चंडीगढ़: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक शिकायत के बाद पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक रेप केस को दबाने के लिए 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. NHRC ने कहा कि इन आरोपों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर का नाम भी सामने आया है. इन आरोपों के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है.
NHRC के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने ANI को बताया कि आयोग ने इन आरोपों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दे दी है. कानूनगो ने कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है.”
नोटिस में आयोग ने कहा कि उसे शुक्रवार को लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) की ओर से एक शिकायत मिली. इसमें बताया गया कि हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज रंजीत सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “रेप केस के संबंध में 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. इस मामले में कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पत्नी का नाम जुड़ा है.”
अपहरण और रेप के मामले में FIR 29 अप्रैल को अमृतसर में दर्ज हुई थी, जबकि लड़की को 1 मई को बरामद किया गया. आरोपी, जो मोहाली का रहने वाला है, को 13 मई को गिरफ्तार किया गया था.
NHRC के नोटिस के मुताबिक, LRO ने आरोपों की गंभीरता और आपराधिक न्याय व्यवस्था पर इसके संभावित असर को देखते हुए स्वतंत्र रूप से इसकी जांच करने की मांग की.
वहीं, रंजीत सिंह ने मंगलवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लड़की के पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें मांग की गई थी कि केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी जाए, क्योंकि जांच सही तरीके से नहीं हो रही थी.
उन्होंने कहा, “याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी ने FIR रद्द करवाने के लिए आरोपी से 5 करोड़ रुपये मांगे थे. मैं अपनी तरफ से यह बात नहीं कह रहा हूं. यह याचिका में लिखा है.” उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कुछ सबूत भी जमा किए हैं.
रिटायर्ड जज रंजीत सिंह पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (PHRO) नाम के NGO के प्रमुख हैं. उन्होंने एक और याचिका का भी जिक्र किया. यह याचिका एक आर्मी यूनिट ने एक रियल एस्टेट डेवलपर के खिलाफ दायर की थी. आरोप है कि डेवलपर अमृतसर में ऐसे इलाके में होटल बना रहा था, जिसे निर्माण के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का एक रिश्तेदार उस बिल्डर को बचा रहा था. उन्होंने पंजाब सरकार से दोनों याचिकाओं पर ध्यान देने और उचित कार्रवाई करने की मांग की.
खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री की पत्नी ने रिटायर्ड जज को नोटिस भेजकर 24 घंटे के अंदर जवाब देने को कहा है. ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जस्टिस सिंह ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है. लेकिन अगर उन्हें नोटिस मिलता है, तो वे उसका जवाब देंगे.
याचिका में क्या कहा गया है
यह याचिका 30 जून को 55 साल के एक व्यक्ति ने दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया कि मोहाली के रहने वाले गुरिंदर सिंह उर्फ गुरी चहल ने उसकी बेटी का अपहरण किया और उसके साथ रेप किया. उसने लड़की से शादी करने का वादा किया था.
उस व्यक्ति ने आरोप लगाया कि चहल के पास उसकी बेटी की निजी तस्वीरें थीं और वह उसे ब्लैकमेल कर रहा था.
शिकायतकर्ता के वकील सौरभ अरोड़ा ने दिप्रिंट को याचिका की एक कॉपी दी. इसमें कहा गया है कि चहल को गिरफ्तार तो किया गया था, लेकिन पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की. इसके बाद उसे जेल से छोड़ दिया गया.
याचिका में जिन दूसरे लोगों को पक्ष बनाया गया है, उनमें चहल का दोस्त सिमरनजीत सिंह हुंदल और मुख्यमंत्री की पत्नी के ‘बताए गए रिश्तेदार’ अमरदीप सिंह ग्रेवाल शामिल हैं.
पिता ने याचिका में कहा कि आरोपी अमृतसर पुलिस पर मामले को दबाने के लिए दबाव बना रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि हुंदल ने 9 जून को चहल की तरफ से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि ग्रेवाल, मुख्यमंत्री की पत्नी से अपनी कथित नजदीकी का इस्तेमाल करते हुए रेप के “झूठे” केस को दबाने के लिए करोड़ों रुपये मांग रहा था.
हुंदल की याचिका, जिसकी कॉपी पिता की दायर याचिका के साथ लगाई गई है, में कोर्ट से अपनी जान और आजादी की सुरक्षा मांगी गई थी.
इसमें “जबरन पैसे वसूलने, आपराधिक धमकी देने, राजनीतिक प्रभाव और सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल” से जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई थी.
हुंदल ने कहा कि अमृतसर के अलावा, चहल के खिलाफ मोहाली में भी इसी तरह का एक केस दर्ज था. उसने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि ग्रेवाल झूठी रेप FIR दर्ज करवाने और फिर अपने संबंधों का इस्तेमाल करके उन्हें दबाने के लिए पैसे लेने का काम करता था.
उसने यह भी कहा कि 24 मई को मोहाली के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.
आरोप और जवाबी आरोप
इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को लड़की के पिता की याचिका का निपटारा कर दिया और जांच स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को सौंपने का आदेश दिया.
