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Thursday, 30 May, 2024
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PM मोदी की कैबिनेट से ‘बाहर हो चुके’ BJP नेता कैसे हाशिए पर चले गए, अब वे क्या कर रहे हैं

2014 से अब तक मोदी सरकार से 67 मंत्री बाहर किए गए हैं. इनमें ज्यादातर मंत्रियों को उनकी खराब परफॉरमेंस की वजह से निकाला गया. कुछ नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं, तो किसी को संगठन का काम मिला. लेकिन अब भी कई पूर्व मंत्री अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

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नई दिल्लीःतू कोशिश तो कर/ये बुझी शमा-फिर से जल सकती है/तूफान से घिरी कश्ती बचाने को/किनारों में हलचल मचा सकती है...’

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने यह कविता अपने ट्विटर अकाउंट पर 14 मार्च को शेयर की. हर सुबह 6 बजे उनके ट्विटर फीड में ऐसी उम्मीदों से भरी पंक्तियां दिख जाती हैं. ये पंक्तियां उनकी कविताओं का हिस्सा होती हैं, जिसे वह हर सुबह उम्मीद की पंक्ति के तौर पर पोस्ट करते हैं.

इसी तरह, 16 मार्च को उन्होंने अपने संकलन में से यह पंक्ति पोस्ट की थी, ‘तुम भी साथ चलो/अभी तो रात है/अब घोर तम मिट जाएगा/भटका अंधेरे में भटकता/रात अपनी पाएगा...’

ये पंक्तियां सुबह 6 बजे फिर से पोस्ट की गईं. पोखरियाल अपने दिन की शुरुआत अपनी कविता की कुछ पंक्तियां पोस्ट करने से करते हैं. इसके बाद वह ट्वीट और रीट्वीट करते हैं, खासकर जो प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित होती हैं.

उत्तराखंड के पूर्व सीएम को इस बार भी मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद थी लेकिन पीएम मोदी ने पुष्कर सिंह धामी के हारने के बावजूद उन्हें यह पद दे दिया. जुलाई 2021 में हरिद्वार से सांसद बने पोखरियाल को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था. इसके बाद से उन्हें कोई पद नहीं दिया गया है.

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हाल में हुए विधानसभा चुनावों में पोखरियाल सिर्फ अपने लोकसभा क्षेत्र तक ही सीमित थे. भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने दिप्रिंट से नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्रों रानीपुर और धरमपुर जैसे कुछ इलाकों पर प्रचार का काम किया. उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा है, इस वजह से भी वह चुनाव प्रचार में ज्यादा नहीं दिखे.’

सिर्फ पोखरियाल ही ऐसे नहीं हैं जो पीएम मोदी की यूनियन कैबिनेट से निकलने के बाद हाशिए पर चले गए हों.

उनके पूर्व सहयोगी रविशंकर प्रसाद को भी जुलाई 2021 में हुए कैबिनेट फेरबदल के दौरान पीएम ने कैबिनेट से बाहर कर दिया था. मोदी सरकार और उसके पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे प्रसाद, कैबिनेट से बाहर होने के बाद हाशिए पर चले गए हैं. उसके बाद से ही उन्हें पार्टी में किसी तरह का कोई पद नहीं दिया गया है. उन्हें भी सोशल मीडिया पर ट्वीट-रीट्वीट करते हुए देखा जा सकता है. वे खासतौर पर पीएम मोदी से जुड़ी बातें ट्वीट करते हैं. पिछले एक हफ्ते में वे पीएम मोदी और पीएमओ के ट्वीट को 58 बार रीट्वीट कर चुके हैं.

साल 2014 से 67 मंत्री मोदी सरकार से हटाए जा चुके हैं. इनमें ज्यादातर नेताओं को बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह से अपना पद छोड़ना पड़ा. वहीं, कुछ ने बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के लिए पद को छोड़ा. जैसे, वेंकैया नायडू भारत के उपराष्ट्रपति बने और जेपी नड्डा को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. इनमें से कलराज मिश्रा, नज़मा हेपतुल्ला, थावरचंद गहलोत और बंडारू दत्तात्रेय, इन चार नेताओं को राज्यपाल बनाया गया.

इनमें से कुछ नेताओं को संगठन की जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं. पूर्व कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को उत्तर प्रदेश का इंचार्ज बनाया गया, जबकि पूर्व कौशल विकास मंत्री राजीव प्रसाद रूडी और पूर्व खेल और युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया.

बाकी बचे नेताओं का पोखरियाल की कविता (भटका अंधेरे में भटकता) की तरह हाल हो गया है. वे मुश्किल वक्त में उम्मीद का दामन थामे हैं और अंधेरे में अपनी राह तलाश रहे हैं. वे पार्टी नेतृत्व से नई जिम्मेदारी पाने का इंतजार कर रहे हैं.


