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Sunday, 31 May, 2026
होमदेशजनहित को प्राथमिकता: एब्सोल्यूट वोडका और शिवास रीगल पर दिल्ली HC ने बैन क्यों बरकरार रखा

जनहित को प्राथमिकता: एब्सोल्यूट वोडका और शिवास रीगल पर दिल्ली HC ने बैन क्यों बरकरार रखा

कोर्ट ने शराब पॉलिसी केस में पेरनोड रिकार्ड के एक्स-असिस्टेंट V-P के खिलाफ आरोपों पर गौर किया और कहा कि 'क्रिमिनल बैकग्राउंड' शब्द 'किसी जुर्म के लिए दोषी न ठहराए जाने से कहीं ज़्यादा बड़ा है.'

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नई दिल्ली: राजधानी में फ्रांसीसी शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने थोक शराब लाइसेंस की उसकी याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने इस फैसले में “दिल्ली आबकारी नीति घोटाले” के कानूनी प्रभावों का उल्लेख किया है, खास तौर पर कंपनी के पूर्व सहायक उपाध्यक्ष मनोज राय के खिलाफ आपराधिक आरोपों और कथित “सुपर कार्टेल” में कंपनी की भूमिका पर ध्यान दिया है.

पर्नोड रिकार्ड एब्सोल्यूट वोडका और शिवास रीगल व्हिस्की जैसे ब्रांडों के लिए जानी जाती है. फिलहाल कंपनी के उत्पाद दिल्ली में दुकानों की शेल्फ से बाहर रहेंगे, क्योंकि कंपनी आबकारी नीति मामले के असर से जुड़ी कानूनी लड़ाई लड़ रही है. इस स्थिति में बदलाव तब संभव हो सकता है जब मामले की सुनवाई आगे बढ़े.

फिलहाल मुकदमा शुरुआती चरण में है, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस साल फरवरी में आबकारी नीति मामले में 23 आरोपियों को बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की है. आरोपियों में आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के. कविता शामिल हैं.

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वाइन और स्पिरिट निर्माता कंपनी पर्नोड रिकार्ड की कानूनी मुश्किलें उसके ग्वालियर और मोहाली स्थित इकाइयों के लिए 2022 में लाइसेंस आवेदन करने के तुरंत बाद बढ़ गईं.

हालांकि आबकारी विभाग ने शुरुआत में “स्वीकृति पत्र” जारी कर दिए थे, लेकिन अगस्त 2022 में 2021-22 की आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर CBI द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद स्थिति बदल गई.

मामले का प्रमुख पहलू यह था कि CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पर्नोड रिकार्ड के मनोज राय को आरोपी बनाया.

CBI का आरोप है कि राय और अन्य अधिकारी “अनुचित लाभ” हासिल करने के लिए आपराधिक साजिश और खातों में हेराफेरी में शामिल थे. कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया है.

पर्नोड रिकार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी की संलिप्तता ही विभाग के लिए कंपनी की लाइसेंस पात्रता की दोबारा समीक्षा का मुख्य कारण बनी. विभाग ने इसके लिए दिल्ली आबकारी अधिनियम, 2009 की धारा 13 का हवाला दिया.

मामले का मुख्य मुद्दा अधिनियम की धारा 13(1)(c) की व्याख्या था, जिसमें कहा गया है कि आवेदक का “अच्छा नैतिक चरित्र होना चाहिए और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए या वह किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया हो.”

हाई कोर्ट में पर्नोड रिकार्ड ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में कोई औपचारिक दोषसिद्धि नहीं हुई है, इसलिए किसी पूर्व कर्मचारी के खिलाफ लंबित जांच के आधार पर पूरी कंपनी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता.

हालांकि अदालत ने इस संकीर्ण व्याख्या को खारिज कर दिया और व्यावसायिक विशेषाधिकार की तुलना में जनहित को प्राथमिकता देने वाली व्यापक व्याख्या को स्वीकार किया.

न्यायमूर्ति पी.के. कौरव ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि “किसी आपराधिक अपराध में दोषी न ठहराए जाने की शर्त… किसी व्यक्ति के आपराधिक पृष्ठभूमि न होने की न्यूनतम शर्त है, अधिकतम नहीं.” उन्होंने स्पष्ट किया कि “आपराधिक पृष्ठभूमि” शब्द “किसी अपराध में दोषी न ठहराए जाने” से कहीं अधिक व्यापक है. दोनों को समान मानना विधायिका की मंशा को “निरर्थक और अप्रभावी” बना देगा.

अदालत का फैसला काफी हद तक ED के निष्कर्षों से प्रभावित था. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में पर्नोड रिकार्ड को आरोपी संख्या 12 बताया है और “सुपर कार्टेल” के अस्तित्व का आरोप लगाया है. ED के अनुसार, कंपनी ने “किकबैक की वसूली के नए तरीके” के रूप में क्रेडिट नोट्स का इस्तेमाल किया और अपने ब्रांडों, जिनमें एब्सोल्यूट वोडका भी शामिल है, को बढ़ावा देने तथा “अवैध बाजार हिस्सेदारी” हासिल करने के लिए पसंदीदा खुदरा विक्रेताओं को कॉर्पोरेट गारंटी दी.

अदालत ने कहा, “निश्चित रूप से जिस कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध करने का आरोप हो… उसे किसी भी स्थिति में ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ से मुक्त नहीं माना जा सकता.”

हाई कोर्ट के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्नोड रिकार्ड के उत्पादों पर लगी रोक जारी रहेगी, क्योंकि शराब का कारोबार “रेस एक्स्ट्रा कॉमर्शियम” है, यानी ऐसा क्षेत्र जो सामान्य व्यापारिक अधिकारों से बाहर है और एक अधिकार नहीं बल्कि विशेषाधिकार है. इसलिए राज्य इसमें प्रवेश के लिए कड़े नैतिक मानदंड तय कर सकता है.

अदालत ने पर्नोड रिकार्ड को यह स्वतंत्रता दी है कि वह केवल तभी नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है, जब उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति या चरण में कोई बदलाव हो.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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