मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मराठवाड़ा के लातूर, सोलापुर और धाराशिव के सूखा प्रभावित तहसीलों का दौरा किया. उन्होंने वहां की स्थिति का जायजा लिया और पानी व चारे की कमी और फसल खराब होने का सामना कर रहे किसानों को सरकार की मदद का भरोसा दिया. इन इलाकों में बड़े पैमाने पर सामान्य से कम बारिश हुई है.
फडणवीस ने स्थिति को “बेहद गंभीर” बताया. उन्होंने कहा कि इन जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है और सरकार फसल के नुकसान का पंचनामा यानी आकलन शुरू करेगी. CM ने कहा कि सरकार का शुरुआती आदेश शनिवार को जारी किया जाएगा.
फडणवीस ने पत्रकारों से कहा, “स्थिति बेहद गंभीर है. लातूर और धाराशिव दो ऐसे जिले हैं, जहां इस साल सिर्फ 50 प्रतिशत बारिश हुई है. बारिश की कमी से फसलों पर बहुत बुरा असर पड़ा है, खासकर सोयाबीन की फसल पर.” उन्होंने चेतावनी दी कि पानी की कमी से पीने के पानी और पशुओं के चारे की भी समस्या पैदा होगी.
राज्य की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में 1 जून से 21 सितंबर के बीच सामान्य बारिश की 80.82 प्रतिशत बारिश हुई है. कई जिलों में बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गई है. सोलापुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां 56 प्रतिशत बारिश की कमी रही. यहां 21 से 43 दिनों तक बारिश नहीं हुई. वहीं, मराठवाड़ा के दूसरे जिलों—लातूर, धाराशिव, बीड और परभणी—में बारिश की कमी 35 से 40 प्रतिशत के बीच रही.
सरकार की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि फसलों को 60 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हो सकता है. सोयाबीन की फसल में 80-90 प्रतिशत तक गिरावट, मूंग और उड़द में भी 80-90 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान है. वहीं बाजरा, मक्का और तूर की फसल में 60-70 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है.
फडणवीस ने कहा, “किसानों के बीच परेशानी और चिंता है. लेकिन मैंने उनसे कहा है कि सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी रहेगी. हम हर संभव मदद देंगे. सूखे से राहत के लिए पैसों की कोई कमी नहीं होगी.”
फडणवीस ने इन जिलों में सूख चुकी सोयाबीन की फसलों वाले खेतों और सूखे कुओं का दौरा किया और परेशान किसानों से मुलाकात की. किसानों ने बताया कि बारिश न होने के कारण अंकुर निकलने के बाद उनकी फसलें सूख गईं.
फडणवीस ने कहा कि कानून के अनुसार स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना जरूरी है. लेकिन नुकसान साफ दिखाई दे रहा है और किसानों को बिना किसी भेदभाव के मदद दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमने सभी रिपोर्ट इकट्ठी कर ली हैं और उसी के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं. सरकार ने सूखे की स्थिति को बहुत गंभीरता से लिया है और काम शुरू कर दिया है. हम किसानों की मदद करने जा रहे हैं. हमारी कर्जमाफी योजना भी चल रही है और इसे बंद नहीं किया जाएगा. हम पानी और चारे की उपलब्धता की भी व्यवस्था कर रहे हैं.”
फडणवीस ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और इसके लिए ‘सुपर अल नीनो’ के असर को जिम्मेदार बताया. किसानों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसे किसान से मिला, जिसकी फसल शुरुआत में अच्छी तरह बढ़ी थी, लेकिन अब पूरी तरह बर्बाद हो गई है. उसके कुएं में पानी नहीं है. स्थिति बेहद गंभीर है, लेकिन सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी.”
उन्होंने कहा, “हम किसानों की कर्जमाफी को प्रभावी तरीके से लागू करने पर ध्यान दे रहे हैं. मैंने अधिकारियों को पहले ही शनिवार तक राहत को लेकर पहला सरकारी आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.”
उन्होंने आगे कहा, “किसानों के आंसू पोंछना सरकार का पहला काम है. हम निश्चित रूप से राष्ट्रीय आपदा के नियमों के तहत केंद्र से फंड मांगेंगे. हालांकि, केंद्र से पैसा आने तक किसानों को इंतजार नहीं कराया जाएगा. राज्य सरकार तुरंत अपने खजाने से मदद देना शुरू करेगी.”
फडणवीस ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीने के पानी को भी दी जाएगी, क्योंकि बारिश की कमी से भूजल स्तर और जल स्रोतों पर बहुत बुरा असर पड़ा है.
उन्होंने कहा, “अगर सिर्फ 50 प्रतिशत बारिश होती है, तो जाहिर तौर पर जलाशयों और कुओं में पानी पर इसका असर पड़ेगा.”
उन्होंने कहा, “हमने पीने के लिए पर्याप्त पानी बचाने की कोशिश की है. हमारे पास दिसंबर तक की जरूरत के लिए पानी है और हमने जून तक पानी बचाने की भी कोशिश की है. इसके बावजूद पीने के पानी का संकट होगा और हम इसकी व्यवस्था कर रहे हैं.”
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