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बीजेपी क्या कहती है

बीजेपी के प्रवक्ता आरपी सिंह इस आरोपों को बेबुनियाद बताते हैं कि पार्टी ने पूर्व मंत्रियों को हाशिए पर छोड़ दिया है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘बीजेपी बड़ी पार्टी है और पार्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. अगर ज्यादा लोगों को अवसर मिलता है, तो इसमें दिक्कत क्या है? कई बार नेताओं और सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं. प्रकाश जी और आरएस प्रसाद जी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. ये सभी नेता पार्टी से जुड़े मुद्दे पर लगातार बात करते रहे हैं. अलग-अलग लोगों को एक समय पर भिन्न-भिन्न तरह की जिम्मेदारियां दी जाती हैं. इसका मतलब नहीं है कि उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया है.’

हालांकि, बीजेपी के दूसरे कार्यकर्ता इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

पार्टी के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘आरएस प्रसाद और जावड़ेकर मंत्रियों के रूप में पार्टी के महत्वपूर्ण पीसी को संबोधित करते हैं और किसी विवाद की स्थिति में प्रसाद पार्टी के सबसे पहले प्रवक्ता के रूप में प्रतिनिधित्व करते हैं और जावड़ेकर भी ऐसा ही करते हैं. लेकिन, जब से उन्हें मंत्री पद से हटाया गया है, उन्होंने सिर्फ कुछ ही पीसी को संबोधित किया है. जब सरकार की ओर से बात रखनी हो, तो उनकी गतिविधि कम हो जाती है. उन्हें टीवी डिबेट में भी भेजा जाता था, जो अब कम हो गया है.’

उस कार्यकर्ता ने बताया, ‘राज्य के बड़े बीजेपी नेता होने के बावजूद निशंक ने उत्तराखंड चुनावों में कम ही प्रचार किया. जब वे मुख्यमंत्री और मंत्री थे, तब वे राज्य के चुनावों में रैलियों को अक्सर संबोधित करते थे.’


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जी-39

कभी मोदी सरकार और पार्टी में जी-39 के जो सदस्य बड़े नेता माने जाते थे लेकिन अब वही हाशिए पर हैं. इनमें से कुछ नाम हैं:

उमा भारती: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 2014 से 2019 के बीच उमा भारती ने कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली. इनमें जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय शामिल हैं. वह 2019 के लोकसभा चुनाव में खड़ी नहीं हुईं. इसके अलावा, बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में भी उन्हें जगह नहीं मिली. सक्रिय राजनीति से करीब दो वर्षों तक दूर रहने के बाद उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है. उन्होंने दो हफ्ते पहले, भोपाल के एक शराब दुकान में ईंट फेंक कर हंगामा मचाया था. पार्टी में उनके सहकर्मी इस घटना को राज्य की राजनीति में फिर से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं.

मेनका गांधी: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में महिला और बाल विकास मंत्री रह चुकी मेनका गांधी को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई. पिछले साल, उन्हें बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी हटा दिया गया.

हर्षवर्धन: पिछले साल जुलाई महीने में हर्षवर्धन को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पद से हटा दिया गया. इसके बाद से वे राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं. उनकी उपस्थिति आमतौर पर अपने निर्वाचन क्षेत्र चांदनी चौक तक सीमित हो गई है. ‘शहीदी दिवस’ के मौके पर वह बच्चों और दूसरे लोगों के साथ प्रभात फेरी में शामिल हुए. दूसरे नेताओं की तरह वह भी ट्विटर पर सक्रिय हैं और पीएम मोदी की प्रशंसा में ट्वीट और रिट्वीट करते रहते हैं.

प्रकाश जावड़ेकर: मोदी सरकार में जावड़ेकर जाने-माने चेहरे थे. पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में उन्होंने मानव संसाधन विकास जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारियां संभाली. बीजेपी के दूसरे कार्यकाल में उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और सूचना और प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारियां दी गईं. पिछले साल उनसे भी सभी जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं. उनकी राजनीतिक गतिविधियां ट्वीट करने और कभी-कभार कार्यक्रमों में शामिल होने तक सीमित हो गई हैं.

उदाहरण के लिए, वह कुछ दिन पहले पुणे में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नागरिक उड्डयन मंत्री और रक्षा मंत्री से मिले और पुरंदर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में तेजी लाने की मांग की. उन्होंने इस महीने, गौरेया दिवस पर लोकसभा टीवी के एक कार्यक्रम में भी भाग लिया था.

अनंत कुमार हेगड़े: उत्तर कन्नडा के सांसद हेगड़े साल 2017 से 2019 के बीच कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री रहे. उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जगह नहीं मिली. हेगड़े, पार्टी के कार्यक्रमों और सोशल मीडिया दोनों जगह से गायब हैं. उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पिछली बार अप्रैल 2020 में ट्वीट किया था.

