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Sunday, 6 September, 2026
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BSP प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश कैसे पदोन्नति और सज़ा के चक्र में फंसे

आकाश आनंद का पद घटाए जाने से पहले कुछ स्थानीय अख़बारों में ऐसी ख़बरें आई थीं कि वे 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए BSP उम्मीदवारों को चुनने में भूमिका निभाएंगे.

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने करीब तीन साल पहले अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था. लेकिन अब आकाश एक बार फिर पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता बन गए हैं. पिछले दो साल में यह तीसरी बार है जब बुआ मायावती ने 31 साल के आकाश से पार्टी की अहम जिम्मेदारियां वापस ली हैं.

गुरुवार को यहां BSP के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने कहा कि आकाश पार्टी में काम करते रहेंगे, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. BSP प्रमुख ने कहा, “मैंने आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की इजाजत दी है, जो आप सभी के सामने है, लेकिन उन्हें अभी और ज्यादा समझदार और परिपक्व होने की जरूरत है.” आकाश इस बैठक में मौजूद नहीं थे, जबकि उनके छोटे भाई ईशान आनंद उस कुर्सी पर बैठे थे, जिस पर आमतौर पर आकाश बैठते थे. अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ईशान किसी औपचारिक जिम्मेदारी में आकाश की जगह लेंगे.

बैठक के बाद जारी बयान में मायावती ने BSP के संस्थापक और अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में मदद करने की इजाजत दी थी, लेकिन वह कभी इस पक्ष में नहीं थे कि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाए या अगर पार्टी सत्ता में आए तो उन्हें सरकार में पद दिया जाए.

मायावती ने कहा कि उन्होंने भी इसी सिद्धांत का पालन किया है. उन्होंने कहा कि आकाश को BSP में काम करने की इजाजत दी गई है, लेकिन उन्हें अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है. उनके मुताबिक, BSP को चुनावी नुकसान से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था.

BSP नेताओं ने दिप्रिंट को बताया कि फिलहाल आकाश राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे.

आकाश को जिम्मेदारी से हटाने का फैसला कुछ स्थानीय अखबारों में छपी उन खबरों के बाद आया, जिनमें कहा गया था कि आकाश 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए BSP के उम्मीदवारों के चयन में भूमिका निभाएंगे. BSP के सूत्रों ने कहा कि मायावती इन खबरों से नाराज थीं और उन्हें बताया गया था कि ये खबरें आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने छपवाई थीं.

मायावती ने अगस्त में सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया था.

आकाश आनंद के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह मायावती के फैसले से नाराज हैं, लेकिन उनके पास इसे स्वीकार करने के अलावा ज्यादा कोई विकल्प नहीं है. एक सूत्र ने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने आकाश से संपर्क कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का ऑफर दिया है, लेकिन वह अभी कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं.

BSP में यह ताजा बदलाव उत्तर प्रदेश में पार्टी के लगातार कमजोर होते चुनावी प्रदर्शन के बीच हुआ है. 2017 में BSP ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा था, 19 सीटें जीती थीं और उसे 22.23 प्रतिशत वोट मिले थे. 2022 में भी उसने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ एक सीट जीत पाई और उसका वोट शेयर घटकर 12.88 प्रतिशत रह गया. यह 1993 के बाद राज्य में पार्टी का सबसे कम वोट शेयर था.

2024 के लोकसभा चुनाव में भी गिरावट जारी रही. BSP एक भी सीट नहीं जीत सकी और उत्तर प्रदेश में उसका वोट शेयर और घटकर 9.46 प्रतिशत रह गया.

आकाश आनंद पर नजर क्यों है

पिछले महीने आकाश आनंद ने X पर अंकित कुमार के समर्थन में एक पोस्ट लिखा था. अंकित कुमार एक दलित कैब ड्राइवर हैं. खबरों के मुताबिक, उन्होंने यात्रियों के एक समूह का विरोध किया था, जो कथित तौर पर “रेलवे कर्मचारी” थे और दलित समुदाय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बारे में जातिसूचक बातें कर रहे थे. इसके बाद एक कैब एग्रीगेटर ने कथित तौर पर अंकित पर प्रतिबंध लगा दिया था. उसी पोस्ट में आकाश ने लिखा था कि अंकित जैसे लाखों दलित युवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से जवाब मांग रहे हैं, जिन्होंने कई मौकों पर आरक्षण को लेकर अपने विचार रखे हैं.

BSP से जुड़े सूत्रों ने कहा कि मायावती से फोन पर बात होने के बाद आकाश ने यह पोस्ट हटा दी थी.

BSP से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जब आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल किया गया था, तब मायावती ने उन्हें सलाह दी थी कि वह मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी कम करें और ज्यादा ध्यान संगठन की जिम्मेदारियां निभाने पर दें, ताकि उन पर बहुत ज्यादा ध्यान न जाए.

BSP के मौजूदा ढांचे में पार्टी की लाइन सिर्फ मायावती तय करती हैं और वही तय करती हैं कि कौन मीडिया से बात करेगा और कितनी बात करेगा. सतीश मिश्रा और राज्य BSP प्रमुख विश्वनाथ पाल जैसे वरिष्ठ नेता मीडिया से बात करते हैं, लेकिन उनकी बातचीत पर भी कुछ सीमाएं हैं.

