यह पंजाब के सीमावर्ती जिलों में पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टरों पर हमलों की दो हिस्सों वाली सीरीज का दूसरा भाग है. पहली रिपोर्ट यहां पढ़ें.
नई दिल्ली: एक गैंगस्टर था. दूसरा पंजाब पुलिस का असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) था. दोनों एक ही परिवार से थे और ठीक एक महीने के अंतर पर एक ही गांव में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई. इन हत्याओं ने पंजाब के माझा क्षेत्र में गैंगों के बीच चल रही कड़वी दुश्मनी को उजागर किया है. यहां पुरानी दोस्ती जानलेवा दुश्मनी में बदल गई और पारिवारिक रिश्ते बदला लेने का जरिया बन गए.
ASI इकबाल सिंह की 11 अक्टूबर को उनके घर के पास बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इससे ठीक एक महीने पहले उनके भतीजे अजमीत सिंह की भी लगभग इसी तरह हत्या कर दी गई थी.
फिरोजपुर स्थित अपने दफ्तर से लौटते समय इकबाल ने तरनतारन से फिरोजपुर को जोड़ने वाले हाईवे के किनारे एक गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए रुककर प्रार्थना की. तरनतारन के ग्रामीण इलाके में अंधेरा छाने लगा था. घर पर उनकी पत्नी दर्शन कौर उनका इंतजार कर रही थीं, तभी एक तेज आवाज ने सन्नाटे को तोड़ दिया. घबराकर उन्होंने अपने पति को फोन किया, ताकि पता चल सके कि क्या हुआ है. लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.
गुरुद्वारे से लौटते समय इकबाल को उनके घर से कुछ ही मीटर की दूरी पर गोली मार दी गई थी.
अपने पति के भोग समारोह की तैयारियां करते हुए दर्शन ने दिप्रिंट को बताया, “मैंने यह जानने के लिए उनके मोबाइल पर फोन किया कि आवाज किस चीज की थी, लेकिन वह अब मेरा फोन उठाने की हालत में नहीं थे.”

इकबाल इस साल पंजाब के सीमावर्ती जिलों में गोली मारकर हत्या किए गए पुलिसकर्मियों में से एक हैं. इस साल ऐसे पांच पुलिसकर्मियों की हत्या हुई है. बाकी हत्याओं के मामलों में पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि इकबाल की हत्या उनके अपने परिवार से जुड़े गैंगों के बीच दुश्मनी का नतीजा थी.
इकबाल की हत्या ने पंजाब में तेजी से उलझते जा रहे अपराध के माहौल का एक और चिंताजनक पहलू सामने ला दिया है. कुछ पुलिसकर्मी अपने पारिवारिक संबंधों की वजह से गैंगों की दुश्मनी का शिकार बन रहे हैं, जबकि कुछ अन्य पर खुद गैंगस्टरों के साथ काम करने और जबरन वसूली के गिरोहों में शामिल होने के आरोप लगे हैं. संगठित अपराध से लड़ने वालों और कथित तौर पर उसमें शामिल लोगों के बीच की लकीर लगातार धुंधली होती जा रही है. इससे पहले से खतरनाक स्थिति और जटिल हो गई है.
तरनतारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र लांबा ने बताया कि इकबाल सिंह की हत्या के मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक जेल में बंद गैंगस्टर भी शामिल है. आरोप है कि वह कभी इकबाल के मारे जा चुके भतीजे अजमीत का करीबी सहयोगी था और उसी गैंग नेटवर्क का हिस्सा था, जिससे ASI का जर्मनी में रहने वाला बेटा भी जुड़ा हुआ है.
अजमीत की 11 सितंबर को नौशेरा पन्नुआं के एक बस स्टैंड के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या का तरीका काफी हद तक एक जैसा था. मोटरसाइकिल पर आए दो लोगों ने उस पर गोलियां चलाईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई.