सुरेश प्रभु: इन्होंने तीन सालों तक रेल मंत्रालय और दो सालों के लिए 2019 तक वाणिज्य मंत्रालय संभाला. इसके बाद उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई. लेकिन वह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपनी जगह नहीं बना पाए. उन्हें 2021 के जी 20 शिखर सम्मेलन के लिए मोदी सरकार की ओर से शेरपा बना कर भेजा गया था. बाद में उनकी जगह पीयूष गोयल ने ले ली. प्रभु की राज्य सभा सदस्यता इसी साल 2022 में खत्म होने वाली है. लेकिन दूसरे पूर्व मंत्रियों की तरह ही वह पार्टी की महत्वपूर्ण गतिविधियों और कैंपेन में नज़र नहीं आते. उनके ट्विटर अकाउंट पर उनके सांसद और बीजेपी सदस्य होने का जिक्र नहीं है.

राज्यवर्धन सिंह राठौर: पूर्व सैनिक और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट राठौर को 2017 में युवा मामलों और खेल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया था. उन्होंने यह जिम्मेदारी मई 2019 तक निभाई. इसके बाद से वह पार्टी की गतिविधियों में बहुत कम नज़र आते हैं. जयपुर ग्रामीण के सांसद राठौर, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं लेकिन उन्हें टीवी डिबेट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की ओर से बोलते हुए कम ही देखा जाता है.

बिरेंद्र सिंह: हरियाणा की राजनीति के जाने-माने चेहरे बिरेंद्र सिंह ने 2014 में कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन की थी. वह करीब 40 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे थे. उसी साल बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. वह 2016 से 2019 के बीच स्टील मंत्री भी रहे. सिंह ने राज्य सभा सदस्यता से तब इस्तीफा दे दिया, जब बीजेपी ने उनके बेटे ब्रिजेंद्र सिंह को हिसार लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. बिरेंद्र सिंह ने कहा था कि वह सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे लेकिन कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कहा था कि ऐसे तथ्य मौजूद हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस दुर्घटना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है.

महेश शर्मा: पूर्व केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा को विवादित बयान के लिए जाना जाता रहा है. 2019 में मोदी की नई टीम में शर्मा को जगह नहीं मिल पाई. उम्मीद की जा रही थी कि शर्मा ब्राह्मण नेता के तौर पर यूपी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे लेकिन वह अपनी लोकसभा सीट गौतमबुद्ध नगर और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के लिए चुनाव क्षेत्र नोएडा में कैंपेन करने तक ही सीमित रहे.

केजे अल्फोंस: पूर्व आईएएस अधिकारी से राजनेता बने अल्फोंस 2017 से 2019 तक मोदी सरकार में पर्यटन मंत्री थे. 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से वह सार्वजनिक गतिविधियों में बहुत कम दिखते हैं. वे राज्य सभा के सदस्य हैं लेकिन उन्हें सरकार या बीजेपी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है.

एमजे अकबर: हाई-प्रोफाइल पत्रकार एमजे अकबर साल 2016 से 2018 तक विदेश राज्य मंत्री रहे. यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा. उन्होंने 2014 में बीजेपी ज्वाइन की थी और उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया. सरकार से बाहर होने के बाद वह राजनीतिक अज्ञातवास में हैं.

जयंत सिन्हा: हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा साल 2014 से 2016 तक वित्त राज्य मंत्री रहे. वह बाद में 2016-2019 तक नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे. वे आमतौर पर झारखंड में अपने चुनाव क्षेत्र में ही सक्रिय रहते हैं. वह पार्टी की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं. जयंत सिन्हा, पूर्व वित्त मंत्री व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के बेटे हैं. यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ दी थी.


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बीजेपी के दूसरे नेता क्या कहते हैं

पूर्व राज्य मंत्री और राजस्थान कोटे से राज्य सभा सांसद अल्फांसो कहते हैं कि वे अब हल्का महसूस कर रहे हैं क्योंकि मंत्री के तौर पर उन्हें कई जिम्मेदारियां और डेडलाइन पूरी करनी होती थी.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘अब मुद्दों को उठाने के लिए हम ज्यादा स्वतंत्र हैं. मैं शून्य काल में लगातार सवाल उठाते रहता हूं, आप संसद में इसकी तस्दीक कर सकते हैं.’

पूर्व मंत्री निहाल चंद ने कहा, ‘सांसद के तौर पर लोगों की समस्याओं को संसद में उठाना और उनका समाधान करना आपकी जिम्मेदारी बनती है. हम यह पक्का करने के लिए काम कर रहे हैं कि बीजेपी की सरकार फिर से राजस्थान में बने.’

हाल ही में उमा भारती ने दिप्रिंट से कहा कि वह मध्य प्रदेश में शराबबंदी के लिए जागरूकता ला रही हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. साथ ही, उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान से राज्य में शराबबंदी लागू करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा, ‘जहां तक राजनीति की बात है, पार्टी मेरी लोकसभा सीट तय करेगी, जहां से मैं 2024 में चुनाव लड़ूंगी.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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