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Friday, 9 October, 2026
होममत-विमतFlyDubai के पायलट जैसे 'लोन वुल्फ' आतंकियों का जब मकसद अनसुलझा रह जाता है तब शहीद बना दिए जाते हैं

FlyDubai के पायलट जैसे ‘लोन वुल्फ’ आतंकियों का जब मकसद अनसुलझा रह जाता है तब शहीद बना दिए जाते हैं

FlyDubai के पायलट अल-हम्मामी के बारे में सच्चाई को अनसुलझा छोड़ने से मनगढ़ंत बातें बनाने वालों को उन्हें शहीद का दर्जा देने का मौका मिल जाता है.

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ग्यारह बार, फर्स्ट ऑफिसर गमील अल-बतूती ने बहुत धीमी आवाज में ये शब्द कहे, जब EgyptAir 990 का ऑटोपायलट बंद हो गया और बोइंग 767-300 समुद्र की तरफ लगभग आवाज की रफ्तार से नीचे गिरने लगा – “तवक्कल्तु अला अल्लाह” यानी मैं अल्लाह पर भरोसा करता हूं.

पहले की गई रिसर्च से विशेषज्ञ जानते थे कि जब अल-बतूती घबराहट की स्थिति में पहुंचता और सोचने-समझने तथा काम करने की क्षमता खोने लगता, तो उसकी आवाज का सुर ऊपर जाना चाहिए था और बोलने की रफ्तार तेज होनी चाहिए थी. लेकिन उन्होंने पाया कि “इस वाक्य को बार-बार एक ही लय में दोहराया गया, इसकी रफ्तार बढ़ती नहीं गई.” “तवक्कल्तु अला अल्लाह.” इस वाक्य का हर दोहराव शांत था, जबकि विमान का ढांचा टूटने लगा था और रिकॉर्डिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था.

जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फर्स्ट ऑफिसर हम्माम अल-हमामी ने तेल अवीव जा रही FlyDubai की फ्लाइट FZ1073 को लगभग सफलतापूर्वक दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश क्यों की. ऐसे में 1999 का EgyptAir मामला एक गंभीर चेतावनी देता है. हो सकता है कि हमें सच्चाई कभी पता ही न चले. अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने कहा था कि अल-बतूती ने जानबूझकर विमान को तेजी से नीचे गिराया था, लेकिन वह “फर्स्ट ऑफिसर के इस कदम के पीछे की वजह” पता नहीं कर सका.

इसमें बहुत कम शक है कि अल-हमामी विमान में सवार सभी 172 लोगों को मारने से कुछ ही सेकंड दूर था. लेकिन उसने ऐसा फैसला क्यों लिया, यह साफ नहीं है. रिपोर्टों के मुताबिक, 2024 में उसे ओमन एयर के ट्रेनी पायलट के रूप में उड़ान की ड्यूटी से हटा दिया गया था, क्योंकि उसके पास जिहादी साहित्य मिला था. ऐसी अटकलें हैं कि अल-हमामी ने गाजा में युद्ध का बदला लेने के लिए इजरायल को निशाना बनाया, लेकिन जांचकर्ताओं ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है.

कुछ कहानियां पहली नज़र में जितनी आसान लगती हैं, असल में उतनी आसान नहीं होतीं. इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिका ने सैन्य मनोचिकित्सक निदाल हसन को 2009 में 13 लोगों की हत्या के लिए फायरिंग स्क्वाड से मौत की सजा सुनाई. मारे गए लोगों में गर्भवती बम निष्क्रिय करने वाली विशेषज्ञ फ्रांसेस्का वेलेज भी शामिल थीं. यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार था जब इस तरह की सजा दी गई. हसन ने अपनी कार्रवाई को अमेरिकी युद्ध अपराधों का बदला बताने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत में उसकी यह बात सुनी ही नहीं गई.