दूसरी ओर, आकाश मीडिया और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में अपेक्षाकृत ज्यादा माहिर हैं. उन्होंने BSP की कम्युनिकेशन रणनीति को आधुनिक बनाने की कोशिश की और उनकी टीम ने सोशल मीडिया वालंटियर्स का एक नेटवर्क बनाया, जो नियमित रूप से ऑनलाइन पार्टी का पक्ष सामने रखता था.

हालांकि, BSP के एक नेता के मुताबिक, मायावती को यह तरीका पसंद नहीं आया.

BSP के नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बहन जी के आसपास सतीश मिश्रा और रामजी गौतम जैसे वरिष्ठ नेता हैं और वह उनसे सलाह लेती हैं. आकाश युवाओं को पार्टी में लाने की कोशिश कर रहे थे और चाहते थे कि BSP मीडिया और सोशल मीडिया पर ज्यादा दिखाई दे. वह पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे को भी बदलना चाहते थे. यही वजह है कि वरिष्ठ नेतृत्व लगातार मायावती को उनके बारे में नकारात्मक फीडबैक देता रहता है.”

नेता ने आगे कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मायावती की सीमित बातचीत के कारण अब वह काफी हद तक वरिष्ठ नेताओं के फीडबैक पर निर्भर हैं. BSP के इस नेता ने दावा किया कि एक तरह की असुरक्षा भी है, क्योंकि मायावती नहीं चाहतीं कि पार्टी के अंदर कोई दूसरा ताकतवर केंद्र बने. उन्होंने कहा, “वहीं, युवा नेता चंद्रशेखर लगातार लोगों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें स्वीकार भी किया जा रहा है. BSP में जो जगह खाली रह गई थी, उस पर अब वह काबिज हो रहे हैं.”

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक विश्लेषक शिल्प शिखा सिंह ने कहा कि आकाश के खिलाफ की गई कार्रवाई से BSP का राजनीतिक संदेश कमजोर हुआ है. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “शायद ही किसी दूसरी पार्टी ने इतने कम समय में अपने घोषित उत्तराधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार किया हो. इससे न सिर्फ आकाश आनंद की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, बल्कि पार्टी का राजनीतिक संदेश भी कमजोर हुआ है.”

सिंह ने कहा कि ताजा घटनाक्रम से विपक्ष के उस आरोप को भी मजबूती मिल सकती है कि BSP सत्तारूढ़ BJP के खिलाफ पर्याप्त मजबूत रुख नहीं अपना रही है. उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब राजनीतिक दल युवा वोटरों और युवा नेताओं को अपनी ओर लाने की कोशिश कर रहे हैं, BSP अपने ही युवा नेता के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.”

राजनीति में सात साल का उतार-चढ़ाव

आकाश आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं. आनंद कुमार भी BSP के उपाध्यक्ष हैं.

मायावती ने 2017 में लंदन से MBA की पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद एक राजनीतिक रैली में आकाश को BSP कार्यकर्ताओं से मिलवाया था. अप्रैल 2019 में उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया गया और उसी साल हुए आम चुनाव के दौरान वह पार्टी के सबसे प्रमुख प्रचारकों में से एक बन गए.

दिसंबर 2023 में मायावती ने आकाश को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था. लेकिन मई 2024 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उनके एक भाषण के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज होने की संभावना बनी, जिसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटा दिया.

BSP प्रमुख ने जून 2024 में आकाश को फिर से पार्टी के पदों पर बहाल कर दिया.

हालांकि, मार्च 2025 में उन्होंने एक बार फिर आकाश को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया. उसी साल अगस्त में आकाश ने मायावती से माफी मांगी और इसके बाद उन्हें फिर से राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया गया.

BSP के एक दूसरे नेता ने कहा कि इन बार-बार होने वाले बदलावों से सिर्फ आकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर ही नहीं, बल्कि BSP किस दिशा में जा रही है, इसे लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है. उन्होंने कहा, “जब भी आकाश ऐसा रुख अपनाते हैं, जिससे BSP को फिर से मजबूत करने में मदद मिल सकती है या BJP को नुकसान हो सकता है, उनके लिए एक नया संकट खड़ा होता दिखाई देता है. कुछ भी लिखित में नहीं है, लेकिन मायावती के फैसलों से लगता है कि वह अलग-अलग विचारों के बीच फंसी हुई हैं.”

नेता ने दिप्रिंट से नाम न बताने की शर्त पर कहा, “ताजा फैसले ने आकाश आनंद के राजनीतिक करियर पर कई और निशान लगा दिए हैं. अब उनके सामने चुनौती सिर्फ दोबारा ऊपर उठने की नहीं है, बल्कि इन निशानों को मिटाने की भी है. अगर मायावती उन्हें गलतियां करने और उनसे सीखने की इजाजत नहीं देंगी, तो आकाश आगे कैसे बढ़ेंगे? कांशीराम ने मायावती को अपनी गलतियों से सीखने का मौका दिया था, और इसी से वह आज जहां हैं, वहां तक पहुंच पाईं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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