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Friday, 3 July, 2026
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मनीष तिवारी विवाद से कांग्रेस में फिर बहस, क्या हाईकमान स्वतंत्र सोच रखने वाले नेताओं को ‘सजा’ देता है?

पार्टी में कई लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य मनीष तिवारी पूरे राजनीतिक जीवन में गांधी परिवार के वफादार रहे हैं.

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नई दिल्ली: चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी को पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बनाई गई कांग्रेस की नई चुनावी समितियों में जगह नहीं मिलने के बाद पार्टी में एक बार फिर इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि क्या हाईकमान साफ बोलने वाले और स्वतंत्र सोच रखने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त रवैया अपनाता है. मंगलवार को कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कई समितियों का गठन किया, लेकिन तीन बार के सांसद मनीष तिवारी का नाम इनमें शामिल नहीं था.

तिवारी 2009 और 2019 में पंजाब की लुधियाना और आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें चंडीगढ़ सीट से चुनाव लड़ाया गया था. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनके समिति में शामिल न होने की वजह यह बताई कि अब वे चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन पार्टी के सूत्रों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि चंडीगढ़ आज भी पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट से कहा, “ऐसा नहीं है कि मनीष पंजाब चुनाव में कोई बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अपमानजनक बात यह थी कि करीब 10 दिन पहले राहुल गांधी ने पंजाब के कई नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन उन्हें 45 साल से कांग्रेस में रहे और दो बार पंजाब से सांसद रहे मनीष तिवारी को बुलाना जरूरी नहीं लगा.”

उन्होंने कहा कि जैसे पहले शशि थरूर के साथ हुआ, वैसे ही मनीष तिवारी भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार द्वारा वैश्विक स्तर पर भारत का पक्ष रखने के लिए बनाए गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने की कीमत चुका रहे हैं.

कांग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने भी कहा, “राहुल गांधी इसी बात से नाराज हैं.”

गुरुवार को मनीष तिवारी ने एक्स पर एक रहस्यमयी पोस्ट लिखी.

उन्होंने लिखा, “काश मेरे पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता! लेकिन यह भी सच है कि पिछले 45 वर्षों में @INCIndia ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपनी पूरी वयस्क जिंदगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में लगा दी है. जो होना है, वह होकर रहेगा…”

पार्टी में कई लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य मनीष तिवारी पूरे राजनीतिक जीवन में गांधी परिवार के वफादार रहे हैं. इंदिरा गांधी ने उन्हें पहले एनएसयूआई का राष्ट्रीय सचिव बनाया था. इसके बाद राजीव गांधी ने उन्हें महासचिव और फिर अध्यक्ष बनाया. वे 1986 से 1993 तक सबसे लंबे समय तक एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे. 1998 में सोनिया गांधी ने उन्हें भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया.

इसके बाद तिवारी पार्टी के सबसे मुखर और चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हो गए. बाद में उन्हें मनमोहन सिंह सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया. कांग्रेस ने समय-समय पर उनकी लोकसभा सीट बदली. पहले लुधियाना, फिर आनंदपुर साहिब और उसके बाद चंडीगढ़ से उन्हें चुनाव लड़ाया गया. वे हर बार चुनाव जीतते रहे. 2024 में उन्होंने चंडीगढ़ सीट भाजपा से छीन ली थी.

इस मुद्दे पर भाजपा ने भी कांग्रेस को घेरने का मौका नहीं छोड़ा.

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि मनीष तिवारी के साथ हुआ व्यवहार इस बात का उदाहरण है कि कांग्रेस पूरी तरह गांधी-वाड्रा परिवार के आगे झुक चुकी है.

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में अब लड़ाई योग्य नेताओं के बीच नहीं, बल्कि परिक्रमावादियों और महा-परिक्रमावादियों के बीच है, क्योंकि पराक्रमवादी तो पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं. कांग्रेस में योग्यता, ईमानदारी और स्वतंत्र सोच अब बोझ बन गई है. अब मनीष तिवारी को समझ लेना चाहिए कि आज की कांग्रेस सिर्फ उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाती है जो गांधी-वाड्रा परिवार की परिक्रमा करते हैं. योग्यता, ईमानदारी और स्वतंत्र सोच कांग्रेस में अब कमजोरी मानी जाती है. कांग्रेस ‘चमचा युग’ में प्रवेश कर चुकी है. पार्टी में काबिलियत की कोई जगह नहीं है. आगे बढ़ने का एक ही रास्ता है—एक परिवार के प्रति आंख बंद करके वफादारी निभाना.”

तरुण चुघ ने एक्स पर जारी अपने बयान में कांग्रेस पर योग्यता से ज्यादा वफादारी को महत्व देने का आरोप लगाया.

वहीं, कांग्रेस का कहना है कि संगठन में यह बदलाव अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी तैयारी मजबूत करने के लिए किया गया है.

तीन कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ-साथ पार्टी ने राजनीतिक मामलों की समिति, चुनाव प्रबंधन समिति, चुनाव प्रचार समिति, घोषणा-पत्र समिति, प्रचार समिति और समन्वय समिति का भी गठन किया है.

इस फेरबदल के तहत कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को कांग्रेस विधायक दल (CLP) का नेता बनाए रखा है. वहीं, सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष, विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन समिति का प्रमुख, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर समिति का प्रमुख और अमर सिंह को घोषणा-पत्र समिति का अध्यक्ष बनाया गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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