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Thursday, 8 October, 2026
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16 हज़ार रुपये का ट्रेल, 2 बाइक और 4 हथियारों से खुला Mad Sandhu हत्याकांड का राज

LGBTQ+ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मधुसूदन संधू, जिन्हें Mad Sandhu के नाम से जाना जाता था, की पिछले हफ्ते अमृतसर में एक गैराज के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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नई दिल्ली: सौलह हज़ार रुपये के पैसे के ट्रेल से पंजाब पुलिस को LGBTQ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मधुसूदन संधू के मर्डर में शामिल मुख्य शूटर तक पहुंचने में मदद मिली. मधुसूदन संधू को Mad Sandhu के नाम से जाना जाता था और पिछले हफ्ते अमृतसर में एक गैराज के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

अमृतसर के पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल के मुताबिक, यह पैसा मुख्य शूटर के बड़े भाई के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. मुख्य शूटर की पहचान परमिंदर उर्फ काका के रूप में हुई है. यह पैसा विदेश में बैठे एक गैंगस्टर के नेटवर्क के जरिए भेजा गया था.

उन्होंने कहा कि पुलिस ने शूटरों की पहचान करने के बाद पैसे के ट्रेल की जांच की. दूसरे शूटर की पहचान अभी सामने नहीं आई है. पुलिस ने शूटरों और उनके रिश्तेदारों से जुड़े बैंक अकाउंट की भी जांच की. इसी जांच से पुलिस काका के बड़े भाई अमनदीप सिंह तक पहुंची.

गिल ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भाई ने इस पैसे में से 11 हज़ार रुपये काका को दिए, जबकि बाकी पैसा हमले में शामिल एक दूसरे व्यक्ति को गया.

हमले के बाद काका गुजरात भाग गया. पंजाब में उसके खिलाफ पांच मामले दर्ज हैं.

गिल ने कहा कि जब काका ने अपने भाई से और पैसे मांगे, तो उसे उसके भाई के फोन से भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए कहा गया और वह इस जाल में फंस गया. तब तक अमनदीप सिंह पुलिस की हिरासत में था. उन्होंने कहा कि इससे पुलिस को गुजरात में काका की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिली.

गिल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “उसने पैसे के लिए अपने भाई से संपर्क किया, लेकिन उसे पता नहीं था कि उसका बड़ा भाई पहले ही पुलिस की हिरासत में है.” गिल ने कहा, “उसे भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए तैयार किया गया, जिससे उसकी लोकेशन के बारे में पक्की जानकारी मिली.”

काका को बुधवार शाम अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया. अमृतसर पुलिस की एक टीम उसकी हिरासत लेने के लिए गुजरात पहुंच गई है. अमृतसर पुलिस ने अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें वे दो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने 3 अक्टूबर के हमले से पहले के कुछ दिनों में कथित तौर पर संधू की गतिविधियों पर नज़र रखी थी.

गिल ने कहा कि दूसरे शूटर की पहचान हो चुकी है, लेकिन वह अभी फरार है.

इंस्टाग्राम पर संधू के 2.29 लाख फॉलोअर्स थे. वह LGBTQ समुदाय के मुखर सदस्य थे. कुछ रूढ़िवादी समूह अक्सर उनकी आलोचना करते थे और उन्हें धमकाते थे. इन समूहों का दावा था कि उनके “गलत प्रभाव” की वजह से “लड़के गे हो रहे थे”.

संधू को शाम करीब 6 बजे अमृतसर के लोहड़का रोड पर गोली मारी गई. वह एक गैराज में अपनी एसयूवी धुलवाने के लिए इंतज़ार कर रहे थे. इस सनसनीखेज हत्या के बाद सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर गुस्सा और विरोध देखने को मिला.

हत्या के कुछ ही घंटे बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई. इसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्य गोल्डी ढिल्लों से जोड़ा गया. पोस्ट में संधू को राज्य के युवाओं पर बुरा प्रभाव डालने के लिए जिम्मेदार बताया गया.

अमृतसर पुलिस प्रमुख गिल ने संधू की हत्या में ढिल्लों की भूमिका की पुष्टि की. हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरे नेटवर्क का पता सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही चलेगा.

गिल ने कहा, “फिलहाल यह साफ है कि ये आरोपी गोल्डी ढिल्लों से जुड़े हुए हैं. हम यह पता लगा रहे हैं कि उसके कौन-कौन से साथी हैं और इस हत्या में उसके साथ किसने काम किया. हम इस गैंग के दूसरे नेटवर्क पर भी काम कर रहे हैं, जो इस मामले से बाहर हैं. उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा.”

गिल ने हत्या के पीछे की सटीक वजह नहीं बताई. उन्होंने कहा, “फिलहाल ऐसा लगता है कि यह बदनामी और नाम कमाने के लिए की गई हत्या का मामला है. ये गैंगस्टर इस तरह की हत्याएं करके इलाके में अपना नाम बनाना चाहते हैं. वे लोगों और इलाके के कारोबारियों के मन में डर और दहशत पैदा करना चाहते हैं, ताकि लोग उन्हें बुलाएं और वे उनसे पैसे वसूल सकें.”

पैसों का ट्रेल

गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हमले में शामिल शूटरों की पहचान होने के बाद तीन अधिकारियों की टीम ने उनसे जुड़े पैसों के लेन-देन की जांच की. इस टीम का नेतृत्व डीसीपी (Investigation) प्रभजोत विर्क, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सिरीवेनेला और डीसीपी (City) जसकीरनजीत सिंह तेजा कर रहे थे.

पैसों के लेन-देन की जांच के दौरान पुलिस जांचकर्ताओं को काका के बड़े भाई अमनदीप तक पहुंचने में मदद मिली. अमनदीप जालंधर के लोहियां खास गांव का रहने वाला है.

गिल ने आगे कहा, “जांच में पता चला कि अमनदीप के बैंक अकाउंट में 16 हजार रुपये आए थे. इनमें से 11 हजार रुपये उसके भाई काका को दिए गए, जिसने हत्या को अंजाम दिया, जबकि 5 हजार रुपये उसी इलाके के एक दूसरे व्यक्ति को दिए गए.”

गिल ने आगे बताया कि एक तीसरे व्यक्ति को भी पैसे दिए गए थे. उसकी पहचान परमवीर सिंह के रूप में हुई है, जिसने हत्या के लिए हथियारों का इंतजाम किया था.

जांच के तहत पुलिस बालराज सिंह और विकास सिंह तक भी पहुंची. दोनों आसपास के गांवों के रहने वाले हैं और कथित तौर पर संधू की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे.

गिल ने कहा, “यह किसी एक खास दिन की रेकी नहीं थी. इसके बजाय स्थानीय स्तर पर ये दोनों लगातार किसी न किसी बहाने उसका पीछा कर रहे थे और उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे.”

पुलिस ने तरन तारन के रहने वाले बलजिंदर सिंह को भी गिरफ्तार किया. उस पर हत्या में इस्तेमाल हथियारों और एक पल्सर बाइक का इंतजाम करने का आरोप है.

गिल ने कहा, “परवीर और बलजिंदर, दोनों ने हथियारों का इंतजाम किया था. साजिश में चार हथियारों के साथ दो बाइक का इस्तेमाल किया गया था. दूसरे शूटर की गिरफ्तारी के बाद तस्वीर और साफ होगी. उसकी गिरफ्तारी अब बस समय की बात है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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