लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में एक कार्यक्रम में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा चालू एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन गया है। अब राज्य में कुल सात एक्सप्रेसवे चालू हैं.
इन एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई अब 1,911 किलोमीटर हो गई है. राज्य सरकार का दावा है कि देश के चालू एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जो देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है.
उत्तर प्रदेश इन्वेस्ट के CEO विजय किरण आनंद ने कहा, “एक्सप्रेसवे बनने से राज्य में कनेक्टिविटी काफी बेहतर हुई है. इससे निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश ज्यादा आकर्षक बना है.”
उन्होंने कहा कि सरकार जब निवेशकों से बातचीत करती है, तो एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार भी चर्चा का हिस्सा होता है. इन कॉरिडोर से कारोबार के नए मौके खुल रहे हैं और एक्सप्रेसवे के आसपास कई विकास परियोजनाएं भी बनाई जा रही हैं.
उन्होंने कहा कि ये सभी चीजें राज्य में निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर रही हैं.
राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, अभी राज्य में सात एक्सप्रेसवे चालू हैं. चार और एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं, जबकि आठ और प्रस्तावित हैं.
मौजूदा सात एक्सप्रेसवे में से छह राज्य की एक्सप्रेसवे विकास एजेंसियों ने बनाए हैं, जबकि एक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने बनाया है. प्रस्तावित सात एक्सप्रेसवे भी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं.
2027 में चुनावी मुद्दा
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी को 2027 विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करेगी.
उन्होंने कहा, “2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो एक्सप्रेसवे थे. एक यमुना एक्सप्रेसवे, जो नोएडा और आगरा को जोड़ता है, और दूसरा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे। अब सरकार बताएगी कि राज्य में 15 एक्सप्रेसवे या तो चालू हैं, या निर्माणाधीन हैं, या प्रस्तावित हैं. लोग कुछ घंटों में उत्तर प्रदेश के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकेंगे.”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने 29 अप्रैल को उद्घाटन से दो दिन पहले हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे और तेजी से बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क के कारण उत्तर प्रदेश तेजी से देश की कनेक्टिविटी ताकत बन रहा है.
उन्होंने कहा कि इन हाई-स्पीड सड़क परियोजनाओं में एयरस्ट्रिप, EV चार्जिंग स्टेशन, रेस्ट एरिया और स्मार्ट कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं. इससे यात्रा तेज और सुरक्षित होगी और आर्थिक विकास व निवेश के मौके भी बढ़ेंगे.
हालांकि, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार उत्तर प्रदेश में BJP सरकार की एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने इन्हें खराब गुणवत्ता वाला और जरूरत से ज्यादा महंगा बताया है.
भाजपा के विकास का मॉडल तो उद्घाटन के फूल सूखने के पहले ही धंस जाने वाले ‘ग्रीन कॉरीडोर’ में दिख ही गया है… और इनके बनाए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के गड्ढों को देखकर तो चाँद के गड्ढे भी मुँह छुपा लेते हैं।
आरोप लगाते-लगाते इनकी भी विदाई का समय आ गया…
इनकी भी सादर विदाई!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 29, 2026
उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि BJP सरकार की बनाई हाई-स्पीड सड़क परियोजनाएं “झूठ के एक्सप्रेसवे” हैं.
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान बना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बेहतर गुणवत्ता वाला है. अखिलेश ने कई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, बुनियादी सुविधाओं की कमी और अधूरे निर्माण का भी आरोप लगाया.
उन्होंने खास तौर पर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए कहा कि उद्घाटन के तुरंत बाद सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिन्हें उन्होंने “भ्रष्टाचार के गड्ढे” कहा.
बढ़ता नेटवर्क
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे छह लेन का कॉरिडोर है. इसे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA ने 14,446 करोड़ रुपये में बनाया.
यह आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव, हरदोई और लखनऊ जिलों को जोड़ता है.
राज्य के पूर्वी हिस्से में छह लेन वाला पूर्वांचल एक्सप्रेसवे भी UPEIDA ने बनाया है. इसकी लंबाई 341 किलोमीटर है और इसे 23,349.37 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया. यह लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर को जोड़ता है.
