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Friday, 23 October, 2026
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बीजेपी से दूरी, मोदी सरकार पर हमला—क्या अन्नामलाई नई ज़मीन बना रहे हैं?

अन्नामलाई अगस्त 2020 में बीजेपी में शामिल हुए थे. इससे पहले उन्होंने मई 2019 में आईपीएस के पद से इस्तीफा दिया था. इस साल जून में उन्होंने बीजेपी से अलग होकर अपना स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन शुरू किया.

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चेन्नई: भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन शुरू करने और उसे मजबूत करने के चार महीने बाद, तमिलनाडु बीजेपी इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके की कड़ी आलोचना को लेकर चर्चा में हैं.

21 अक्टूबर को अन्नामलाई ने एक्स पर एक पोस्ट में मोदी सरकार पर 12 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बाद “एक दुश्मन तैयार करने” का आरोप लगाया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2011 के बयान का भी जिक्र किया. इससे उनके रुख में साफ बदलाव दिखाई दिया.

अन्नामलाई अगस्त 2020 में बीजेपी में शामिल हुए थे. इससे पहले उन्होंने पिछले साल मई में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से इस्तीफा दिया था.

दिप्रिंट से बात करने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान एक सोची-समझी कोशिश का हिस्सा हैं. इसका मकसद एक ऐसी राजनीतिक स्थिति में अपनी अलग पहचान बनाना है, जो 2024 में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की जीत के बाद बदल गई है.

बीजेपी की तमिलनाडु रणनीति को लेकर मतभेदों का हवाला देते हुए और “वी द लीडर्स” आंदोलन शुरू करने के बाद से अन्नामलाई का ध्यान जमीनी स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाने पर रहा है. उनका लक्ष्य स्थानीय निकाय चुनावों में उतरना और 2031 तक तमिलनाडु की राजनीति में ज्यादा बड़ी भूमिका हासिल करना है.

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि सीजेपी विवाद उन्हें बीजेपी से अलग पहचान बनाने का मौका देता है. यह ऐसा मुद्दा है जो पार्टी की राजनीति से आगे जाता है—प्रदर्शन करने का अधिकार.

विश्लेषकों ने आगे कहा कि अन्नामलाई की बात सिर्फ पुलिस कार्रवाई से असहमति तक सीमित नहीं है. वह यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या सरकार अपने आलोचकों को राष्ट्रविरोधी और विदेशी एजेंट बताकर उचित प्रक्रिया से जुड़े सही सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सीजेपी के खिलाफ बीजेपी की प्रतिक्रिया अनजाने में इस दबाव समूह को प्रचार दे रही है और उसे एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने में मदद कर रही है.

जमीन तैयार कर रहे हैं?

राजनीतिक टिप्पणीकार मुकुंद पद्मनाभन ने कहा कि अन्नामलाई का यह नया कदम बीजेपी से पूरी तरह दूरी बनाए बिना अपनी राजनीतिक पहचान को बीजेपी से अलग दिखाने की कोशिश हो सकता है.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मुझे लगता है कि अन्नामलाई को अपने लिए राजनीतिक जगह बनाने और बीजेपी का हिस्सा रहते हुए जो उनकी पहचान बनी थी, उससे अपनी पहचान अलग करने की ज़रूरत है. उन्होंने टीवीके की जीत के जरिए युवाओं की ताकत देखी है और यह भी देखा है कि सीजेपी ने लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कैसे की है. वह युवाओं के बीच अपने लिए एक जगह बनाना चाहते हैं.”

हालांकि, पद्मनाभन ने अन्नामलाई के रुख को बीजेपी की विचारधारा से पूरी तरह अलग होने के तौर पर देखने से सावधान किया. इसके बजाय, वह तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष को ऐसी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करते हुए देखते हैं, जिसमें एक बड़ा वर्ग शामिल हो. इसमें युवा और अलग-अलग समुदायों के लोग भी शामिल हैं.

20 अक्टूबर को, यानी सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना वाली उनकी पोस्ट से एक दिन पहले, अन्नामलाई ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत सभी समुदायों के लोगों का है और देश में मुसलमानों और दूसरे धर्मों के लोगों के लिए भी जगह है. अन्नामलाई ने कहा था कि जो हिंदू इसके उलट दावा करते हैं, वे गलत हैं.

पद्मनाभन के मुताबिक, इस तरह के बयान बताते हैं कि वह संतुलन बनाते हुए अपने लिए कुछ राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

पद्मनाभन ने कहा, “वह पुलिस कार्रवाई के कुछ मामलों को बीजेपी की व्यापक विचारधारा वाली स्थिति से अलग कर रहे हैं. इसे उनके अब तक के पूरे रुख से पीछे हटना नहीं माना जा सकता.” उन्होंने कहा कि अन्नामलाई ऐसे रुख तलाशते दिखाई दे रहे हैं, जिनमें युवाओं की भागीदारी, सभी को साथ लेकर चलना और तानाशाही जैसी कार्यप्रणालियों का विरोध मुख्य मुद्दे हैं.

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी की राजनीतिक रणनीति के बारे में अभी कोई पक्की राय बनाना जल्दबाजी होगी.

पद्मनाभन ने कहा, “इससे साफ संकेत मिलता है कि वह राजनीतिक रूप से कुछ करने की तैयारी कर रहे हैं.” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह किस तरह और कितनी हद तक अपना राजनीतिक रुख बदल रहे हैं, यह अभी साफ नहीं है.