हालांकि अल-हमामी जैसे अकेले आतंकी वास्तव में अकेले नहीं होते. उनकी बातें सुनी जाती हैं. उनके काम, एक तरह से, करोड़ों लोगों के गुस्से और कल्पनाओं को दिखाते हैं. जिहादियों की बेवजह खून बहाने की इच्छा के बारे में आसान और घिसी-पिटी बातें गाजा में चल रहे नरसंहार जैसे युद्ध और उसे रोकने में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाकामी के कारण मुसलमानों में पैदा हुई निराशा को समझने में कोई मदद नहीं करतीं. अल-हमामी के बारे में सच्चाई को अनसुलझा छोड़ देना उन लोगों को मौका देता है जो कहानी गढ़ते हैं और उसे शहीद के रूप में पेश कर सकते हैं.

वह असहनीय सच्चाई

13 लोगों को गोली मारकर हत्या करने के कुछ समय बाद अस्पताल के बिस्तर पर पड़े हॉवर्ड अनरूह ने बताया कि उसने ऐसा क्यों किया. उसकी नस में शक्तिशाली दवा सोडियम अमाइटल दी जा रही थी. रिकॉर्ड किए गए अमेरिकी इतिहास के पहले अच्छी तरह दर्ज किए गए सामूहिक हत्यारे के बारे में मनोचिकित्सक रिचर्ड गार्बर ने लिखा कि वह अपनी मां के साथ यौन संबंध बनाना चाहता था और उसी समय उससे नफरत भी करता था. बाद में उसने डॉक्टरों से कहा कि वह अपनी मां को “हर चीज के लिए दोषी मानता है, उसे दबाने, उसे बच्चे की तरह रखने के लिए.” अमेरिका में सिगमंड फ्रॉयड के प्रभाव के चरम दौर में काम कर रहे मनोचिकित्सकों के लिए यह विश्लेषण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण सामग्री थी.

इससे भी अच्छी बात यह थी कि इस कहानी के आधार पर उसे मानसिक रूप से बीमार बताया जा सकता था, इसलिए उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था. अनरूह एक समलैंगिक सैनिक और युद्ध का नायक था, जिसे समलैंगिकता के कारण भेदभाव और नफरत झेलनी पड़ी थी. अमेरिका उस समय उसकी कहानी सुनने के लिए तैयार नहीं था. वह सम्मानित पूर्व सैनिक था और बैटल ऑफ द बल्ज में टैंक गनर रह चुका था. घर लौटने के बाद उसकी लैंगिक पहचान को लेकर उसे लगातार शर्मिंदा किया जाता रहा. उसके एक दोस्त ने बाद में याद किया कि सड़क पर लोग उसे “नैंसी बॉय”, “गर्ली”, “पैंसी” और “फेयरी” जैसे नामों से चिढ़ाते थे.

फोर्ट हूड में अपने साथियों की हत्या करने वाले अमेरिकी सैन्य मनोचिकित्सक निदाल हसन की कहानी बताती है कि कुछ हत्यारों को हीरो क्यों माना जाता है. हसन ने अपनी कानूनी टीम को हटा दिया. ऐसा लगता है कि वह अपनी कार्रवाई को अवैध अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ इस्लाम की वैध रक्षा के रूप में पेश करना चाहता था. जज ने इस तर्क को खारिज कर दिया और इसके बाद हसन ने अदालत में लगभग कुछ नहीं कहा.

लेकिन FN Five-seveN पिस्तौल से गोलियां चलाने से 72 घंटे से भी कम समय पहले हसन ने अपने उन सैनिक मरीजों द्वारा इराक और अफगानिस्तान में किए गए युद्ध अपराधों की जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देने की अनुमति मांगी थी. उसके तत्काल वरिष्ठ अधिकारी नाओमी सुरमन ने कहा कि उसने पिछले महीने भी उनसे ऐसी ही अपील की थी, लेकिन उन्हें डॉक्टर और मरीज के बीच गोपनीयता के सख्त नियमों की याद दिलाई गई थी.

