लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 84 वर्षीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास जेनरेशन ज़ी के लिए कई नसीहतें हैं. लिव-इन रिलेशनशिप से लेकर गर्भावस्था, मां बनने और कई दूसरे मुद्दों तक. लेकिन उनकी सलाह हर किसी को पसंद नहीं आ रही है.
विपक्षी दलों, महिला नेताओं और सामाजिक टिप्पणीकारों की आम राय है कि उनकी सोच “पुरानी” है और वह “आधुनिक महिलाओं” की आकांक्षाओं को नहीं समझतीं क्योंकि उनका संबंध RSS की पृष्ठभूमि से रहा है.
आनंदीबेन पटेल उस समय नरेंद्र मोदी की करीबी मानी जाती थीं, जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने उनकी जगह गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला. उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया. जुलाई 2019 से वह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं और तब से कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में रही हैं.
गुरुवार को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के दीक्षांत समारोह में पटेल ने कहा कि महिलाओं को IAS अधिकारी या शिक्षक बनने की इच्छा रखने से पहले “एक्सपर्ट मां” बनने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने पारिवारिक मूल्यों, माता-पिता की जिम्मेदारी और चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया.
छात्रों को संबोधित करते हुए राज्यपाल, जो राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं, ने कहा कि पेशेवर सफलता परिवार की जिम्मेदारियों की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए.
उन्होंने युवा महिलाओं से कहा कि शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई और करियर जारी रखें और साथ ही परिवार और समाज के कल्याण में भी योगदान दें.
उन्होंने कहा, “चाहे आप IAS अधिकारी बनें या शिक्षक, पहले एक्सपर्ट मां बनें. हर किसी को घर का बना खाना बनाना आना चाहिए.”
पटेल ने आगे कहा कि महिलाओं को अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए. उन्होंने माता-पिता से भी कहा कि बच्चों का स्कूल या कॉलेज में दाखिला करा देने के बाद अपनी जिम्मेदारी पूरी हुई न मानें.
इससे पहले मंगलवार को लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पटेल ने एक और बयान दिया था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया.
उन्होंने कहा, “कभी-कभी लड़के-लड़कियां भाग जाते हैं… फिर कुछ गर्भवती हो जाती हैं… बच्चे को कोई अपनाता नहीं… उस बच्चे के मां-बाप कौन हैं? सरकार. यह सब आप लोग करते हैं… ऐसी चीजों में मत पड़िए.”
इन दोनों मौकों पर दिए गए उनके बयानों की बाद में कड़ी आलोचना हुई. विपक्षी दलों और टिप्पणीकारों ने राज्यपाल पर महिलाओं और निजी रिश्तों को लेकर पिछड़ी सोच वाले बयान देने का आरोप लगाया.
पटेल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने दिप्रिंट से कहा, “राज्यपाल BJP-RSS की विचारधारा से आती हैं और वह यह नहीं समझतीं कि आधुनिक महिलाएं क्या चाहती हैं. उनकी सोच पुरानी है.”
उन्होंने कहा, “जब समाज बराबरी की बात कर रहा है, तब वह मानती हैं कि महिलाओं का काम सिर्फ घर संभालना है. यह तय करने वाली वह कौन होती हैं? हम ऐसे बयानों की कड़ी निंदा करते हैं.”
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता सूची विश्वास ने भी राज्यपाल की टिप्पणियों की आलोचना की.
उन्होंने कहा, “महिलाओं को लेकर उनके विचार आज की पीढ़ी की सोच से मेल नहीं खाते. वह युवा छात्रों को संबोधित कर रही थीं, जिनमें ज्यादातर जेनरेशन Z के थे. मुझे नहीं लगता कि वहां मौजूद किसी लड़की ने उनकी बात से सहमति जताई होगी. हर बार छात्राओं की ‘दादी-अम्मा’ बनने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है. आज के दादा-दादी की सोच भी आधुनिक है.”
लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा ने भी इस पर आपत्ति जताई.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “ऐसे बयानों का स्वागत नहीं किया जाना चाहिए. लड़कियां अच्छी तरह जानती हैं कि उन्हें कौन सा रास्ता चुनना है. युवा महिलाओं को ऐसी सलाह देने के बजाय राज्यपाल को अपने कुलाधिपति कार्यकाल में विश्वविद्यालयों की स्थिति पर बात करनी चाहिए थी.”
उन्होंने कहा, “एक खास विचारधारा के लोग शिक्षा संस्थानों पर कब्जा कर रहे हैं. चर्चा के लिए इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल हैं.”
‘लड़कियों के 50-50 टुकड़े हो जाते हैं’
यह पहली बार नहीं है जब आनंदीबेन पटेल अपने बयानों को लेकर विवादों में आई हैं.
पिछले साल वाराणसी में एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने छात्रों को लिव-इन रिलेशनशिप से दूर रहने की सलाह दी थी.
उन्होंने कहा, “लिव-इन रिलेशनशिप से दूर रहिए. अपनी जिंदगी के फैसले सोच-समझकर लीजिए… आपने लड़कियों के 50-50 टुकड़े होते हुए देखे होंगे.” वह महिलाओं से जुड़े कुछ चर्चित हत्या के मामलों का जिक्र कर रही थीं.
2024 में लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पटेल ने रामायण के पात्र कुंभकर्ण को लेकर भी एक चौंकाने वाला दावा किया था. वह भारत के ऐतिहासिक ज्ञान और तकनीकी उपलब्धियों पर बोल रही थीं.
उन्होंने कुंभकर्ण को “टेक्नोक्रेट” बताते हुए कहा था कि रावण का भाई कुंभकर्ण तकनीक का विशेषज्ञ था.
पटेल के मुताबिक, कुंभकर्ण उस दौरान गुप्त रूप से रिसर्च करता था और मशीनें विकसित कर रहा था. उन्होंने यह भी दावा किया कि रावण ने जानबूझकर यह कहानी फैलाई कि कुंभकर्ण छह महीने तक सोता था, ताकि उसके काम को छिपाया जा सके.
राज्यपाल ने कहा था, “हो सकता है आज हमारे पास यह जानकारी न हो, लेकिन किताबों में सब कुछ लिखा हुआ है.”
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