‘अन्नामलाई बहुत उलझे हुए लगते हैं’

अन्य राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि अन्नामलाई का मौजूदा राजनीतिक रुख एक जैसा नहीं दिखता और उनके हाल के बयान फिर से राजनीति में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश भी हो सकते हैं.

हालांकि, उन्होंने एक सावधानी भी बताई. केंद्र सरकार की आलोचना करने से उन्हें बीजेपी से दूरी बनाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे अपने आप उन्हें संगठन का नेटवर्क, लोगों का बड़ा समर्थन या चुनाव लड़ने का कोई साफ रास्ता नहीं मिल जाता.

राजनीतिक विश्लेषक सुमंत रमन ने दिप्रिंट से कहा, “एक राजनीतिक नेता के तौर पर अन्नामलाई बहुत उलझे हुए लगते हैं और उन्हें खुद अपनी राजनीतिक स्थिति साफ नहीं है. बीजेपी छोड़ने के बाद तमिलनाडु में उनकी पकड़ कम हुई है और ज्यादा ध्यान खींचने में नाकाम रहने के बाद अब वह यह बयान लेकर सामने आए हैं.”

उनके मुताबिक, सीजेपी पर अन्नामलाई का रुख तुरंत कोई बड़ा राजनीतिक फायदा नहीं देगा. खासकर इसलिए क्योंकि विपक्षी दलों और क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों ने अभी तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इसके कारण शुरू हुए प्रदर्शनों को लेकर कोई एक जैसी रणनीति नहीं अपनाई है.

रमन ने दिप्रिंट से कहा, “सीजेपी की पकड़ भी कुछ कम होती दिख रही है. संगठन अपनी दिशा में आगे बढ़ रहा है, इंडिया गठबंधन अपनी दिशा में और क्षेत्रीय दल एसआईआर और प्रदर्शनों को लेकर अपनी-अपनी रणनीति अपना रहे हैं. वे एकजुट नहीं हैं और अन्नामलाई का रुख इस मुद्दे को बहुत ज्यादा राजनीतिक ताकत नहीं देता.”

उन्होंने कहा कि बीजेपी के पूर्व नेता का राजनीतिक भविष्य अभी साफ नहीं है.

रमन ने कहा कि लंबे समय में बीजेपी में उनकी वापसी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. लेकिन निकट भविष्य में अन्नामलाई के तमिलनाडु में बड़ी राजनीतिक ताकत बनने की संभावना कम है.

अकादमिक और राजनीतिक विश्लेषक रामू मणिवन्नन ने कहा कि अन्नामलाई का राजनीतिक उभार बीजेपी के तमिलनाडु में अपने मुख्य राजनीतिक चेहरे के तौर पर उन पर किए गए निवेश से काफी जुड़ा हुआ था. हालांकि, विजय का उभार, तमिलनाडु बीजेपी के अंदर के मतभेद और पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर उसकी सोच ने दिशा बदलने में भूमिका निभाई.

मणिवन्नन ने कहा कि बीजेपी की बड़ी योजना में अन्नामलाई को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर तैयार करना शामिल था. लेकिन बाद में इस योजना को पीछे कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर फिर से सोचना पड़ा. उन्होंने कहा कि टीवीके के एक बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर उभरने से अन्नामलाई की संभावनाएं और मुश्किल हो गई हैं. जहां विजय बहुत कम समय में बड़ा राजनीतिक समर्थन बनाने में सफल रहे हैं, वहीं अन्नामलाई के सामने अब बीजेपी के संगठनात्मक समर्थन के बिना अपना स्वतंत्र आधार बनाने की चुनौती है.

मणिवन्नन ने कहा, “बीजेपी को लगा कि अन्नामलाई पर किया गया निवेश उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे रहा है. पार्टी को अंदरूनी मतभेदों से भी निपटना था और उसने राज्य में द्रविड़ पार्टियों के दबदबे को तोड़ने और टीवीके के उभार का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने की अलग राजनीतिक दिशा चुनी. अन्नामलाई को इस फैसले के नतीजों का सामना करना पड़ा.”

उन्होंने कहा, “टीवीके की जीत के पीछे निश्चित रूप से एक व्यवस्था और रणनीति है और अन्नामलाई इससे वाकिफ हैं. जब बीजेपी की अपनाई गई राजनीतिक दिशा उनके अपने राजनीतिक लक्ष्य के खिलाफ जाने लगी, तो उन्होंने अलग होने का फैसला किया. द्रविड़ पार्टियां शायद उन पर भरोसा न करें और बीजेपी भी उन्हें वापस लेने को लेकर हिचक सकती है. अब उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य खुद बनाना होगा.”

उन्होंने आगे कहा कि अन्नामलाई की बीजेपी की आलोचना लगातार साफ होती जा रही है. वहीं, उन्होंने राज्य में कथित भ्रष्टाचार या नशे के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विजय और टीवीके सरकार के खिलाफ उतना ही टकराव वाला रुख नहीं अपनाया है.

मणिवन्नन ने कहा, “उन्होंने अभी तक खुले तौर पर विजय की आलोचना नहीं की है, लेकिन अब वह बीजेपी के आलोचक हैं और यह बात काफी साफ है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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