नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पी एस नरसिम्हा ने शनिवार को विवाद निवारण में मध्यस्थता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में मुकदमों की संख्या अकल्पनीय है तथा लंबित मामलों को पूरा करने में बहुत समय लगेगा।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर शपथ ग्रहण करने के बाद उन्होंने देखा कि शीर्ष अदालत में छोटे छोटे मामले भी लंबित हैं और लोग इनके निस्तारण के लिए 20-25 वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे हैं जिसका कोई अर्थ नहीं है।
वह दिल्ली उच्च न्यायालय में ‘समाधान’ या दिल्ली उच्च न्यायालय मध्यस्थता और सुलह केंद्र द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय था- ‘स्वर्णिम युग के आरंभ में मध्यस्थता’।
‘समाधान’ की स्थापना मई 2006 में की गयी थी ताकि वैकल्पिक विवाद समाधान के उचित तरीके के रूप में मध्यस्थता को प्रोत्साहित किया जा सके।
शुक्रवार को शुरू हुए दो दिवसीय आयोजन में प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के साथ ही उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल हुए।
भाषा वैभव माधव
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