नई दिल्ली: 2023 से नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत 6,822 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद, इस योजना में शामिल 83 प्रतिशत शहरों में अब भी हवा की गुणवत्ता खराब है. यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 10 अगस्त को लोकसभा में दी. यह जवाब समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज के NCAP के लिए फंडिंग से जुड़े सवाल के जवाब में दिया गया.
जवाब के अनुसार, अकेले महाराष्ट्र में NCAP के तहत शामिल सभी 19 शहरों, जिनमें मुंबई भी शामिल है, में पिछले 3 सालों से PM10 का स्तर लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों से ज्यादा रहा है. इन शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 800 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं.
पर्यावरण मंत्रालय ने 2019 में NCAP की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य 130 ऐसे ‘नॉन-अटेनमेंट’ शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारना था, जो PM10 की मात्रा के लिए तय 60 µg/m³ के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा नहीं कर पाए थे.
PM10 यानी 10 mm से कम व्यास वाले कणों को पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है. यह एक तरह का वायु प्रदूषक है, जो धूल, निर्माण सामग्री, परिवहन क्षेत्र से निकलने वाले धुएं और यहां तक कि पराग कणों से भी बढ़ता है. NCAP का खास फोकस PM10 पर है, लेकिन PM2.5 जैसे दूसरे वायु प्रदूषक भी होते हैं. PM2.5 यानी 2.5 mm से कम व्यास वाले कण, जो ज्यादा खतरनाक होते हैं.
NCAP के तहत हर शहर के लिए 2025-26 तक पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण को 40 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि, लोकसभा में MOEFCC के जवाब के अनुसार, कुल 130 शहरों में से केवल 26 शहर ही इस लक्ष्य को हासिल कर पाए हैं. वहीं, 2025-26 में सिर्फ 14 शहर, यानी इस योजना में शामिल 10 प्रतिशत से भी कम शहर, PM10 की मात्रा के लिए तय NAAQS को पूरा कर पाए.
कौन से शहर खराब प्रदर्शन कर रहे हैं?
मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, पुणे, भुवनेश्वर, अमृतसर और गुवाहाटी में 2023, 2024, 2025 और 2026 (जुलाई तक) में NAAQS के तय मानकों से PM10 का स्तर ज्यादा रहा. 2019 में यह कार्यक्रम शुरू होने के बाद से सरकार ने 130 शहरों की हवा साफ करने के लिए 16,423 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं.
आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में NCAP के तहत सबसे ज्यादा शहर शामिल हैं—क्रमशः 13, 19 और 17. महाराष्ट्र का एक भी शहर राष्ट्रीय सुरक्षित मानकों के तहत हवा की गुणवत्ता हासिल नहीं कर पाया है. वहीं, उत्तर प्रदेश के 17 में से 16 शहर भी NAAQS के मानकों से ऊपर हैं. आंध्र प्रदेश में 13 में से 8 शहर तय मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं.
इसी तरह, बिहार के योजना में शामिल सभी 3 शहर, गुजरात के सभी 4 शहर और ओडिशा के सभी 7 शहर तय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रहे हैं.
मंत्रालय के जवाब में कहा गया, “NCAP का उद्देश्य बुनियादी ढांचे, स्थानीय कार्य योजनाओं और संस्थागत व्यवस्थाओं के जरिए लगातार हवा की गुणवत्ता का प्रबंधन करना है.”
मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि किन शहरों ने मानकों को पूरा किया और कौन से शहर इसमें असफल रहे. हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सभी बड़े शहर NCAP के लक्ष्य को पूरा करने में असफल रहे और NAAQS के मानकों को पूरा करने के लिए अपने वायु प्रदूषण को कम नहीं कर पाए.
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