HC की जज जस्टिस मंदीप पन्नू ने आदेश दिया, “स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एक ऐसे वरिष्ठ राजपत्रित पुलिस अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी देंगे, जो पहले किसी भी समय इस मामले की जांच से जुड़ा न रहा हो. यह अधिकारी उनकी पूरी निगरानी में जांच करेगा.”
आदेश में जज ने दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों और जवाबी आरोपों पर ध्यान दिया.
कोर्ट ने कहा कि लड़की के पिता की याचिका में आरोपी बनाए गए हुंदल ने भी हाई कोर्ट में अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि अमरदीप सिंह ग्रेवाल मुख्यमंत्री की पत्नी के करीबी हैं और FIR रद्द करवाने की कोशिश की जा रही है.
जस्टिस पन्नू के आदेश में लिखा है, “याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि हुंदल ने खुद दावा किया था कि FIR रद्द करवाने के लिए मुख्यमंत्री की पत्नी ने 5 करोड़ रुपये की मांग की थी. इन आरोपों के समर्थन में याचिकाकर्ताओं ने उस रिट याचिका की कॉपियां, बैठकों की तस्वीरें और बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट पेश किए हैं.”
जज ने जवाबी दलीलों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राज्य के वकील ने याचिका का विरोध किया और बताया कि जांच अभी जारी है.
राज्य के वकील ने कहा कि लड़की और चहल लिव-इन रिलेशनशिप में थे और आरोप मुख्य रूप से शादी का वादा पूरा नहीं होने के कारण सामने आए थे.
आदेश में कहा गया, “यह दावा किया गया है कि राजनीतिक दबाव, जांच में दखल, धमकी, जबरदस्ती और FIR रद्द करवाने की कोशिश से जुड़े याचिकाकर्ताओं के आरोप झूठे, बेबुनियाद और बिना किसी आधार के हैं.”
जांच ट्रांसफर की गई
आरोपों और जवाबी आरोपों को ध्यान में रखने के बाद जस्टिस पन्नू ने अपने आदेश में लिखा, “इस याचिका में लगाए गए आरोप निश्चित रूप से गंभीर हैं. याचिकाकर्ताओं ने खास तौर पर यह आशंका जताई है कि स्थानीय पुलिस से उन्हें निष्पक्ष, स्वतंत्र और सही जांच नहीं मिल पाएगी.”
HC ने आगे कहा कि इस समय हुंदल की ग्रेवाल के खिलाफ याचिका का महत्व इस बात में नहीं है कि उसमें लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं. महत्व इस बात का है कि “मुख्यमंत्री की पत्नी के कथित हस्तक्षेप और FIR रद्द करवाने के लिए 4-5 करोड़ रुपये की कथित बड़ी रकम की मांग” का जिक्र न सिर्फ लड़की के पिता की याचिका में हुआ है, बल्कि एक आरोपी पक्ष की याचिका में भी हुआ है.
जस्टिस पन्नू ने साफ कहा कि इस समय कोर्ट यह तय नहीं कर रहा है कि ये आरोप सच हैं या नहीं.
“हालांकि, इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इन आरोपों और इस तथ्य ने, कि प्रतिवादी नंबर 6 यानी हुंदल खुद प्रतिवादी नंबर 5 यानी चहल की तरफ से कानूनी कार्रवाई करने की बात मानता है, याचिकाकर्ताओं के मन में जांच की निष्पक्षता को लेकर एक वास्तविक आशंका पैदा कर दी है.”
जज ने कहा कि आरोपों को जोरदार तरीके से खारिज किया गया है. लेकिन यह कोई सामान्य मामला नहीं है, क्योंकि इसमें जांच की निष्पक्षता और बाहर से किसी तरह के प्रभाव के सवाल उठ रहे हैं. चूंकि जांच अभी चल रही थी और कोई अंतिम रिपोर्ट या केस रद्द करने की रिपोर्ट तैयार नहीं हुई थी, इसलिए जस्टिस पन्नू ने कहा कि इस समय यह तय करने की जरूरत नहीं है कि दोनों पक्षों में से किसका दावा सही है.
जज ने कहा कि जांच CBI को सौंपना एक असाधारण कदम है और ऐसा सिर्फ बहुत खास मामलों में किया जाना चाहिए. पुलिस के खिलाफ सिर्फ आरोप लगा देना CBI जांच का आदेश देने के लिए काफी नहीं है.
साथ ही, HC ने जोर दिया कि पीड़ित और आरोपी, दोनों को आपराधिक न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भरोसा होना चाहिए.
जज ने कहा कि अगर यह उचित डर हो कि जांच निष्पक्ष या स्वतंत्र नहीं हो सकती, तो कोर्ट यह सुनिश्चित कर सकता है कि जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए.
इस मामले में जस्टिस पन्नू ने कहा कि कोर्ट को जांच CBI को सौंपने की जरूरत नहीं लगी. इसके बजाय, जज ने आदेश दिया कि जांच ऐसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दी जाए, जिसका इस केस से कोई संबंध न हो. साथ ही, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित करने के लिए इसकी निगरानी राज्य स्तर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा की जाए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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