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Saturday, 22 August, 2026
होममत-विमतन रेस्टोरेंट, न सेलिब्रिटी, न पब्लिसिटी—तुकाराम मुंढे का मिशन सिर्फ सुरक्षित खाना है

न रेस्टोरेंट, न सेलिब्रिटी, न पब्लिसिटी—तुकाराम मुंढे का मिशन सिर्फ सुरक्षित खाना है

तुकाराम मुंढे ने अगस्त 2005 में IAS जॉइन किया था. उनके अपने शब्दों में, वह “ऐसे व्यक्ति हैं, जो सत्ता के गलियारों में चलने से पहले खेत की मिट्टी पर नंगे पैर चले हैं.”

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नई दिल्ली: महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे का नाम विभाग में पोस्टिंग के तीन महीने में ही मुंबई की फूड कल्चर का पर्याय बन गया है, बिल्कुल वैसे ही जैसे साधारण वड़ा पाव.

2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे के नेतृत्व में FDA ने मुंबई के कई मशहूर रेस्टोरेंट और खाने की जगहों के खिलाफ कार्रवाई की है. इनमें 100 साल से ज्यादा पुराना नूर मोहम्मदी, आदित्य बिड़ला न्यू एज हॉस्पिटैलिटी का वारसा और शेफ राहुल अकरकर द्वारा चलाया जाने वाला फ्लिंट, 100 साल से ज्यादा पुराना पारसी डेयरी फार्म, 70 साल से ज्यादा पुराना K Rustom & Co और द विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब शामिल हैं.

जो स्ट्रीट फूड पहले लाल, नारंगी और पीले जैसे ज्यादा चमकीले रंगों में मिलता था, अब उसे ज्यादा प्राकृतिक रंगों में देखा जा रहा है. कॉटन कैंडी अब कृत्रिम रंगों से बनाई गई चमकीली गुलाबी रंग की जगह अपने प्राकृतिक सफेद रंग में बेची जा रही है. डेयरी के बिना बनाए जाने वाले “एनालॉग” पनीर और खुले में खाने का तेल बेचने पर रोक लगा दी गई है. यहां तक कि बॉम्बे हाई कोर्ट के अंदर मौजूद कैंटीन की भी जांच की गई.

और पिछले एक हफ्ते में उन्होंने बॉलीवुड को भी इसमें शामिल कर लिया है.

FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजे. आधुनिक विमल इलायची के विज्ञापनों में उनका खास ‘V’ हाथ का इशारा अभी तक उनके लिए कोई जीत नहीं ला पाया है क्योंकि FDA का आरोप है कि उनके विज्ञापन विमल पान मसाला के लिए छिपे हुए विज्ञापन हैं, जो राज्य में प्रतिबंधित उत्पाद है.

यहां तक कि सेलिब्रिटी भी उन्हें मदद के लिए याद कर रहे हैं और उन्हें किसी बचाने वाले की तरह देख रहे हैं. अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने हाल ही में एक रील बनाई, जिसमें उन्होंने बताया कि Swiggy Instamart से Red Bull ऑर्डर करने पर उन्हें उसके साथ कॉकरोच मिला.

वीडियो में उन्होंने पूछा, “मुंढे जी, आप कहां हैं?” महाराष्ट्र में बहुत से लोग यही सवाल पूछ रहे हैं—कुछ लोगों को उम्मीद है कि यह अधिकारी खाने की साफ-सफाई से जुड़ी उनकी सभी समस्याएं ठीक कर देंगे, जबकि कुछ लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह उनके रेस्टोरेंट में न पहुंचें और उसे बंद न कर दें.

और यही वजह है कि तुकाराम मुंढे दिप्रिंट के ‘न्यूज़मेकर ऑफ द वीक’ हैं.

फूल भी मिले, आलोचना भी

मुंढे को लेकर यह चर्चा नई नहीं है. 2020 में नगर निगम कमिश्नर के आधिकारिक आवास के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे. उनके हाथों में मुंढे के समर्थन वाले पोस्टर थे. उस समय उन्हें नागपुर से ट्रांसफर किया जा रहा था. बताया जाता है कि जब वह बंगले से निकले तो भीड़ ने उनकी कार पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं.

लेकिन फूलों की पंखुड़ियों से स्वागत तक पहुंचने के इस सफर में उनके 21 साल के करियर में 25 ट्रांसफर हुए हैं.

मुंढे बीड जिले के ताडसोन्ना गांव में बड़े हुए और अगस्त 2005 में सोलापुर में अतिरिक्त सहायक कलेक्टर के तौर पर IAS जॉइन किया. यह अब तक उनकी सबसे लंबी पोस्टिंग में से एक रही है. उनके अपने शब्दों में, वह “ऐसे व्यक्ति हैं, जो सत्ता के गलियारों में चलने से पहले खेत की मिट्टी पर नंगे पैर चले हैं.”

मुंढे की ज्यादातर पोस्टिंग ज्यादा लंबी नहीं रही हैं क्योंकि उनका दो दर्जन से ज्यादा बार ट्रांसफर हुआ है. इसके बावजूद वह जहां भी गए, वहां लगभग हर जगह नेताओं को नाराज़ करने में कामयाब रहे.

मुंढे के लिए ट्रांसफर उनकी नौकरी का हिस्सा हैं.

