Friday, 27 May, 2022
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गोवा में अपनी ही पार्टी पर बरसे मंत्री, कहा- पर्रिकर के समय की नैतिकता को भूल दुकान बन चुकी है BJP

गोवा की भाजपा सरकार में पोर्ट्स मिनिस्टर और उत्तरी गोवा के बर्देज़ क्षेत्र के एक शक्तिशाली नेता माइकल लोबो ने आरोप लगाया कि पार्टी का अब व्यवसायीकरण हो चुका है और वह पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है.

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गोवा इकाई में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं लग रहा है. इसके एक विधायक द्वारा पार्टी छोड़ कांग्रेस में जाने के एक हफ्ते बाद ही राज्य के पोर्ट्स मिनिस्टर (बंदरगाह सम्बन्धी मामलों के मंत्री) माइकल लोबो ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ यह कहते हुए मोर्चा खोल दिया कि यह अब ‘अलग दिखने वाली पार्टी’ नहीं रही. जैसा कि इसके बारे में पहले दावा किया जाता था. साथ हीं उन्होंने भाजपा पर नैतिकता को भूलने, व्यावसायीकरण करने और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया.

लोबो ने दिप्रिंट को बताया, ‘यह (राज्य भाजपा) अब दिवंगत मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में शुरू की गई राजनीति की नैतिकता को भूल गई है. यहां कार्यकर्ताओं की अब कोई अहमियत नहीं रह गयी है और एक या दो लोग ही दूसरों से परामर्श किए बिना सभी निर्णय ले लेते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘पार्टी अब कमर्शियल (व्यावसायिक) हो गई है, एक दुकान बन गई है. यहां नैतिक मूल्य अब कोई मायने नहीं रखते.’

लोबो, प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली सरकार में एक प्रमुख मंत्री और उत्तरी गोवा के महत्वपूर्ण बर्देज़ क्षेत्र में एक प्रभावशाली नेता हैं. इस क्षेत्र में राज्य की वाणिज्यिक राजधानी, मापुसा सहित कई निर्वाचन क्षेत्र आते हैं और यह भाजपा के लिए एक मजबूत हिंदू वोट बैंक वाला इलाका माना जाता है.

उनकी यह ‘पीड़ा’ ऐसे समय में सामने आई है जब महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) ने भाजपा के साथ अपने पूर्व गठबंधन को फिर से आकार देने से इनकार कर दिया है और इसके बजाय तृणमूल कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर लिया है. साथ ही कई नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले टिकट वितरण से पहले ही भाजपा को छोड़ दिया है.

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एक अन्य विधायक कार्लोस अल्मेडा ने पिछले सप्ताह पार्टी छोड़ते समय ठीक इसी तरह से भाजपा पर पूर्व सीएम पर्रिकर की विरासत से दूर जाने का आरोप लगाया था.

यह पूछे जाने पर कि इस तरह के निर्णय लेने और पुराने कार्यकर्ताओं का अनादर करने के लिए कौन जिम्मेदार है, लोबो ने कहा, ‘गोवा के संगठन सचिव खुले तौर पर लोगों को यह कहते हुए धमका रहे हैं कि अगर वे पार्टी के फैसलों से सहमत नहीं हैं तो उनके लिए (पार्टी से) बाहर जाने के लिए दरवाजे खुले हैं. गोवा में दो नेता भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.‘

यह पूछे जाने पर कि क्या वह दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए भाजपा छोड़ने जा रहे हैं, लोबो ने कहा, ‘मुझे पता चला है कि भाजपा मुझे टिकट देने पर विचार नहीं कर रही है, हालांकि मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष ने व्यक्तिगत रूप से इस बारे में कोई बात नहीं की है. उन्हें फैसला करने दीजिये – मेरे लिए सभी दरवाजे खुले हैं.’

उनका यह भी कहना था कि अब तक ‘कई दलों’ ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन वह समय आने पर कोई फैसला करेंगे.


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‘पार्टी के कुछ लोग नहीं चाहते कि पर्रिकर की विरासत बनी रहे’

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर के युग को याद करते हुए, लोबो ने कहा कि वह सभी कार्यकर्ताओं से मिलते थे और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए सभी को साथ लेकर चलते थे.

उन्होंने कहा, ‘मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद हमने महसूस किया है कि भाजपा अब ‘अलग दिखने वाली पार्टी’ (पार्टी विथ ए डिफरेंस) नहीं रही. यह अब कार्यकर्ताओं की पार्टी नहीं है.

उनका आरोप है कि ‘पार्टी के ही कुछ लोग नहीं चाहते कि पर्रिकर की विरासत कायम रहे – वे उनके द्वारा निर्धारित नैतिक मूल्यों और एजेंडे को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर रहे हैं,’

लोबो ने कहा, ‘कोई नहीं जानता कि नए लोगों को कैसे शामिल किया जा रहा है – पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को बाहर से लाकर शामिल करवा रही है जो सोचते हैं कि वे किसी भी कीमत पर जीत सकते हैं. गोवा में पार्टी की संस्कृति को बचाने के लिए भाजपा आलाकमान को इस मामले पर गौर करना चाहिए.‘

वे कहते हैं, ‘आज के भाजपा नेता इतने अहंकारी हैं कि वे सरेआम कहते रहते हैं कि ‘अगर आप पार्टी के फैसलों को स्वीकार नहीं करते हैं तो दूसरी पार्टी में जा सकते हैं’.’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह इसलिए परेशान हैं क्योंकि उनकी पत्नी डेलीला को सिओलिम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए भाजपा के टिकट से वंचित कर दिया गया हैं, लोबो ने कहा, ‘मेरी पत्नी सिओलिम में प्रचार कर रही है और वह किसी दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ेगी. लोग क्षेत्र में विकास चाहते हैं – वर्तमान में वहां कोई विकास नहीं है.’

उन्होंने एक और आरोप लगाते हुआ कहा कि भाजपा ‘दो तरह के मापदंडों’ का उपयोग नहीं कर सकती. वह उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत कावलेकर के लिए- जिनकी पत्नी संगुम से चुनाव लड़ना चाहती हैं – एक तरह के मापदंड का उपयोग कर रही है, जबकि उनके और डेलीला के लिए दूसरा मापदंड अपनाया जा रहा है.


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लोबो को शांत करने के प्रयास

सितंबर में, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जिन्हें पार्टी ने गोवा में चुनाव का प्रभारी बनाया है, लोबो को मनाने व शांत करने के लिए उनके घर पहुंचे थे.

लेकिन उस मुलाकात से कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि नवंबर में लोबो ने घोषणा की कि उनकी पत्नी, जो राज्य भाजपा की महिला शाखा की उपाध्यक्ष हैं, सिओलिम से चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने मापुसा निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता सुधीर कंडोलकर के लिए भी अपने समर्थन की घोषणा की.

लोबो ने नवंबर में स्थानीय समाचार माध्यमों को यह भी बताया था कि वह मनोहर पर्रिकर की वजह से भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन अब जब पर्रिकर नहीं रहे, तो उन्हें कोई-न-कोई फैसला लेना है. उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने से पहले वह कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे हैं.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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