देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है.
वीआईपी मेहमानों के ठहरने, खाने और अन्य खर्चों के भुगतान की जांच में सामने आई बातों के आधार पर सरकार ने बदरीनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए.
पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग (अनुभाग-1) के उप सचिव अनिल कुमार पांडे ने 25 जून को जारी एक पत्र में केदारनाथ में वीआईपी मेहमानों के ठहरने और मेहमाननवाजी से जुड़े बिलों के भुगतान की जांच रिपोर्ट का जिक्र किया.
जांच में पहली नजर में यह सामने आया कि सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना मंदिर कोष से अग्रिम राशि जारी की गई, जो वित्तीय गड़बड़ी मानी गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन प्रबंधक, केदारनाथ, तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी, केदारनाथ और तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है.
सरकार ने BKTC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का नाम है, उनके खिलाफ श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से जुड़े कई वित्तीय मामलों की पहले से जांच चल रही है. सरकार के इस कदम को मंदिर प्रशासन में वित्तीय जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि समिति जांच में नाम आए अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है.
इससे पहले आज, उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर दान चोरी के कथित मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने पांच गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. वहीं, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) से पिछले तीन साल के बैंक रिकॉर्ड जमा करने की उम्मीद है.
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान 2 जुलाई की CCTV फुटेज बरामद हुई है, जिसमें आरोपी कथित तौर पर दान गिनने वाले कमरे से संदिग्ध तरीके से नकदी उठाता हुआ दिखाई दे रहा है.
चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि SIT ने उपलब्ध गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं और BKTC की आधिकारिक आंतरिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. उन्होंने कहा कि सबूत जुटाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा, “हम फिलहाल BKTC की शिकायत के आधार पर जांच कर रहे हैं. हमने मामले के कुछ प्रमुख उपलब्ध गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. हम BKTC की आधिकारिक आंतरिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. बाकी गवाहों के बयान भी जल्द दर्ज किए जाएंगे. CCTV फुटेज का विश्लेषण और सबूत जुटाने की प्रक्रिया जारी है. सबूत जुटाने के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी.”
इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने दावा किया था कि CCTV फुटेज में निलंबित बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) कर्मचारी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर मंदिर के दान गिनने वाले कमरे से नकदी, सोने-चांदी के सिक्के, शालिग्राम शिला और चढ़ावे के लिफाफे संदिग्ध तरीके से छिपाते या चोरी करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
यह जांच 2 जुलाई को बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों से शुरू हुई. शुरुआती जांच में कथित तौर पर पाया गया कि तय प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए गिनती वाले स्थान से नकदी हटाई गई थी.
इस मामले में FIR बदरीनाथ थाने में BKTC के प्रभारी मंदिर अधिकारी युधवीर पुष्पवन की शिकायत पर दर्ज की गई थी. SIT ने उनका बयान भी दर्ज किया है. जांच के तहत BKTC के अन्य अधिकारियों, जिनमें CCTV कंट्रोल अधिकारी पंवार और दान की गिनती के दौरान मौजूद हरेंद्र कोठारी शामिल हैं, के बयान भी दर्ज किए गए हैं.
इस बीच, प्रमोद नौटियाल ने अपने निलंबन और उनके खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट का रुख किया है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा ने की और BKTC को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी.
फिलहाल इस मामले की जांच पुलिस, SIT, BKTC की विभागीय जांच समिति और गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति, सभी एक साथ कर रही हैं.
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