फोर्ट हूड हत्याकांड के 11 महीने बाद लीक हुए दस्तावेजों से पता चला कि अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाओं ने अपने इराकी सहयोगियों को बलात्कार, यातना और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या के मामलों में छूट दी थी, आत्मसमर्पण कर रहे विद्रोहियों के खिलाफ हवाई ताकत का इस्तेमाल किया था और ऐसे युद्ध की निगरानी की थी जिसमें 66,000 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए थे.

एक मकसद के लिए हत्या

“मुझे भगवान जैसा महसूस होता है,” 18 साल के एरिक हैरिस ने उस समय लिखा था, जब अपने दोस्त डायलन क्लेबोल्ड के साथ स्कूल के गलियारे में जाकर 13 लोगों की हत्या करने और फिर खुद को गोली मारने से सिर्फ तीन हफ्ते पहले की बात थी.

हैरिस ने आगे लिखा, “हर कोई मेरे रूप, मेरी कमजोरी और बाकी चीजों के कारण मेरा मजाक उड़ाता है, लेकिन मैं तुम सब से बदला लूंगा.”

फिर उसने कुछ सोचते हुए लिखा, “मेरे अंदर लगभग कोई आत्मसम्मान नहीं है, खासकर लड़कियों, अपने रूप और ऐसी चीजों को लेकर.” शोधकर्ता जेनिफर मरे ने कहा कि जिन सामूहिक हत्यारों का उन्होंने अध्ययन किया, उनके लिए हिंसा एक बहुत अलग और गहरी अनुभूति थी. यह अपनी ताकत और फैसले लेने की क्षमता की कल्पनाओं को सच करने का एक तरीका था.

एक सामान्य छात्र, एक ईमानदार लेकिन सामान्य अधिकारी और बहुत ज्यादा धार्मिक भी नहीं रहने वाला व्यक्ति, हसन की खुद को भगवान जैसा समझने की यात्रा शायद 2001 की गर्मियों में शुरू हुई, जब उसकी मां हन्नान हसन, जिन्हें उनके दोस्त नोरा कहते थे, की मौत हो गई. हसन परिवार धार्मिक रूप से सिर्फ नाम भर का था, लेकिन युवा सैनिक की दुनिया को देखने की सोच धीरे-धीरे बदलने लगी. 11 सितंबर के हमलों के बाद बने तनावपूर्ण सामाजिक माहौल ने भी इसे प्रभावित किया.

अकेला और चिंतित हसन एक वेबसाइट से दूसरी वेबसाइट और एक धर्मगुरु से दूसरे धर्मगुरु के पास जाता रहा. उसे डर था कि उसकी मां को नरक में भेज दिया जाएगा क्योंकि उनकी किराने की दुकान पर शराब बेची जाती थी. इस मामले का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि वह अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, जो उस एकमात्र समुदाय से जुड़ी हो जो उसे अपने लिए खुला हुआ दिखाई देता था. जिन लोगों से वह मिला, उनमें अनवर अल-अवलाकी भी था. वह वर्जीनिया के फॉल्स चर्च में दार अल-हिजरा मस्जिद का इमाम था और अल-कायदा का भर्तीकर्ता था. उसने उमर फारूक अब्दुलमुतल्लब, फैसल शहजाद और रोशनारा चौधरी जैसे आतंकियों को प्रभावित किया था.

असल में अल-अवलाकी के साथ हसन का संबंध मीडिया रिपोर्टों में बताए गए संबंध से कम गहरा था. FBI अधिकारी वेड एकरमैन की अब सार्वजनिक की गई गवाही से हमें पता चलता है कि अल-अवलाकी अमेरिका से तब भाग गया था, जब उसे चेतावनी दी गई कि FBI उसके सेक्स वर्कर्स के इस्तेमाल के बारे में पूछताछ कर रही है. उसे डर था कि उसके रूढ़िवादी धार्मिक समुदाय के सामने यह बात सामने आ जाएगी.