उन्होंने दिप्रिंट के एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता को एक इंटरव्यू में कहा, “एक सरकारी कर्मचारी और IAS अधिकारी होने के नाते, मुझ पर भी वही नियम लागू होते हैं. मैं एक चीज़ को लेकर शिकायत नहीं कर सकता…यह नौकरी का हिस्सा है. जब मैं सरकारी अधिकारी हूं, तो ट्रांसफर होते हैं और यह सरकार का अधिकार है.”

वह मानते हैं कि यह खासकर उनके परिवार के लिए मुश्किल हो जाता है.

लेकिन उन्होंने कहा, “अगर आप कोई जिम्मेदारी निभा रहे हैं और आपने यह तय किया है कि आपको एक खास तरीके से काम करना है, अगर उसकी कोई कीमत चुकानी पड़ती है, तो आपको वह कीमत चुकानी होगी.”

‘गिलास आधा भरा है’

12 लाख से ज्यादा फूड और बिजनेस ऑपरेटरों के बीच मुंडे को हर जगह सिर्फ खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन और रोजमर्रा के खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट नजर आती है.

खान, देवगन और श्रॉफ को भेजे गए नोटिस को लेकर मुंढे की सोच साफ है.

उन्होंने गुप्ता से कहा, “मैं मूल रूप से सुरक्षित खाने के पीछे हूं. हमारे पास सुरक्षित खाना और सुरक्षित दवाएं होनी चाहिए क्योंकि एक रेगुलेटर के तौर पर यही मेरी भूमिका है.”

उन्होंने बताया कि ये नोटिस Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत जारी किए गए हैं. ये नियम भ्रामक या छिपे हुए विज्ञापनों पर रोक लगाते हैं. इन विज्ञापनों में पान मसाला या गुटखा कहने के बजाय “इलायची” की बात की जाती है और इसी वजह से इन पर भ्रामक विज्ञापन का आरोप लगाया गया है.

मुंढे को दूध से लेकर एनालॉग पनीर तक कई दूसरी गड़बड़ियां भी मिली हैं, जो साफ तौर पर दिखाई देती हैं. वह अक्सर कानून के तहत खाने की उन चीजों की बात करते हैं, जिन्हें “हाई-रिस्क” कैटेगरी में रखा गया है. इसमें वे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, जिनमें फैट, चीनी और नमक (HFSS) की मात्रा ज्यादा होती है.

उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “हमें रसोई के नीचे एक खुली नाली मिली. इससे ज्यादा खराब कुछ नहीं हो सकता और यह एक जाना-माना (रेस्टोरेंट) है.”

लेकिन मुंढे का अपने काम और लाइफ को देखने का तरीका उन्हें आगे बढ़ाता रहता है.

उन्होंने गुप्ता से कहा, “इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस दुनिया की एकमात्र ऐसी सर्विस है, जहां आपको कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. एक दिन मैं एड्स कंट्रोल में काम करता हूं, दूसरे दिन पशुपालन में, तीसरे दिन स्वास्थ्य में, चौथे दिन सेल्स टैक्स में और पांचवें दिन किसी कॉरपोरेट में काम करता हूं. इसलिए आपको हर तरह का काम करने का अनुभव मिलता है. अगर मैं सीखने के लिए तैयार हूं, तो मुझे लगता है कि मैं और बेहतर बनूंगा. IAS के अलावा किसी और व्यक्ति को इतना ज्यादा अनुभव नहीं मिलता.”

उन्होंने कहा कि शासन का बुनियादी ढांचा भले ही एक जैसा रहता है, लेकिन IAS अधिकारी को उस क्षेत्र के बारे में पढ़ना ज़रूरी होता है.

उन्होंने कहा, “और अगर आप उसका अध्ययन करते हैं, तो आप खुद को बेहतर बनाते हैं और बेहतर तरीके से योगदान देते हैं…मेरी जितनी भी पोस्टिंग रही हैं, मैं उन्हें गिलास आधा भरा हुआ मानता हूं. मैंने बहुत सी चीज़ें सीखने और कई क्षेत्रों में योगदान देने का मौका पाया है.”

तलवार और मच्छर

FDA की कार्रवाई पर अब बॉम्बे हाई कोर्ट की भी नज़र लगातार बढ़ रही है.

इसी महीने हाई कोर्ट ने FDA को उसके सख्त रवैये के लिए फटकार लगाई. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि वह मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल कर रहा है.

लेकिन मुंढे कोर्ट की इस टिप्पणी से सहमत नहीं हैं.

उन्होंने गुप्ता से कहा, “हम (मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल) नहीं करते. हमारे पास कानून है. हम उसी के अनुसार चलते हैं. मच्छर को मारने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि हमें असुरक्षित खाने की समस्या को खत्म करना है. यही हमारा काम है और हम कानून, नियम और नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे. इससे ज्यादा कुछ नहीं. इससे कम भी कुछ नहीं.”

हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे स्थित गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को दोबारा खोलने की अनुमति दी. दोबारा जांच में उसे 98 प्रतिशत का अनुपालन स्कोर मिला था. कोर्ट ने FDA को कारोबारी को हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया.

लेकिन इस आदेश का भी मुंढे पर कोई असर नहीं पड़ा.

फैसले के एक दिन बाद उन्होंने अपने खास अंदाज़ में कहा, “हम अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे…हम जो कहते हैं, उस पर कायम हैं.”

मुंढे के लिए अपनी भूमिका निभाना उस पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने गुप्ता से कहा, “मैं अपनी नौकरी को परिभाषित नहीं करता. मैं इस पद से जुड़ी भूमिका निभाने की कोशिश करता हूं.”

व्यक्त विचार निजी हैं.

(इस न्यूज़मेकर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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