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Monday, 19 January, 2026
होममत-विमतGST से कार बिक्री बढ़ी, पर शहरों में जाम और प्रदूषण भी बढ़ा. निजी गाड़ियों पर टैक्स लगाना जरूरी है

GST से कार बिक्री बढ़ी, पर शहरों में जाम और प्रदूषण भी बढ़ा. निजी गाड़ियों पर टैक्स लगाना जरूरी है

भारत का शहरी संकट तब तक खत्म नहीं होगा जब तक शहर भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्राइविंग को महंगा नहीं बना देते.

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भारत की कई नीतिगत असफलताओं में सार्वजनिक परिवहन को निजी परिवहन पर प्राथमिकता न देना निश्चित रूप से सबसे बड़ी असफलताओं में से एक है. कैलेंडर वर्ष 2025 में, वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती के कारण, भारत में 45 लाख चार पहिया वाहन और 2 करोड़ से अधिक दो पहिया वाहन खरीदे गए. इससे ऐसे समय में शहरी जाम और प्रदूषण बढ़ा, जब शहरों में रहने की स्थितियां पहले से ही खराब हो रही हैं.

सीधे शब्दों में कहें तो, GST सुधारों ने भले ही ऑटोमोबाइल उद्योग की असेंबली लाइनों को राहत दी हो, लेकिन इसका एक स्पष्ट नकारात्मक पहलू भी है. इसका यह मतलब नहीं है कि टैक्स में कटौती नहीं की जानी चाहिए थी, बल्कि यह कि लोगों को निजी परिवहन पर ज्यादा निर्भर होने के लिए मजबूर करने के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों से निपटना अब एक तात्कालिक जरूरत है.

निजी वाहनों पर टैक्स लगाने के दो तरीके हैं. एक, स्रोत पर अप्रत्यक्ष करों के जरिए, जैसे GST. दूसरा, स्थानीय स्तर पर पंजीकरण शुल्क, ज्यादा पार्किंग फीस और टोल के जरिए.

हाईवे पर टोल आम बात है, लेकिन शहरों के भीतर टोल नहीं होते, जबकि जाम और प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं का सबसे ज्यादा बोझ शहरों पर ही पड़ता है.

अब समय आ गया है कि भारतीय शहरों में कंजेशन सरचार्ज लगाया जाए और पुराने वाहनों के लिए वार्षिक फिटनेस सर्टिफिकेशन फीस बढ़ाई जाए, खासकर उन वाहनों के लिए जो 10 साल से अधिक पुराने हैं और या नए वाहनों की तुलना में ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं.

भीड़भाड़ वाले शहरों में प्रवेश करने वाले कारों और दो पहिया वाहनों से शुल्क वसूलने के लिए जरूरी ढांचा और उपकरण पहले से ही मौजूद हैं, जो फास्टैग के रूप में हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की योजना है कि 2026 के अंत तक टोल नाकों पर रुकावट से बचने के लिए जीपीएस आधारित टोल प्रणाली लागू की जाए. इसी के साथ व्यस्त शहरी इलाकों में कंजेशन सरचार्ज आसानी से लगाया जा सकता है.

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए, ताकि कंजेशन सरचार्ज लगाया जा सके और बहुत पुराने या अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए फिटनेस और पंजीकरण शुल्क में हर साल बढ़ोतरी की जा सके.

GST लागू होने का एक बड़ा नकारात्मक पहलू यह है कि शहरों ने राजस्व के मामले में लचीलापन खो दिया है. ऑक्ट्रॉय और एंट्री टैक्स जैसे कर GST में समाहित हो गए हैं, और अब नगर निगमों को राजस्व अनुदान के लिए राज्य सरकारों पर निर्भर रहना पड़ता है.

कंजेशन सरचार्ज लागू होने से नगर निकायों को कुछ हद तक राजस्व में लचीलापन मिलेगा, खासकर अगर इस धन का उपयोग सार्वजनिक परिवहन को सब्सिडी देने में किया जाए. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से घरेलू वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, क्योंकि निजी वाहनों पर खर्च कम हुआ है. इलेक्ट्रिक बसों और ईंधन-कुशल सार्वजनिक परिवहन को जोड़ने से यह बचत और बढ़ सकती है.

स्थानीय निकाय स्तर पर निजी वाहनों पर ज्यादा टैक्स लगाने का मामला पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है. अगर हम ऐसे वाहनों की बिक्री पर पहले की तुलना में काफी कम टैक्स लगा रहे हैं, तो भीड़भाड़ वाले इलाकों में, जहां पार्किंग की जगह कम है और प्रदूषण पहले से ज्यादा गंभीर समस्या है, उनके उपयोग पर ज्यादा टैक्स न लगाने की कोई वजह नहीं है.

आर. जगन्नाथन, स्वराज्य मैगज़ीन के पूर्व संपादकीय निदेशक हैं. वह @TheJaggi हैंडल से ट्वीट करते हैं. व्यक्त विचार  निजी हैं.

यह लेख पहले उनके पर्सनल ब्लॉग पर पब्लिश हुआ था.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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