कोटा, 10 अगस्त (भाषा) राजस्थान के कोटा में प्रसव के एक दिन बाद 34 वर्षीय महिला की अस्पताल में मौत हो गई जिसके बाद उसके परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए महिला की गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली बताया है।
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि कैथून क्षेत्र के खेड़ा रसूलपुर गांव की गंगोत्री सैनी (34) को आठ अगस्त को सरकारी अस्पताल (कैथून) से गंभीर प्रसव पीड़ा और अत्यधिक रक्तचाप की स्थिति में उनके अस्पताल में लाया गया था। उन्होंने कहा कि जांच में वह ‘हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव’ भी पाई गई।
अधीक्षक ने बताया कि उसी दिन रात करीब 11 बजे महिला ने सामान्य प्रसव के जरिए स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी ।
उन्होंने कहा कि महिला में ‘डिसेमिनेटेड इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन’ (डीआईसी) की स्थिति विकसित हो गई, जिसके कारण शरीर के कई हिस्सों से रक्तस्राव होने लगा।
उन्होंने कहा कि जब महिला को उनके अस्पताल में भेजा गया तब संबंधित चिकित्सा दस्तावेजों में ‘हेपेटाइटिस बी’ का ज़िक्र नहीं किया गया था।
शर्मा के अनुसार, वरिष्ठ चिकित्सकों ने रक्तस्राव को नियंत्रित कर महिला को स्थिर किया और उसे रक्त चढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि करीब 12 से 18 घंटे तक उसकी स्थिति स्थिर रही, लेकिन सुबह करीब 5:30 बजे अचानक उसकी हालत बिगड़ गई।
अधीक्षक ने कहा कि सीपीआर, ‘ऑक्सीजन सपोर्ट’ और वरिष्ठ चिकित्सकों, फिजिशियन तथा हृदय रोग विशेषज्ञों के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
उन्होंने बताया कि चिकित्सकों को आशंका है कि अचानक हुई मौत का कारण ‘पल्मोनरी एम्बोलिज्म’ हो सकता है, जिसमें रक्त का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है।
अधीक्षक के अनुसार नवजात बच्चा स्वस्थ और स्थिर है।
महिला के पति राकेश सैनी और अन्य परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए। राकेश ने आरोप लगाया कि आठ और नौ अगस्त की दरम्यानी रात करीब 12 बजे उनकी पत्नी को रक्तस्राव शुरू हुआ, जिसके बाद उन्होंने 10-12 यूनिट रक्त की व्यवस्था की, लेकिन चिकित्सकों ने रक्त का इस्तेमाल नहीं किया और कई अन्य जांचों में व्यस्त रहे।
उन्होंने चिकित्सा कर्मियों पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने और थप्पड़ मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया।
अस्पताल में हंगामे की सूचना पर अस्पताल प्रशासन, उपखंड अधिकारी (एसडीएम) गजेंद्र सिंह और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तथा नाराज परिजनों को समझाया। एसडीएम ने परिजनों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों पर जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नियमानुसार परिजनों को मुआवजा देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
शर्मा ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई है जिसमें एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजेता खंडवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर सुमन मीणा और जेके लोन अस्पताल के उपाधीक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा, मेडिकल बोर्ड ने महिला का पोस्टमार्टम किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
भाषा बाकोलिया राजकुमार
राजकुमार
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