तमिलनाडु की राजनीति में एक्टर्स की लोकप्रियता का दबदबा कायम हो गया है. यह पकड़ TVK नेता विजय ने बनाई है. विजय तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मकसद यह साबित करना है कि बिना द्रविड़ विचारधारा वाली कोई पार्टी भी राज्य को सफलतापूर्वक चला सकती है. आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति बड़े पर्दे के सितारों की लोकप्रियता के इर्द-गिर्द घूम सकती है.
विजय की रणनीति दो हिस्स हैं. पहला, दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को DMK के पहले परिवार के नियंत्रण से बाहर निकालना. वह आरोप लगाते हैं कि रेड जाइंट मूवीज़ (Red Giant Movies) प्रोडक्शन और फाइनेंस से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज को प्रभावित करती है. वह यह भी आलोचना करते हैं कि सिनेमा हॉल्स पर अपनी पसंद के हीरो और हीरोइन वाली उनकी फिल्में दिखाने का दबाव रहता है. दूसरा, राजनीतिक रूप से DMK को किनारे करना.
इस मिशन को पूरा करने का एक और असर हुआ है. विजय के साथ काम करने वाले दूसरे हीरो भी अब “अन्ना” यानी बड़े भाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, ताकि DMK के पहले परिवार पर उनकी निर्भरता कम हो. डिजिटलाइजेशन का बढ़ना भी इसमें मददगार रहा है. खास तौर पर OTT और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए, और खासकर विजय के लिए, इंडस्ट्री के अंदर अपने विरोधियों को चुनौती देना आसान बना दिया है.
45 साल से ज्यादा उम्र के कई फिल्मी हीरो अचानक फिल्मी दुनिया से थोड़ा दूर होकर तमिल समाज की सेवा की ओर बढ़ रहे हैं. इनमें अजित कुमार, धनुष, विजय सेतुपति, सूर्या, शिवकार्तिकेयन, सरथकुमार, कार्थी और विक्रम जैसे नाम शामिल हैं. वे बड़े स्तर पर सामाजिक कल्याण के काम कर रहे हैं. उनका ध्यान शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों पर है. वे दूर-दराज के गांवों में उपेक्षित और गरीब परिवारों को आर्थिक मदद भी दे रहे हैं.
हां, यही वे हीरो हैं जो कभी पर्दे पर विजय के साथ मुकाबला करते थे. अब वे गरीबों की सच्चे मन से सेवा करने में विजय के दिखाए आक्रामक रुख को ही अपना रहे हैं.
1990 के दशक के आखिर में भी, जब पुराने दौर के सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन का दबदबा था, विजय अकेले ऐसे अभिनेता थे जो छात्रों को कॉलेज की पढ़ाई करने में मदद करते थे. इससे नए लोगों को प्रेरणा मिली. फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले कई नए लोग अब अपने फैन क्लबों के जरिए राजनीति में कदम रख रहे हैं और खुद सामाजिक कल्याण के काम कर रहे हैं. कोलिवुड की यह नई पीढ़ी न सिर्फ द्रविड़ विचारधारा को राजनीतिक कहानी से बाहर रखना चाहती है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के प्रवेश को भी रोकना चाहती है. क्या आने वाले वर्षों में तमिलनाडु सिनेमा के प्रति दीवानगी की राजनीति की ओर बढ़ेगा?
एमके स्टालिन और एडप्पाडी पलानीस्वामी जैसे बड़े राजनीतिक नेता और उनकी पार्टियों के पदाधिकारी अगर बड़े पर्दे के अभिनेता राजनीति पर कब्जा कर लेते हैं, तो बेरोजगार होने के खतरे में पड़ सकते हैं. DMK और AIADMK के कुछ बड़े नेता पहले से ही चिंतित हैं. अगर TVK की सरकार स्थिर हो जाती है, तो पारंपरिक राजनीतिक मंच सिकुड़ सकते हैं और उनकी जगह फिल्मी हीरो ले सकते हैं.
