Saturday, 25 June, 2022
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योगी 2.0 मंत्रिमंडल से कई पुराने चेहरे गायब; पूर्व सिविल सर्वेंट्स, 5 महिला और दानिश अंसारी का नाम शामिल

योगी आदित्यनाथ ने अपने कैबिनेट में 52 मंत्रियों को शामिल किया है जिसमें सिविल सर्वेंट्स, 5 महिलाएं और एक मुस्लिम चेहरा हैं.

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नई दिल्लीः हजारों लोगों से खचाखच भरे लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आज यानी शुक्रवार को योगी आदित्यनाथ ने देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य यूपी के सीएम पद की दोबारा शपथ ली. जब योगी आदित्यनाथ को यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शपथ दिला रही थीं तो वहां पर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेता मौजूद थे. योगी के मंत्रिमंडल में 52 मंत्रियों को शामिल किया गया जिसमें दो डिप्टी सीएम, 16 कैबिनेट मंत्री और 34 राज्य मंत्री हैं.

मंत्रिमंडल से रहे कई बड़े चेहरे बाहर

योगी आदित्यनाथ के साथ ही केशव प्रसाद मौर्या और बृजेश पाठक ने डिप्टी सीएम के पद की शपथ ली. इसके अलावा 52 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली. लेकिन इस दौरान कई बड़े चेहरों को कैबिनेट से बाहर भी रखा गया जो कि पिछली सरकार में मंत्री थे. लेकिन इस बार विधायक बनने के बावजूद भी इन्हें सरकार में शामिल नहीं किया गया. पिछली सरकार के करीब 20 मंत्रियों को इस बार मौका नहीं दिया गया है. हालांकि, पिछली सरकार के करीब 11 मंत्री इस बार चुनाव नहीं जीत पाए.

इनमें सतीश महाना, श्रीकांत शर्मा, सिद्धार्थनाथ सिंह, महेंद्र सिंह और नीलकंठ तिवारी का नाम शामिल है. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री रहे आशुतोष टंडन ‘गोपाल जी’ और राज्यमंत्री मोहसिन रजा को भी मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं बनाया गया है.

बता दें कि सतीश महाना कानपुर में महाराजपुर से, श्रीकांत शर्मा मथुरा से, सिद्धार्थनाथ सिंह इलाहाबाद पश्चिम तथा नीलकंठ तिवारी ने वाराणसी दक्षिण सीट से जीत दर्ज की है.

इसके अलावा कैबिनेट मंत्री रहे जय प्रताप सिंह, राम नरेश अग्निहोत्री और रमापति शास्त्री के साथ ही राज्य मंत्री अतुल गर्ग, श्रीराम चौहान, जय कुमार जैकी, अनिल वर्मा, सुरेश पासी इत्यादि को भी मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं किया गया है.

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पूर्व सिविल सर्वेंट्स सहित दानिश आजाद अंसारी शामिल

योगी 2.0 मंत्रिमंडल में तमाम वर्गों के प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा गया है. इसके अलावा सिविल सर्वेंट्स और मुस्लिम चेहरे के रूप में इस बार मोहसिन रजा की जगह दानिश आजाद अंसारी को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है. दानिश अली पोस्ट ग्रेजुएट हैं और पहले एबीवीपी से जुड़े रहे हैं. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा का महामंत्री बनाया गया था. 32 वर्ष के दानिश मूल रूप से यूपी के बलिया के रहने वाले हैं.

वहीं सिविल सर्वेंट्स में पूर्व आईएएस एके शर्मा और पूर्व आईपीएस असीम अरुण को शामिल किया गया है. एके शर्मा गुजरात में मोदी के कार्यकाल में सीएमओ के प्रमुख सचिव रह चुके हैं और बाद में पीएमओ में अतिरिक्त सचिव भी रह चुके हैं. पिछले साल रिटायरमेंट लेकर वह बीजेपी में शामिल हुए थे. इसके बाद उन्हें पहले एमएलसी बनाया गया था और बाद में बीजेपी का राज्य उपाध्यक्ष बना दिया गया था. माना जाता है कि वे पीएम मोदी के काफी करीबी हैं.

इसके अलावा असीम अरुण को भी योगी कैबिनेट में जाटव चेहरे के तौर पर शामिल किया गया है जो कि पूर्व आईपीएस हैं. अरुण इससे पहले कानपुर के पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं. बता दें कि पीएम मोदी की भी कैबिनेट में भी कई सिविल सर्वेंट्स शामिल हैं.

अखिलेश सहित तमाम विपक्ष के नेता नहीं हुए शामिल

योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण में अखिलेश यादव सहित विपक्ष के तमाम नेता जैसे सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव, राहुल गांधी, मायावती इत्यादि शामिल नहीं हुए. सूत्रों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने खुद अखिलेश यादव को फोन करके आमंत्रित किया था लेकिन वह नहीं आए. हालांकि, अखिलेश यादव ने साफ कर दिया था कि वह इसमें भाग नहीं लेंगे.

योगी ने तोड़े कई मिथक

दूसरी बार सीएम बनने के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कई तरह के मिथक भी तोड़ दिए हैं. राजनीतिक हलकों में एक मान्यता थी कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है वह दोबारा सीएम नहीं बनता लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इस मिथक को तोड़ दिया है.

दरअसल सबसे पहले 1988 में सीएम बीर बहादुर सिंह नोएडा आए थे और इसके बाद वह अगला चुनाव हार गए, बाद में नारायण दत्त तिवारी 1989 में नोएडा आए और कुछ समय बाद ही उनकी कुर्सी भी चली गई. ऐसी ही घटना मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह और मायावती के साथ भी हुई. कहा जाता है कि इसी डर से अखिलेश यादव कभी भी नोएडा नहीं गए. लेकिन सीएम रहते हुए योगी आदित्यनाथ ने करीब 22 बार नोएडा का दौरा किया और उन्होंने सरका बनाई.

इसी तरह से मायावती ने ताज एक्सप्रेस वे की नींव रखी और शिलान्यास के बाद वे दोबारा सरकार नहीं बना पाई. इसके बाद अखिलेश यादव ने इसे पूरा करके इसका नाम यमुना एक्सप्रेस वे कर दिया और आगरा एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया. लेकिन वह भी 2017 में सत्ता में वापसी नहीं कर सके. लेकिन योगी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करने के बाद भी दोबारा सरकार बनाई.

कैबिनेट में पांच महिला मंत्री शामिल

योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में इस बार पांच महिला मंत्रियों को भी शामिल किया गया है. पांचों महिला मंत्री बेबी रानी मौर्य, गुलाब देबी, प्रतिभा शुक्ला, रजनी तिवारी और विजय लक्ष्मी गौतम हैं. बैबी रानी मौर्य उत्तराखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं और इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है.


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