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Monday, 26 October, 2026
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‘रेवंत रेड्डी के तहत कांग्रेस असली कांग्रेस नहीं’—तेलंगाना NSUI के पूर्व अध्यक्ष BRS में शामिल

आदिलाबाद जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के पूर्व अध्यक्ष भार्गव देशपांडे ने आरोप लगाया कि राज्य में पार्टी का नेतृत्व ‘हाईकमान के मुताबिक काम नहीं कर रहा है’.

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हैदराबाद: कांग्रेस नेता और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की तेलंगाना इकाई के पूर्व अध्यक्ष भार्गव देशपांडे रविवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) में शामिल हो गए. उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस नेतृत्व से खुश नहीं थे, जो “कांग्रेस हाईकमान के मुताबिक काम नहीं कर रहा है”.

देशपांडे के पार्टी छोड़ने से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. वह पहले से ही अल नीनो के कारण राज्य में कई संकटों से निपट रहे हैं.

देशपांडे आदिलाबाद जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्ष भी दो बार रह चुके हैं. उन्हें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (K.T.R.) ने BRS में शामिल कराया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार “असली कांग्रेस” के नेताओं को अपने से दूर कर रही है.

देशपांडे ने रविवार दोपहर K.T.R. के घर के बाहर मीडिया से कहा, “मैं तब कांग्रेस में शामिल हुआ था, जब मैं किशोर था. उस समय सोनिया गांधी और राहुल गांधी मौजूद थे और (संयुक्त) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी थे. हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी पूरी तरह बदल गई है. खासकर 2017 में रेवंत रेड्डी के पार्टी में शामिल होने के बाद. यह असली कांग्रेस नहीं है. राज्य में कांग्रेस का नेतृत्व कांग्रेस हाईकमान के मुताबिक काम नहीं कर रहा है.”

उन्होंने कहा कि उन्होंने BRS में शामिल होने का फैसला इसलिए किया क्योंकि तेलंगाना कैबिनेट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी की जमीनी स्तर पर खराब हो रही छवि को ठीक करने की उनकी अपील पर जवाब नहीं दे रहे थे.

यह राजनीतिक बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तरी तेलंगाना का आदिलाबाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मजबूत इलाका माना जाता है. देशपांडे के जाने से इस इलाके में कांग्रेस न सिर्फ कमजोर होगी, बल्कि राज्य में होने वाले आगामी ग्रेजुएट MLC चुनावों में BJP और BRS के बीच लगभग सीधा मुकाबला हो सकता है.

देशपांडे ने कहा, “तेलंगाना चुनाव के लिए दो साल बचे हैं. कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादार कार्यकर्ताओं के लिए मेरा सिर्फ एक संदेश है. कांग्रेस छोड़ो, तेलंगाना बचाओ.”

महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद और वारंगल-खम्मम-नलगोंडा ग्रेजुएट सीटों के लिए चुनाव अगले साल की शुरुआत में ही होना है. इसमें 77 विधानसभा क्षेत्रों के ग्रेजुएट्स के वोट देने की उम्मीद है. हालांकि, सभी पार्टियां इसे गंभीरता से ले रही हैं. कुछ पार्टियां इसे 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए जनमत संग्रह भी बता रही हैं.

देशपांडे का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के वरिष्ठ नेता टी. जीवन रेड्डी के अप्रैल में BRS में शामिल होने के कुछ महीनों बाद हुआ है. जीवन रेड्डी जगतियाल में हुए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में BRS में शामिल हुए थे, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और BRS के संस्थापक के. चंद्रशेखर राव (K.C.R.) ने उनका स्वागत किया था. K.C.R. ने तुरंत जीवन रेड्डी को पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया था. देशपांडे की तरह उन्होंने भी कहा था कि उन्होंने राज्य के नेतृत्व से अपमानित महसूस करने के बाद कांग्रेस छोड़ी और पार्टी के साथ अपने 42 साल पुराने संबंध को खत्म कर दिया.

देशपांडे के BRS में शामिल होने और कांग्रेस पर पानी और किसानों के संकट को ठीक से नहीं संभालने के आरोपों के विरोध में BRS 1 नवंबर को आदिलाबाद में किसानों की रैली कर रही है. शामिल होने के कार्यक्रम में मौजूद पार्टी नेताओं ने कहा कि ‘रायथु गर्जना’ (किसानों की दहाड़) रैली में कांग्रेस के और भी नेता BRS में शामिल हो सकते हैं.

उसी दिन मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी नई दिल्ली में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ चुनावी मतदाता सूचियों में बदलाव की प्रक्रिया के विरोध में शामिल होंगे. उनके साथ राज्य से कांग्रेस के 15,000 कार्यकर्ता भी होंगे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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