विजय ने तमिलनाडु की राजनीति को कैसे बदला
1972 में एमजी रामचंद्रन (MGR) के राजनीति में आने और तुरंत अपनी पार्टी बनाने के कई दशकों बाद, अभिनेता से नेता बने विजय ने 2 फरवरी 2024 को आधिकारिक रूप से अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) शुरू की. MGR ने 17 अक्टूबर 1972 को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) बनाई थी और इसे गरीबों के कल्याण और द्रविड़ सिद्धांतों के आधार पर खड़ा किया था. क्या फिल्मी लोगों के राजनीति में आने की यह बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि 60 साल पुरानी द्रविड़ विचारधारा की चमक अब कम हो रही है?
क्या द्रविड़ और हिंदुत्व, दोनों विचारधाराओं को सिनेमा से जुड़ी इस बढ़ती संस्कृति के कारण झटका लगेगा?
इस कहानी का जवाब साफ तौर पर हां है.
1920 और 1930 के दशक में मद्रास प्रेसिडेंसी में जस्टिस पार्टी, जिसे आधिकारिक तौर पर साउथ इंडियन लिबरल फेडरेशन कहा जाता था, की मूल विचारधारा गैर-ब्राह्मणों के उत्थान, सामाजिक न्याय और समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने पर आधारित थी.
लेकिन द्रविड़ राजनीति का कमजोर होना तब शुरू हुआ जब ईवी रामासामी (पेरियार) ने द्रविड़ कड़गम बनाया. इसके बाद और गिरावट तब आई जब DMK के संस्थापक नेता सीएन अन्नादुरई राज्यसभा के लिए चुने गए और उन्होंने अलग देश की मांग छोड़ दी.
1972 में एमजी रामचंद्रन ने AIADMK बनाई और द्रविड़ राजनीति में भगवान की पूजा को भी जगह दी. जयललिता, जो एक ब्राह्मण चेहरा थीं, ने अपने कार्यकाल के दौरान द्रविड़ सिद्धांतों को और पीछे कर दिया. M करुणानिधि के निधन के बाद एमके स्टालिन के कार्यकर्ता मंदिरों में जाने लगे. अब TVK के विजय ने पुराने द्रविड़ विचारों की बची हुई सीमाओं को भी खत्म कर दिया है.
विजय ने अपनी पार्टी के मुख्य प्रशासन में दो ब्राह्मण चेहरों को भी शामिल किया है.
TVK के आधिकारिक नीति दस्तावेज एक आध्यात्मिक रुख को स्वीकार करते हैं, जिसमें किसी ऊंची शक्ति में विश्वास की बात है. यह पारंपरिक नास्तिक द्रविड़ विचारधारा की लगभग एक सदी पुरानी सोच से साफ अलग बदलाव है.
क्या यह बदलाव भविष्य के फिल्मी हीरो को सीधे हिंदुत्व की राजनीति की ओर जाने के लिए प्रेरित करेगा?
इसका एक सटीक उदाहरण रजनीकांत हैं. अपने पूरे करियर में उनका झुकाव कई बार दक्षिणपंथी “आध्यात्मिक राजनीति” की ओर दिखाई दिया है. इस वजह से लोगों के बीच उनके हिंदुत्व से जुड़े रुख को लेकर कई बार असमंजस रहा है. इसी तरह का सांस्कृतिक बदलाव उनके पूर्व दामाद धनुष में भी दिखाई देता है, जो बड़े स्तर की एक्शन फिल्म ओम में काम कर रहे हैं. धनुष का सार्वजनिक रूप से अभिवादन करने का एक आम तरीका “ॐ नमः शिवाय” कहना रहा है.
आप इस बात को मानें या अलग नजरिया रखें, और चाहे जो भी अनुमान लगाए जाएं, एक बात तय है. करिश्माई नेता विजय ने सिर्फ अपने साथी हीरो की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को नहीं बदला है, बल्कि तमिलनाडु के विचारधारात्मक ढांचे को भी बदल दिया है.
आर. राजगोपालन सीनियर पत्रकार पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं. वे @RAJAGOPALAN1951 पर ट्वीट करते हैं. विचार निजी हैं.
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