छत्रपति संभाजीनगर, आठ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष अब तक सामान्य से कम वर्षा होने के कारण यहां के 11 प्रमुख बांधों में कुल जल भंडारण घटकर 34 प्रतिशत रह गया है जिसके कारण 100 से अधिक गांव अब भी अपनी दैनिक जल आवश्यकताओं के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आठ जिलों वाले मराठवाड़ा क्षेत्र में अब तक औसत वर्षा का 87 प्रतिशत ही दर्ज किया गया है। जहां 182.1 मिमी वर्षा सामान्य मानी जाती है, वहीं अब तक केवल 158.4 मिमी बारिश हुई है।
कुछ जिलों में वर्षा की कमी 24 से 36 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। लातूर में जहां औसत की 64.2 फीसदी बारिश हुई, वहीं परभणी में 64.7 फीसदी, हिंगोली में 77 फीसदी, नांदेड़ में 77.2 फीसदी, बीड में 91 फीसदी, धाराशिव में 94 फीसदी, छत्रपति संभाजीनगर में 106.9 फीसदी और जालना में 114 फीसदी बारिश दर्ज की गई।
मराठवाड़ा के 11 प्रमुख बांधों में वर्तमान जल भंडारण 34.21 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन यह 49.86 प्रतिशत था। धाराशिव जिले के सीना कोलेगांव बांध में पानी पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि क्षेत्र के सबसे बड़े जायकवाड़ी बांध में केवल 28.69 प्रतिशत जल भंडारण शेष है।
पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है।
वर्तमान में जालना, परभणी, नांदेड़, बीड और लातूर जिलों के 103 गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
विडंबना यह है कि इस वर्ष क्षेत्र में सबसे अधिक वर्षा दर्ज करने वाले जालना जिले में ही पानी की आपूर्ति के लिए सबसे ज्यादा टैंकर लगाए गए हैं।
जालना में 107 टैंकर 20 गांवों और 32 बस्तियों को पानी पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए प्रशासन ने कई कुओं का भी अधिग्रहण किया है। वर्तमान में 882 अधिग्रहित कुओं की मदद से 691 गांवों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें नांदेड़ जिले में सबसे अधिक 247 कुओं का अधिग्रहण किया गया है।
भाषा शोभना माधव
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