चार लेन वाला बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे 296 किलोमीटर लंबा है. इसे UPEIDA ने 14,849.09 करोड़ रुपये में बनाया. यह चित्रकूट, बांदा, महोबा, जालौन, औरैया और इटावा को जोड़ता है.
91 किलोमीटर लंबा चार लेन वाला गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे 7,283.28 करोड़ रुपये में बनाया गया. यह गोरखपुर, संत कबीर नगर, आंबेडकर नगर और आजमगढ़ को जोड़ता है.
14 लेन वाला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे NHAI ने बनाया है। इसकी लंबाई 96 किलोमीटर है और इसे बनाने में 8,400 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह निजामुद्दीन, डासना, हापुड़ और मेरठ को जोड़ता है.
छह लेन वाला यमुना एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी YEIDA ने बनाया है. इसकी लंबाई 166 किलोमीटर है और इसे 12,839 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया. यह ग्रेटर नोएडा के परी चौक को जेवर, वृंदावन, मथुरा और आगरा से जोड़ता है.
हाल ही में शुरू हुआ छह लेन वाला गंगा एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है, जिसकी लंबाई 594 किलोमीटर है. इसे UPEIDA ने 36,230 करोड़ रुपये में बनाया. यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ता है.
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जैसे मां गंगा हजारों सालों से उत्तर प्रदेश और देश की जीवनरेखा रही हैं, उसी तरह आधुनिक विकास के इस दौर में उनके पास से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई जीवनरेखा बनेगा.”
इनके अलावा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे भी चालू है. यह छह लेन का एक्सप्रेसवे है। इसे ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया। इसकी कुल लंबाई 25 किलोमीटर है.
निर्माणाधीन आठ परियोजनाएं
दिप्रिंट को यह भी जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA के तहत इस समय आठ एक्सप्रेसवे परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं या प्रस्ताव के चरण में हैं.
इनमें 15.17 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित चार लेन चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे शामिल है. इसके अलावा छह लेन वाला लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे होगा, जो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इसकी प्रस्तावित लंबाई 49.96 किलोमीटर है.
इसके अलावा प्रस्तावित छह लेन फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा और इसकी कुल लंबाई 90.84 किलोमीटर होगी.
छह लेन वाला जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, जो बुलंदशहर के रास्ते यमुना एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, उसकी प्रस्तावित लंबाई 74.30 किलोमीटर है.
अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं में 118 किलोमीटर लंबा छह लेन झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, 277 किलोमीटर लंबा छह लेन विंध्य एक्सप्रेसवे और 107 किलोमीटर लंबा छह लेन विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं.
प्रस्तावित छह लेन मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 130.14 किलोमीटर होने की उम्मीद है.
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की कई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है. इनमें 63 किलोमीटर लंबा छह लेन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शामिल है.
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित छह लेन बलिया लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 114 किलोमीटर होगी, जबकि छह लेन गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे 380 किलोमीटर लंबा होगा.
अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ सड़कें नहीं बना रहा है, बल्कि एक ज्यादा मजबूत, स्मार्ट और समृद्ध भविष्य तैयार कर रहा है.
उत्तर प्रदेश के अर्थशास्त्री प्रोफेसर ए.पी. तिवारी ने उत्तर प्रदेश को “कनेक्टिविटी हब” बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ता सड़क नेटवर्क राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कारोबार और आर्थिक अवसर लेकर आ रहा है.
उन्होंने कहा कि पिछले आठ साल में राज्य की अर्थव्यवस्था दोगुने से ज्यादा बढ़ी है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, मैन्युफैक्चरिंग में वृद्धि और बढ़ते निर्यात की वजह से राज्य ने 10.8 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट यानी CAGR दर्ज की है.
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश को कारोबार के लिए अनुकूल राज्य के रूप में पेश करने में भी अहम भूमिका निभा रही है.
एक्सप्रेसवे नेटवर्क बनने से राज्य में यात्रा का समय काफी कम हो गया है। अब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से गाजीपुर लगभग तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। लखनऊ से नोएडा करीब पांच घंटे में और लखनऊ से मेरठ लगभग पांच घंटे में पहुंचा जा सकता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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