इकबाल की बहन जसकरणजीत कौर ने दिप्रिंट को बताया, “एक महीने के भीतर हमारे परिवार पर दो दुख टूट पड़े हैं. हम इस कदर टूट चुके हैं कि अब कोई उम्मीद नहीं बची है. कोई राजनीतिक नेता हमें भरोसा दिलाने नहीं आया और न ही हमें जांच में हुई किसी प्रगति के बारे में बताया गया है.” हालांकि, परिवार को नहीं लगता कि दोनों हत्याएं आपस में जुड़ी हुई थीं.
Our brave police officer, ASI Iqbal Singh who has laid down his life in the line of duty.@PunjabPoliceInd stands firmly with the bereaved family in their hour of grief. Hon’ble Chief Minister has announced an ex-gratia amount of ₹1 crore for his family, while an additional ₹1… pic.twitter.com/6qudz0sWqZ
— DGP Punjab Police (@DGPPunjabPolice) October 13, 2026
जांच से जुड़े पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इससे अलग आकलन पेश किया. अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “इकबाल सिंह की हत्या इसलिए नहीं की गई कि वह पुलिसकर्मी थे या अपने सरकारी काम की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया. उनकी हत्या इसलिए हुई क्योंकि वह अपने बेटे के पिता थे, जो फरार लखबीर सिंह लांडा के गैंग का बेहद सक्रिय सदस्य है.”
अधिकारी ने आगे कहा, “यह अब पंजाब की त्रासदी बन गई है. जहां पुलिसकर्मियों पर अपराध से लड़ने के कारण हमले हो रहे हैं, वहीं कुछ पुलिसकर्मी खुद गैंगस्टरों के नेटवर्क में शामिल हैं. फिर ऐसे लोग भी हैं जिनका अपना रिकॉर्ड साफ है, लेकिन उनके परिवार के सदस्यों के गैंगस्टरों से संबंध होने के कारण वे गैंगों की दुश्मनी में घसीट लिए जाते हैं, जैसा कि इकबाल के मामले में हुआ. इन गैंग नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि पुलिसकर्मी भी इनके निशाने पर आ रहे हैं और असुरक्षित हैं.”
इकबाल के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटे, कंवलप्रीत सिंह और कोमलप्रीत सिंह हैं. दोनों जर्मनी में रहते हैं. परिवार के मुताबिक, कंवलप्रीत करीब एक दशक से विदेश में हैं, जबकि कोमलप्रीत लगभग पांच साल पहले वहां गए थे.
जांचकर्ताओं ने इकबाल और अजमीत की हत्याओं के साथ-साथ उसी गांव में हुई दो अन्य हत्याओं की घटनाओं को भी कोमलप्रीत से जोड़ा है.
पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने कहा, “दुर्भाग्य से इकबाल की हत्या राज्य के माझा क्षेत्र में सक्रिय गैंगों के बीच दुश्मनी के कारण हुई हत्याओं की एक कड़ी का हिस्सा थी.”
यह दुश्मनी मुख्य रूप से कनाडा में रहने वाले लखबीर सिंह उर्फ लांडा के गैंग और विदेश में बैठे गैंगस्टरों के एक प्रतिद्वंद्वी गुट के बीच है. इस दूसरे गुट में ब्राजील में रहने वाला प्रभदीप सिंह उर्फ प्रभ दासूवाल, ब्रिटेन में रहने वाला बलविंदर सिंह उर्फ डोनी बल और गुरविंदर सिंह उर्फ गुरविंदर अफरीदी शामिल हैं.

तरनतारन के हरिके गांव का रहने वाला लांडा नौशेरा पन्नुआं से करीब 20 किलोमीटर दूर है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई आतंकी हमलों में कथित भूमिका के लिए उसे व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया है. इनमें 2022 में मोहाली स्थित पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हुआ रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) हमला भी शामिल है. पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसकी पहचान पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के सहयोगी के रूप में की है.
दोस्ती से दुश्मनी तक: गांव में गैंग वॉर की शुरुआत
नौशेरा पन्नुआं में अजमीत और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी नंबरदार कभी पक्के दोस्त माने जाते थे. दोनों कथित तौर पर कनाडा में रहने वाले गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लांडा के नेटवर्क से जुड़े थे और उसके लिए जमीनी स्तर पर काम करते थे. लेकिन बाद में उनकी दोस्ती कड़वी गैंग दुश्मनी में बदल गई. अजमीत की हत्या के मामले में गोपी पर शक जताया गया.
