संदीप अध्वर्यु | द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया
Text Size:

आज के चित्रित कार्टून में संदीप अध्वर्यु भारतीय अर्थव्यवस्था की पिछड़ी स्थिति और पेगासस हैकिंग कांड और हाल ही में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और ओबीसी को दिए गए आरक्षण को दर्शाते हैं.

संदीप अध्वर्यु | द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया

एक अन्य कार्टून में, अध्वर्यु इस साल की शुरुआत में विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस और उसके खराब प्रदर्शन पर कटाक्ष करते हैं और उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव के लिए उनकी तैयारी पर टिप्पणी करते हैं.

साजिथ कुमार | डेक्कन हेराल्ड

साजिथ कुमार ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को भारत के विकास में एक “प्रमुख” कारक और देश में व्याप्त बड़े पैमाने पर बेरोजगारी को दर्शाया है.

पी महमूद | ट्विटर @cartoonist_PM

पी. महमूद उन चुनौतियों का चित्रण करते हैं, जिनका कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को सामना करना पड़ेगा, जिसमें भाजपा आलाकमान, पूर्व 78 वर्षीय सीएम बी.एस. येदियुरप्पा, खराब अर्थव्यवस्था और कोविड है.

ई.पी. उन्नी | इंडियन एक्सप्रेस

ई.पी. उन्नी राष्ट्रीय मामलों के विपरीत सत्तारूढ़ दल के विदेशी मामलों को संभालने पर नाकामी का चित्रण करते हैं.

(इन कार्टून्स को अंग्रेजी में देखने के लिए यहां क्लिक करें)

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

क्यों न्यूज़ मीडिया संकट में है और कैसे आप इसे संभाल सकते हैं

आप ये इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि आप अच्छी, समझदार और निष्पक्ष पत्रकारिता की कद्र करते हैं. इस विश्वास के लिए हमारा शुक्रिया.

आप ये भी जानते हैं कि न्यूज़ मीडिया के सामने एक अभूतपूर्व संकट आ खड़ा हुआ है. आप मीडिया में भारी सैलेरी कट और छटनी की खबरों से भी वाकिफ होंगे. मीडिया के चरमराने के पीछे कई कारण हैं. पर एक बड़ा कारण ये है कि अच्छे पाठक बढ़िया पत्रकारिता की ठीक कीमत नहीं समझ रहे हैं.

हमारे न्यूज़ रूम में योग्य रिपोर्टरों की कमी नहीं है. देश की एक सबसे अच्छी एडिटिंग और फैक्ट चैकिंग टीम हमारे पास है, साथ ही नामचीन न्यूज़ फोटोग्राफर और वीडियो पत्रकारों की टीम है. हमारी कोशिश है कि हम भारत के सबसे उम्दा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बनाएं. हम इस कोशिश में पुरज़ोर लगे हैं.

दिप्रिंट अच्छे पत्रकारों में विश्वास करता है. उनकी मेहनत का सही वेतन देता है. और आपने देखा होगा कि हम अपने पत्रकारों को कहानी तक पहुंचाने में जितना बन पड़े खर्च करने से नहीं हिचकते. इस सब पर बड़ा खर्च आता है. हमारे लिए इस अच्छी क्वॉलिटी की पत्रकारिता को जारी रखने का एक ही ज़रिया है– आप जैसे प्रबुद्ध पाठक इसे पढ़ने के लिए थोड़ा सा दिल खोलें और मामूली सा बटुआ भी.

अगर आपको लगता है कि एक निष्पक्ष, स्वतंत्र, साहसी और सवाल पूछती पत्रकारिता के लिए हम आपके सहयोग के हकदार हैं तो नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें. आपका प्यार दिप्रिंट के भविष्य को तय करेगा.

शेखर गुप्ता

संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ

अभी सब्सक्राइब करें

VIEW COMMENTS