहा, “तकनीकी तौर पर मोदी भी यूपी से सांसद हैं!”

मोदी को वोट देने के प्रत्येक कारण को एक काव्यात्मक दोहे से कहा गया है, जिसके बारे में गुप्ता का कहना है कि हिंदी संस्करण में यह अधिक मार्मिक है.

एक उदाहरण है, “प्रवासी, देश के दूत, अपने आप में नायक/भारत के ब्रांड एंबेसडर, हमारी सामूहिक रोशनी को चमकाते हुए/आज, मेरे भारतीय पासपोर्ट की ताकत दोगुनी हो गई है/मोदी के तहत, मेरे भारत की पहचान इतनी उज्ज्वल है.”

लेकिन किताब के अंत में मोदी को वोट देने के लिए गुप्ता के भारी हमले के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय, प्रतिद्वंद्वी रिपोर्टर के चरित्र का विरोध किया गया है. “शांतनु भाई, मैं आश्वस्त हूं, लेकिन मेरी आजीविका मोदी का विरोध करने पर निर्भर है…अब मैं जाऊंगा और पीएम मोदी पर आधे-अधूरे सच के साथ कुछ शरारती वीडियो बनाऊंगा और अपने यूट्यूब व्यूज को ट्रैक करूंगा.”

(इस फीचर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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