2008 के आखिर में, जब FBI अधिकारी उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे, हसन ने अल-अवलाकी को करीब 20 ईमेल भेजे. उसने उसके सम्मान में एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित करने की पेशकश की और धार्मिक सवाल पूछे. FBI ने कुछ नहीं किया क्योंकि वह अल-अवलाकी को खतरा नहीं मानती थी. दस्तावेजों से पता चलता है कि एजेंसी खुद भी उसके साथ लंबे समय तक बातचीत करती रही थी और 2007 में यमन की एक जेल में उससे मिली थी. CIA ने सिर्फ 2009 में यह माना कि अल-अवलाकी एक आतंकी था और उसकी हत्या की अनुमति लेने की कोशिश की.

इस दौरान हसन लगातार ज्यादा कट्टर होता गया. वह इस्लाम को लेकर परिवार के लोगों से झगड़ने लगा, महिला सहकर्मियों का अपमान करने लगा और एक सहकर्मी से कहा कि वह नरक में जाएगी क्योंकि वह मुस्लिम नहीं है. उसे यह भी विश्वास होने लगा कि उसका धर्म और उसके देश के प्रति उसकी वफादारी एक साथ नहीं चल सकते. लेकिन उसकी कट्टरता हिंसा में नहीं बदली, जब तक कि उसकी निजी मानसिक परेशानियां एक बड़े मकसद से नहीं जुड़ गईं.

काल्पनिक दुश्मन

EgyptAir विमान हादसे के 27 साल बाद, साजिश की कहानियों ने उस जगह को भर दिया है, जहां तथ्यों की जगह होनी चाहिए थी. राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सरकार ने मध्य पूर्व में अपने एक राजनीतिक सहयोगी का सामना करने का फैसला नहीं किया और पायलट की FBI जांच को धीरे-धीरे खत्म होने दिया. इस बात की कभी जांच नहीं की गई कि क्या अल-बतूती इस आरोप से गुस्से में था कि उसने होटल की एक महिला कर्मचारी के साथ गलत व्यवहार करने की कोशिश की थी और किशोरों के सामने खुद को गलत तरीके से दिखाया था. मिस्र के राष्ट्रवादियों ने अल-बतूती को अमेरिकी साम्राज्यवाद का शिकार बताया और इस्लामवादियों ने उसे शहीद बताया, जबकि श्वेत राष्ट्रवादियों ने दावा किया कि पायलट की आत्महत्या धार्मिक आतंकवाद का एक कृत्य थी.

अमेरिका की निराशाजनक रूप से गहरी नफरत की संस्कृति को देखते हुए, मानवविज्ञानी ह्यू गस्टरसन ने सामूहिक हत्या को मशहूर तौर पर एक “तरह की रोर्शाक इंकब्लॉट” बताया, जिसमें लोग वही देखते हैं जिससे वे डरते हैं या जो वे देखना चाहते हैं. बहुत कम लोगों ने यह पूछने की कोशिश की कि उनके देश, उनके समुदाय या उन्होंने खुद हिंसा के लिए माहौल बनाने में किस तरह मदद की थी.

FZ1073 के पायलटों और यात्रियों के साहस ने आतंकवाद की उस भयावह घटना को रोक दिया, जो लगभग निश्चित रूप से पूरे मध्य पूर्व में चल रहे युद्धों को और भड़का देती. लेकिन उन युद्धों को खत्म करने के लिए क्षेत्र के नेताओं को यह स्वीकार करना होगा कि अल-हमामी उन्हीं जहरीले बीजों से पैदा हुआ था, जिन्हें उन्होंने खुद बोया है.

प्रवीण स्वामी ‘दिप्रिंट’ में कंट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं. उनका X हैंडल @praveenswami है. विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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