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Saturday, 19 September, 2026
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IIIT हैदराबाद ने उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग क्यों रद्द की?

IIIT-H ने बताया कि छात्रों के एक अनौपचारिक समूह ने 18 सितंबर को JNU के पूर्व छात्र नेता और रिसर्च स्कॉलर उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का प्रस्ताव रखा था.

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हैदराबाद: सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की चेतावनी के बाद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT-H) ने शुक्रवार देर शाम साफ किया कि उसने जेल में बंद छात्र नेता और कार्यकर्ता उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की कैंपस में होने वाली स्क्रीनिंग रद्द कर दी है.

डॉक्यूमेंट्री—प्रिज़नर नंबर 626710 इज़ प्रेज़ेंट (कैदी नंबर 626710 हाज़िर है)—की स्क्रीनिंग शुक्रवार रात 8 बजे होनी थी.

इंस्टीट्यूट की तरफ से स्क्रीनिंग रद्द करने का नोट शुक्रवार को देर से आया. इससे एक दिन पहले, गुरुवार को CBFC ने प्रस्तावित स्क्रीनिंग पर सवाल उठाया था. CBFC ने कहा था कि किसी ऐसी फिल्म को सार्वजनिक रूप से दिखाना, जिसे CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिला है, सिनेमैटोग्राफ़ एक्ट का उल्लंघन है, जब तक कि इसके लिए कानून के तहत खास छूट नहीं ली गई हो.

CBFC ने X पर IIIT-H को टैग करते हुए कहा, “ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग, जिसे अभी तक CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिला है, सिनेमैटोग्राफ़ एक्ट का उल्लंघन है, जब तक कि कानून के तहत इसके लिए खास छूट नहीं मांगी गई हो.”

CBFC ने एक छात्र द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए पोस्टर का हवाला देते हुए इंस्टीट्यूट के मैनेजमेंट से जरूरी कार्रवाई करने को कहा.

इसके जवाब में IIIT-H ने शुक्रवार को तुरंत कहा कि छात्रों के एक अनौपचारिक समूह ने 18 सितंबर को कैंपस के एक लेक्चर हॉल में जेल में बंद छात्र नेता और रिसर्च स्कॉलर उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाने का प्रस्ताव रखा था. शैक्षणिक संस्थान ने कहा कि इस स्क्रीनिंग का IIIT-H से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था.

IIIT-H की तरफ से जारी एक मीडिया रिलीज में कहा गया, “इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और जरूरी प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया था. इसलिए, जैसे ही इंस्टीट्यूट को इस बिना अनुमति वाले कार्यक्रम के बारे में पता चला, उसने तुरंत स्क्रीनिंग रद्द कर दी. इंस्टीट्यूट ने साफ कर दिया है कि फिल्म की कोई भी सार्वजनिक या निजी स्क्रीनिंग इंस्टीट्यूट की किसी भी जगह पर नहीं होने दी जाएगी, जिसमें क्लासरूम, लैबोरेटरी या ऑफिस भी शामिल हैं.”

फिल्ममेकर ललित वाचानी के निर्देशन में बनी यह डॉक्यूमेंट्री जेल में बंद छात्र नेता पर है. इसे इंस्टीट्यूट केकेआरबी ऑडिटोरियम में छात्रों के एक समूह द्वारा दिखाने का प्रस्ताव रखा गया था.

सैयद उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता और रिसर्च स्कॉलर हैं. वह उस समय चर्चा में आए जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पहले उन्हें हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार किया. उन पर सख्त गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाया गया.

IIIT-H ने फिर से कहा कि प्रस्तावित स्क्रीनिंग इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित या अधिकृत कार्यक्रम नहीं था. इंस्टीट्यूट ने कहा कि न तो IIIT-H और न ही उसके किसी मान्यता प्राप्त छात्र क्लब, सेल या संस्था का इस प्रस्तावित स्क्रीनिंग से किसी भी तरह का संबंध था. उसने आगे कहा, “इंस्टीट्यूट में कैंपस पर होने वाले आधिकारिक कार्यक्रमों और गतिविधियों के लिए लंबे समय से तय प्रक्रियाएं हैं और इस फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए संबंधित अधिकारियों से कोई अनुमति नहीं ली गई थी.”

इंस्टीट्यूट ने तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन न करने का सख्त निर्देश दिया है. उसने कहा कि कैंपस में किसी भी गतिविधि का आयोजन या उसका ऐलान करते समय सभी सदस्य तय प्रक्रियाओं और लागू कानूनी और संस्थागत नियमों का पालन करें.

हैदराबाद में स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT-Hyderabad या IIIT-H) की स्थापना 1998 में एक डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में हुई थी। यह एक गैर-लाभकारी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (N-PPP) यानी गैर-सरकारी संस्थान है.

यह इस मॉडल के तहत भारत का पहला IIIT है और इसे सभी IIITs में एक प्रमुख संस्थान माना जाता है. इसने देशभर में इसी तरह के दूसरे IIITs की स्थापना के लिए एक मॉडल के रूप में काम किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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