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Saturday, 17 October, 2026
होममत-विमतट्रंप का पुतिन के साथ डीजल सौदा दिखाता है कि यूक्रेन पर अमेरिका का दबाव कितना सीमित है

ट्रंप का पुतिन के साथ डीजल सौदा दिखाता है कि यूक्रेन पर अमेरिका का दबाव कितना सीमित है

राष्ट्रपति चुने जाने के 24 घंटे के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने का वादा करने के करीब दो साल बाद, अब इस युद्ध को लेकर ट्रंप की नीति ईरान के साथ उनकी जंग के आगे एक छोटा मुद्दा बनकर रह गई है.

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड जे. ट्रंप का रूस के साथ डीजल का सौदा और पिछले रविवार को युद्धविराम का ऐलान, जो कुछ ही घंटों में टूट गया, पूर्वी यूरोप में अमेरिकी नीति की बढ़ती सीमाओं को दिखाता है.

ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका तुरंत रूस से 3 लाख टन डीजल खरीदेगा, नवंबर में 5 लाख टन और अगले महीने जरूरत पड़ने पर 10 लाख टन डीजल खरीदेगा. अमेरिका में इस ऐलान पर गुस्सा देखने को मिला, जबकि यूरोप ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. यूरोप ने मॉस्को पर प्रतिबंध लगाना जारी रखा और यूक्रेन को समर्थन देना भी जारी रखा.

भारत में इस सौदे पर काफी हैरानी जताई गई है. इसकी खास वजह यह है कि 2025 का ज्यादातर समय ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए नई दिल्ली की आलोचना करने में बिताया था. इस सौदे से पूरे अमेरिका में डीजल की कीमतें ज्यादा कम होने की उम्मीद नहीं है. ट्रंप 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों की ओर बढ़ रहे हैं. इन चुनावों के बाद रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण खत्म हो सकता है. इसलिए डीजल का यह सौदा और इसके बाद की घटनाएं दिप्रिंट के ‘न्यूज़मेकर ऑफ द वीक’ हैं.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सौदे का ऐलान करने के बाद ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को निशाना बनाया. उन्होंने 10 अक्टूबर को जेलेंस्की से इस्तीफा देने की मांग की. जेलेंस्की और ट्रंप के रिश्ते मुश्किल भरे रहे हैं. इसकी एक वजह ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हंटर बाइडन के लैपटॉप को लेकर उनका जुनून और यूक्रेन की कंपनी बुरिस्मा के साथ हंटर बाइडन के संबंधों की जांच थी. हंटर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के बेटे हैं.

फरवरी 2025 में दोनों नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए. व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों के बीच सबके सामने तीखी बहस हुई. 2025 के कुछ समय तक अमेरिका और यूक्रेन के रिश्ते खराब रहे, लेकिन कीव ने उस साल ज्यादातर समय रिश्ते सुधारने की कोशिश की. इसमें यूक्रेन के अहम खनिज भंडार में अमेरिका को हिस्सेदारी देने की पेशकश भी शामिल थी.

हालांकि, ताज़ा विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच फिर टकराव बढ़ गया है. जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से पुतिन के साथ ट्रंप के सौदे की आलोचना की. इसके बाद पिछले बुधवार को खबरें आईं कि यूक्रेन की स्टारशील्ड तक पहुंच पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं. स्टारशील्ड, स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क का सैन्य इस्तेमाल वाला हिस्सा है.

स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क ने इसकी जिम्मेदारी ट्रंप पर डाल दी. उन्होंने कहा कि इस सैन्य व्यवस्था को अमेरिका का रक्षा विभाग चलाता है. खबरों के मुताबिक, इसके बाद यूक्रेन पर लगाई गई पाबंदियां हटा ली गई हैं.

ट्रंप के कदमों को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों में नाराज़गी बढ़ रही है. दोनों दलों के सांसदों के एक समूह ने पुतिन के साथ डीजल सौदा रद्द करने की मांग की है. ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुने जाने के 24 घंटे के भीतर करीब पांच साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का वादा किया था. करीब दो साल बाद अब इस युद्ध को लेकर उनकी नीति ईरान के साथ उनकी जंग और सर्वेक्षणों में गिरती लोकप्रियता के आगे एक छोटा मुद्दा बनकर रह गई है.

हम यहां तक कैसे पहुंचे?

सोमवार को इस सौदे पर जेलेंस्की की पहली प्रतिक्रिया यह थी कि ट्रंप अपने देश की घरेलू चिंताओं को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं. इसकी वजह यह है कि दुनिया में डीजल की कुल आपूर्ति में रूस के डीजल निर्यात की हिस्सेदारी बहुत कम है. सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बताया कि दुनिया में डीजल की कुल आपूर्ति में रूस के डीजल निर्यात की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है. उन्होंने कहा कि इस सौदे से कीमतें कम करने में बहुत कम मदद मिलेगी.

ट्रंप के लिए देश में ईंधन की कीमतें कम होना, खासकर डीजल की कीमतें घटना, कांग्रेस के चुनावों में उनकी पार्टी की संभावनाओं के लिए बहुत ज़रूरी है. एएए के ईंधन मूल्य आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डीजल की कीमत पिछले हफ्ते 6.2 डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर शुक्रवार को करीब 6.3 डॉलर प्रति गैलन हो गई. एक साल पहले पेट्रोल पंप पर डीजल करीब 3.2 डॉलर प्रति गैलन बिक रहा था.