बचपन में अपने माता-पिता को खोने वाला अजमीत इकबाल के परिवार के साथ बड़ा हुआ था और लंबे समय से लांडा के नेटवर्क से जुड़ा था. उसके गैंग से संबंध कम से कम पांच साल पुराने थे. जांचकर्ताओं के मुताबिक, 2022 में अमृतसर और तरनतारन पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट के एक मामले और एक कपड़ा व्यापारी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था. आरोप है कि ये दोनों वारदात लांडा के निर्देश पर की गई थीं.
2022 में सरहाली पुलिस थाने पर हुए RPG हमले की जांच के दौरान भी उसका नाम सामने आया था. इस हमले के पीछे के मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा था कि लांडा और विदेश में बैठे उसके दूसरे साथियों, जिनमें सतबीर सिंह उर्फ सत्ता नौशेरा भी शामिल था, ने अजमीत की मदद से इस हमले की योजना बनाई थी.

सत्ता भी नौशेरा पन्नुआं का रहने वाला है. जांचकर्ताओं को पता चला कि अजमीत ने लांडा और गांव के उन छह आरोपियों के बीच अहम कड़ी का काम किया था, जिन्हें कथित तौर पर हमले को अंजाम देने के लिए भर्ती किया गया था. गोपी नंबरदार भी उनमें से एक था.
लेकिन इस साल सितंबर तक दोनों दोस्त दुश्मन बन चुके थे. अजमीत को जमानत पर रिहा हुए अभी मुश्किल से एक महीना ही हुआ था कि उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके पांच दिन बाद तरनतारन पुलिस ने स्थानीय अदालत का रुख कर फिरोजपुर जेल में बंद गोपी नंबरदार को पेश करने की मांग की. पुलिस का आरोप था कि उसने अजमीत की हत्या के लिए दो शूटरों को भेजा था.
पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “सरहाली पुलिस थाने पर RPG हमला करने के लिए साथ काम करने वाले ये दोनों लोग अब एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन चुके हैं. गोपी नंबरदार अब प्रभ दासूवाल और डोनी बल के गैंग के साथ मिल गया है.”
पुलिस जांच के मुताबिक, उनकी दोस्ती टूटने की शुरुआत नौशेरा पन्नुआं में बदले की हत्याओं की एक कड़ी से हुई. अजमीत की हत्या के बाद यह दुश्मनी खुलकर सामने आने लगी और इससे माझा क्षेत्र में गैंगों के बीच दुश्मनी की गहराई का पता चला.
डोनी बल के गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में अजमीत की हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी. इन पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि नौशेरा पन्नुआं और आसपास के इलाकों में पुलिस की निगरानी के जरिए उनके साथियों को निशाना बनाया जा रहा है.

बदले की हत्याओं का सिलसिला
हत्याओं का यह सिलसिला नवंबर 2024 में कबड्डी खिलाड़ी सुखविंदर सिंह उर्फ नोनी की हत्या से शुरू हुआ. नौशेरा पन्नुआं में एक दुकान मालिक ने उसे गोली मार दी थी. आरोप है कि नोनी गोपी नंबरदार की ओर से मांगी गई रंगदारी की रकम लेने वहां पहुंचा था. उस समय गोपी नंबरदार कपूरथला जेल में बंद था.
नोनी, सत्ता का चचेरा भाई था. सरहाली RPG हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक और लांडा के करीबी सहयोगी सत्ता ने अपने चचेरे भाई की मौत के लिए गोपी नंबरदार को जिम्मेदार ठहराया.
दिसंबर 2025 में सत्ता ने कथित तौर पर गोपी नंबरदार के चचेरे भाई की हत्या की साजिश रचकर बदला लिया. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद अजमीत के चचेरे भाई कोमलप्रीत ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली थी. तरनतारन में कोमलप्रीत के खिलाफ दर्ज यह अब तक का इकलौता मामला है.
एक अन्य अधिकारी ने कहा, “इन घटनाओं के बाद सत्ता और गोपी नंबरदार के बीच दुश्मनी शुरू हुई. कोमलप्रीत ने सत्ता का साथ दिया और बदले की यह कड़ी आखिरकार उसके चचेरे भाई अजमीत और उसके पिता इकबाल तक पहुंच गई.”

