नई दिल्ली: सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को, यानी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को कहा है कि वे कम से कम 30 दिन का एलपीजी रिजर्व तैयार करें. यह कदम पश्चिम एशिया के संकट के कारण पैदा हुई ऊर्जा सुरक्षा की चिंता के बीच उठाया गया है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया संघर्ष पर अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा. “तेल विपणन कंपनियों को कम से कम 30 दिन का एलपीजी रिजर्व बनाने के लिए कहा गया है.”
घरेलू एलपीजी मांग पर शर्मा ने कहा कि अभी खपत 72,000 मीट्रिक टन प्रति दिन है, जिसमें से 50,000 से 52,000 मीट्रिक टन घरेलू उत्पादन है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले भारत का घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रति दिन था.
उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी सप्लाई मांग के अनुरूप बनी हुई है. “पिछले चार दिनों में 1.78 करोड़ एलपीजी रिफिल बुकिंग मिली हैं और लगभग 1.8 करोड़ सिलेंडर डिलीवर किए गए हैं.”
सरकार ने देश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ने की भी पुष्टि की है. शर्मा ने कहा कि यह वृद्धि कृषि मांग बढ़ने, थोक ईंधन बिक्री का खुदरा आउटलेट्स पर शिफ्ट होने और निजी ईंधन रिटेलर्स से सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स की तरफ ग्राहकों के जाने की वजह से हुई है.
शर्मा ने कहा. “150 जिलों में पेट्रोल की मांग में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि 14 जिलों में 100 प्रतिशत वृद्धि देखी जा रही है. इसी तरह 156 जिलों में डीजल की मांग में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी है, जबकि 6 जिलों में 100 प्रतिशत वृद्धि देखी जा रही है.”
उन्होंने यह भी कहा कि तेल विपणन कंपनियां कीमत के अंतर की वजह से ईंधन बिक्री में 38 प्रतिशत की गिरावट देख रही हैं. उन्होंने उद्योग संगठनों से अपील की है कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकें और केवल अधिकृत चैनलों से ही ईंधन खरीदें.
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर जानकारी देते हुए शर्मा ने कहा कि 1 मई से अब तक 186,000 मीट्रिक टन कमर्शियल एलपीजी बेचा गया है.
समुद्री यातायात पर अपडेट देते हुए बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज निसोस केरोस ने 25-26 मई की रात को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित पार किया और इसके 3 जून 2026 को विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा. “यह व्यापारी जहाज लगभग 270,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल ले जा रहा है. इसमें सभी विदेशी क्रू सदस्य हैं.”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय जुड़ाव वाले जहाजों पर जानकारी देते हुए शर्मा ने कहा कि 13 जहाज अभी भी उस क्षेत्र में फंसे हुए हैं. इनमें 5 कच्चे तेल के टैंकर, 3 कंटेनर जहाज, 2 बल्क कैरियर, 1 एलपीजी टैंकर, 1 केमिकल टैंकर और 1 ट्रेजरी जहाज शामिल हैं.
ऊर्जा खरीद के लिए यात्रा फिर से शुरू करने की योजना पर शर्मा ने कहा कि सरकार की तत्काल प्राथमिकता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाजों को वापस लाना है.
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