बढ़ती ईंधन कीमतों ने पूरे अमेरिका में महंगाई बढ़ाने में योगदान दिया है. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर तक के एक साल में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत रही. यह बढ़ोतरी अनुमान से ज्यादा थी. इससे पता चलता है कि दुनिया के ऊर्जा बाजार में आई रुकावटों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है. इन रुकावटों की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध है.

बढ़ती कीमतें और चीज़ों को खरीद पाना मुश्किल होने की चिंता, कांग्रेस के चुनाव लड़ रहे कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के प्रचार अभियान के अहम मुद्दे बन गए हैं. 3 नवंबर को सीनेट की एक-तिहाई सीटों और प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों पर चुनाव होंगे. द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रंप की लोकप्रियता घटकर 37 प्रतिशत रह गई है. करीब 60 प्रतिशत अमेरिकी अब तक उनके कामकाज से नाखुश हैं.

इसके जवाब में ट्रंप ने कथित तौर पर पुतिन के साथ सौदा कर लिया है और वादा किया है कि डीजल की कीमतें कम होंगी. अमेरिकी प्रशासन पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन से रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की मांग कर रहा था. कीव ने संकेत दिया है कि वह ऐसा करने को तैयार है, बशर्ते मॉस्को यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले बंद कर दे.

पिछले रविवार को ट्रंप ने यहां तक कि ‘ऊर्जा युद्धविराम’ का ऐलान भी कर दिया, लेकिन जेलेंस्की के मुताबिक, कुछ ही घंटों में यह समझौता टूट गया और पूरे यूक्रेन में गैस से जुड़ी सुविधाओं पर हमले हुए.

खबरों के मुताबिक, यूक्रेन ने 72 घंटे तक युद्धविराम का पालन किया. इसके बाद गुरुवार को उसने रूस की तेल रिफाइनरियों पर फिर से हमले शुरू कर दिए. पिछले करीब चार साल से अमेरिका यूक्रेन को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला देश रहा है. इसके बावजूद कि वॉशिंगटन के पास यूक्रेन पर दबाव बनाने की ताकत है, कीव ने ट्रंप की मांगों को खास तवज्जो नहीं दी है.

यूरोप बेपरवाह, भारत की नज़र

पिछले साल, अलास्का में ट्रंप की पुतिन से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद यूरोप के छह नेता यूक्रेन को अमेरिका का समर्थन जारी रखने का भरोसा लेने के लिए तेज़ी से वॉशिंगटन पहुंचे थे. ट्रंप के सामने बैठे इन छह नेताओं की तस्वीर दुनियाभर में वायरल हो गई थी.

इस साल यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने ट्रंप और पुतिन के डीजल सौदे की आलोचना की. इसके बाद सोमवार को उन्होंने रूस के खिलाफ 1,600 से ज्यादा नए प्रतिबंध लागू कर दिए.

ईयू की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काया कैलास ने कहा कि यह प्रतिबंध पैकेज इस बात का सबूत है कि “यूरोप एक बार फिर एकजुट होकर सामने आ रहा है”. उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का निशाना रूस की “बैलिस्टिक मिसाइलों की प्रोडक्शन सीरीज़” है. इसका मकसद मिसाइलों का उत्पादन “काफी मुश्किल, धीमा और महंगा” बनाना है.

कैलास ने सोमवार को कहा, “ईयू के विदेश मंत्रियों ने अभी रूस के सैन्य और औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाने वाले करीब 1,600 नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है. रूस के युद्ध शुरू करने के बाद से हमारी प्रतिबंध सूची में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.”

कई राजनयिक सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि यूरोप का ध्यान अब भी ट्रंप को संभालने और यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन बढ़ाने पर है. ट्रंप के इस ताज़ा सौदे से यूरोपीय नेताओं को उतना आश्चर्य नहीं हुआ, जितना शायद होना चाहिए था. यूरोपीय संघ रूस पर अपने प्रतिबंध जारी रखे हुए है. साथ ही, वह यह भी मानता है कि ट्रंप का यह नया कदम अटलांटिक के दोनों तरफ के देशों के बीच साझेदारी की जड़ पर चोट करता है.

भारत के लिए ट्रंप का यह नया ऐलान ऐसे समय आया है, जब कुछ हफ्ते पहले ही अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पारित किया था. इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं, जो रूस और ईरान से तेल खरीदना जारी रखते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है.

अमेरिकी कानून से नई दिल्ली में यह डर बढ़ गया कि रूस से तेल खरीदना जारी रखने के कारण भारत पर और टैरिफ लगाए जा सकते हैं. विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा था कि अगर ट्रंप ने भारत की ऊर्जा नीति के लिए उसे सजा दी, तो इसके “संभावित असर” हो सकते हैं.

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए कहा कि ट्रंप “अगले 10 दिनों” में टैरिफ पर फैसला करेंगे. ट्रंप प्रशासन अगर रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों को निशाना बनाता है, जबकि खुद अमेरिका को घरेलू ऊर्जा की कीमतें कम रखने के लिए ऐसा ही करने देता है, तो वॉशिंगटन के लिए अपने इस फैसले का बचाव करना मुश्किल होगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रंप की नीतियों ने साफ कर दिया है कि इस संघर्ष से निपटते समय अमेरिका किन मुश्किलों में फंसा हुआ है. शायद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी सही थीं, जब उन्होंने कहा था कि ट्रंप के मामले में “हर रास्ता पुतिन तक जाता है”.

(न्यूज़मेकर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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