इस दुश्मनी में तरनतारन के टूट गांव के सरपंच अश्वनी देवगन की भी जान चली गई. बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी. आरोप है कि यह हत्या कोमलप्रीत और लांडा के निर्देश पर की गई थी. पुलिस का मानना है कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि स्थानीय स्तर पर माना जाता था कि वह डोनी बल और उसके साथियों के लिए काम कर रहे थे. इनमें टूट गांव का रहने वाला गुरविंदर अफरीदी भी शामिल था.
17 सेकंड की CCTV फुटेज में यह हमला कैद हुआ था. तीन हमलावर अश्वनी की SUV का पीछा करते हुए आए, बाईं ओर से उसके पास पहुंचे और गोलियां चला दीं. वे कुछ ही सेकंड में वहां से फरार हो गए. दिनदहाड़े हुई इस वारदात में अश्वनी की मौत हो गई.
तरनतारन के SSP लांबा ने बताया कि पंजाब पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी गुरदासपुर जिले के रहने वाले हैं. इसी जिले के एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है.
अश्वनी की हत्या के बाद बदले की यह कड़ी और तेज हो गई. आरोप है कि इसके बाद डोनी बल ने इकबाल की हत्या का आदेश दिया.
पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “हमारी शुरुआती जांच और आरोपियों से पूछताछ से पता चलता है कि इनमें वह व्यक्ति भी शामिल है जिसने इलाके की रेकी की थी. इससे पता चलता है कि इकबाल सिंह को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि डोनी बल का गैंग कोमलप्रीत को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहता था.”
इसके बाद तरनतारन पुलिस ने नौशेरा पन्नुआं से एक नाबालिग को गिरफ्तार किया. आरोप है कि उसने इकबाल की हत्या के लिए इलाके की रेकी की थी. कुछ दिन बाद कोमलप्रीत ने कथित तौर पर उस नाबालिग के पिता कुलदीप सिंह की हत्या का आदेश दिया. पुलिस ने इसे बदले में की गई हत्या बताया.
गैंगस्टरों से निपटने का कई साल का अनुभव रखने वाले पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस इलाके में लोगों के आपस में गहरे सामाजिक रिश्तों ने बदले की हत्याओं के इस सिलसिले को बढ़ावा दिया है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “दुनिया के इस हिस्से में कभी समुदाय की ताकत माने जाने वाले आपसी रिश्ते अब बदले की हत्याओं के इस सिलसिले की वजह बनने लगे हैं.”
अधिकारी ने कहा, “पंजाब में गैंगस्टरों के बीच भाईचारा और निजी रिश्ते बहुत गहरे होते हैं. इसलिए किसी एक हत्या के बाद बदले की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो जाता है. देश के दूसरे हिस्सों से यहां की स्थिति अलग है. वहां साथियों को इस्तेमाल करके छोड़ दिया जाता है और गैंग के लिए काम करने वालों का इस्तेमाल करो और फेंक दो की तरह होता है.”
गैंगस्टरों से निपटने का कई साल का अनुभव रखने वाले पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस इलाके में लोगों के आपस में गहरे सामाजिक रिश्तों ने बदले की हत्याओं के इस सिलसिले को बढ़ावा दिया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “दुनिया के इस हिस्से में कभी समुदाय की ताकत माने जाने वाले आपसी रिश्ते अब बदले की हत्याओं के इस सिलसिले की वजह बनने लगे हैं.”
अधिकारी ने कहा, “पंजाब में गैंगस्टरों के बीच भाईचारा और निजी रिश्ते बहुत गहरे होते हैं. इसलिए किसी एक हत्या के बाद बदले की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो जाता है. देश के दूसरे हिस्सों से यहां की स्थिति अलग है. वहां साथियों को ऐसे लोगों की तरह इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें आसानी से हटाया जा सकता है और गैंग के लिए काम करने वालों को इस्तेमाल करो और फेंक दो के तरीके से इस्तेमाल किया जाता है.”
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