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Tuesday, 2 June, 2026
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नाबालिग रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप में AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज पर केस दर्ज

दिप्रिंट को मिली एफआईआर की कॉपी के अनुसार, सौरभ भारद्वाज ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट, AAP के फेसबुक पेज और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाबालिग रेप पीड़िता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की.

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ एक नाबालिग रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप में मामला दर्ज किया.

यह एफआईआर मध्य दिल्ली के बाराखंभा रोड निवासी प्रवीण नारायण की लिखित शिकायत के आधार पर जनकपुरी थाने में दर्ज की गई है.

यह एफआईआर लगभग एक महीने बाद दर्ज की गई है, जब सौरभ भारद्वाज और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने पश्चिमी दिल्ली के एक निजी स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ कथित रेप के मामले को उठाया था. आम आदमी पार्टी नेता ने पीड़िता के माता-पिता को भी सामने लाया था, जिन्होंने पहले आरोप लगाया था कि पुलिस मामले में सक्रियता से काम नहीं कर रही है.

कथित आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे द्वारका की एक अदालत से ज़मानत मिल गई थी. सौरभ भारद्वाज ने आरोपी को जमानत मिलने की आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि पुलिस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है.

दिप्रिंट को मिली एफआईआर के अनुसार, भारद्वाज ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट, आम आदमी पार्टी के फेसबुक पेज और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाबालिग पीड़िता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की.

एफआईआर में कहा गया है, “प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने घटनाक्रम का क्रम, पीड़िता के स्कूल का नाम, उसकी कक्षा और उम्र जैसी जानकारियां बताईं, जिससे नाबालिग की पहचान उजागर हो सकती है.”

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि भारद्वाज की यह कार्रवाई न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे नाबालिग की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है.

“एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता होने के बावजूद सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को गैर-जिम्मेदाराना तरीके से संभाला और संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की.”

शिकायतकर्ता ने पुलिस से सौरभ भारद्वाज और उनके आम आदमी पार्टी सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की है.

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 72 (कुछ यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित करना), किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम की धारा 74(3) (नाबालिग की पहचान का अनधिकृत खुलासा) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 23(4) (मीडिया में बाल पीड़ित की पहचान उजागर करना) के तहत मामला दर्ज किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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