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Friday, 23 October, 2026
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विश्व व्यवस्था बदल रही, कुछ लोग भारत में अव्यवस्था का सपना देख रहे: मोदी

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नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को विपक्षी दल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां एक ओर दुनिया एक ‘‘नयी व्यवस्था’’ की तलाश कर रही है, वहीं कुछ लोग भारत में ‘‘अव्यवस्था’’ का सपना देख रहे हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि श्रीहरिकोटा से एक साल में उतने रॉकेट लॉन्च नहीं होते, जितनी बार कांग्रेस अपने नेता को ‘लॉन्च’ करने की असफल कोशिशें करती है।

मोदी ने ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अपने परिवार को विफलता के कलंक से बचाने के लिए कांग्रेस भारत की उपलब्धियों पर ही सवाल उठा रही है। अंगूर खट्टे हैं वाली स्थिति है और अब कांग्रेस उस बेल को ही काटने की कोशिश कर रही है। यह परिवार अब कांग्रेस पर बोझ बन गया है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व व्यवस्था बदल रही है और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को उचित स्थान देने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है।

मोदी ने कहा, ‘‘हमें समझना होगा कि दुनिया की व्यवस्था क्यों बदल रही है। पुरानी व्यवस्था उभरती चुनौतियों का समाधान क्यों नहीं कर पा रही है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जरूरी है। ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को उचित स्थान देना आवश्यक है।’’

उन्होंने कहा कि जब वैश्विक वास्तविकताएं बदल जाती हैं, लेकिन निर्णय लेने के तरीके नहीं बदलते, तो व्यवस्था और वास्तविकता के बीच का अंतर बढ़ने लगता है।

मोदी ने कहा कि दशकों तक व्यापार ने देशों को जोड़ा, प्रौद्योगिकी ने दूरियां कम कीं, समुद्री मार्गों ने अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ा तथा संस्कृति और लोगों की आवाजाही ने विविध समाजों को करीब लाने में मदद की।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज यही संपर्क नये तनावों का सामना कर रहे हैं। व्यापार को दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा और संघर्ष का नया क्षेत्र बन रही है। समुद्री मार्ग भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र बन रहे हैं।’’

मोदी ने कहा कि इसलिए आज की चुनौती केवल नयी वैश्विक व्यवस्था के उभरने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनौती यह है कि बदलती दुनिया में ऐसी व्यवस्था कैसे बनाई जाए, जो नयी वास्तविकताओं को जगह दे, वैश्विक संस्थानों को अधिक प्रभावी बनाए और देशों के बीच सहयोग की भावना को मजबूत करे।

उन्होंने कहा, ‘‘और यहीं भारत की भूमिका का सवाल सामने आता है।’’

मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अच्छे समय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संकट के समय भी प्रभावी रहना चाहिए और इसके लिए सभी पक्षों के बीच प्रभावी सहमति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया एक ‘‘नयी व्यवस्था’’ की तलाश कर रही है, तब कुछ लोग भारत में ‘‘अव्यवस्था’’ का सपना देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज जब दुनिया में इतनी उथल-पुथल है, तब दुनिया भर में एक मजबूत भारत की छवि चमकनी चाहिए। लेकिन कुछ लोग भारत की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाने पर तुले हैं। वे विदेश जाकर देश को बदनाम करते हैं और विदेशी हस्तक्षेप की गुहार लगाते हैं।’’

मोदी ने कहा कि कोई नहीं जानता कि कांग्रेस अपने ‘‘असफल हो चुके उत्पाद’’ को फिर से ‘लॉन्च’ करने के लिए देश को और कितने समय तक दांव पर लगाए रखेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल, कांग्रेस का यह परिवार अब अपनी ही पार्टी पर बोझ बन गया है।’’

मोदी ने दावा किया कि विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता भी निजी बातचीत में यह बात स्वीकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि संसद में यह देखा जा सकता है कि विपक्ष के प्रतिभाशाली युवा सांसद बहस करना और सरकार की आलोचना करना चाहते हैं।

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन कांग्रेस सदन की कार्यवाही बाधित करती है, क्योंकि वह केवल एक व्यक्ति को सुर्खियों में बनाए रखना चाहती है। इससे विपक्ष के युवा सांसदों के साथ गंभीर अन्याय हो रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को एहसास हो गया है कि वैश्विक व्यवस्था केवल ताकत और हितों के आधार पर नहीं चलाई जा सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘संवाद जरूरी है, सहयोग आवश्यक है और विवादों का समाधान अनिवार्य है। इसी भावना ने संयुक्त राष्ट्र की नींव रखी थी।’’

मोदी ने कहा, ‘‘दशकों तक संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक सहयोग और शांति को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाई। हालांकि, समय के साथ दुनिया बदलती रही, नयी आकांक्षाएं उभरीं तथा नयी अर्थव्यवस्थाएं और नयी शक्तियां सामने आईं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थानों की ऐतिहासिक भूमिका रही है, लेकिन आज की चुनौतियों के सामने उनकी सीमाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।’’

विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि एक समय था, जब दुनिया भारत को ‘‘विश्व का बैक ऑफिस’’ कहती थी, लेकिन आज का भारत केवल सेवा प्रदाता नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए नये समाधान और प्रौद्योगिकियां विकसित करने, डिजाइन करने और नवाचार करने का काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम बड़े सपने देखेंगे, हर चुनौती को अवसर में बदलेंगे और हर संकल्प को पूरा करेंगे। हमारी ताकत हमारा आत्मविश्वास है और हमारी प्रेरणा 140 करोड़ देशवासियों के सपने हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम नवाचार करेंगे, नये रास्ते बनाएंगे, नयी ऊंचाइयों को छुएंगे और भारत की सफलता को दुनिया की सफलता से जोड़ेंगे।’’

भाषा शुभम पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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