नई दिल्ली: पंजाब के नाबालिगों को स्टूडेंट वीज़ा और जाली दस्तावेज़ के जरिए भर्ती करना, ड्रग तस्करी का नेटवर्क खड़ा करना और राजनीतिक हत्याओं की साजिश रचना—अमेरिका के आरोपपत्र में बताया गया है कि गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने जेल के अंदर से ही अपना अपराध नेटवर्क अमेरिका, कनाडा और यूरोप तक फैला दिया. आरोप है कि उसने इसे भारत के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों में से एक बना दिया.
आरोपपत्र में बिश्नोई के पूरे आपराधिक नेटवर्क का भी खुलासा किया गया है. इसमें रंगदारी, हत्याओं, ड्रग और हथियारों की तस्करी, हिंसा और डर का इस्तेमाल करने के तरीके, गैंग की संरचना, उसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और काम करने का तरीका बताया गया है.
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने मंगलवार को तीन आरोपपत्र सार्वजनिक किए, जिनमें अमेरिका, कनाडा और यूरोप के 37 आरोपियों के नाम हैं. विभाग ने कहा कि इस कार्रवाई के तहत कई देशों में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन लोगों के भारत के कम से कम तीन संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े होने का आरोप है, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े नेटवर्क भी शामिल हैं.
आरोपपत्र के मुताबिक, गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद बिश्नोई ने अपने गैंग को भारत से संचालित होने वाला अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट बना दिया. उसके गुर्गे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय थे और भारत व विदेशों में रहने वाले प्रमुख राजनीतिक, कारोबारी और सांस्कृतिक हस्तियों को निशाना बनाते थे. आरोप है कि गैंग लोगों में डर फैलाने के लिए चर्चित हिंसक घटनाओं को अंजाम देता था.
आरोपपत्र के अनुसार, निशाने पर मौजूद लोगों की पहचान सरकारी डेटाबेस, सोशल मीडिया और उनकी निगरानी करके की जाती थी. गैंग के सदस्य उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों और भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों की जानकारी भी जुटाते थे, ताकि रंगदारी वसूलने के दौरान उन पर ज्यादा दबाव बनाया जा सके.
जब कोई निशाना तय हो जाता था, तो गैंग के सदस्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए उससे संपर्क करते थे. पैसे की मांग की जाती थी और मना करने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती थी.
आरोपपत्र में कहा गया है कि जेल में बंद रहने के बावजूद बिश्नोई अपने भरोसेमंद गुर्गों और अलग-अलग इलाकों के नेताओं के जरिए पूरे गैंग को चलाता था.
आरोपपत्र में उसके बचपन के दोस्त गोल्डी बराड़ को उत्तर अमेरिका में गैंग का प्रमुख बताया गया है, जबकि उसके एक अन्य साथी गोदारा को यूरोप की जिम्मेदारी दी गई थी. आरोप है कि दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में निशाना बनाकर हत्या, गोलीबारी, अपहरण, हमला, रंगदारी और ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों का संचालन करते थे.
आरोपपत्र में यह भी दावा किया गया है कि बिश्नोई ने खुद की छवि एक ‘देशभक्त’, ‘राष्ट्रवादी’ और ‘धार्मिक’ व्यक्ति के रूप में बनाई, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को गैंग में शामिल किया जा सके और उसके नेटवर्क का प्रभाव बढ़ाया जा सके.
ड्रग तस्करी
बिश्नोई गैंग की ड्रग तस्करी में भूमिका बताते हुए अमेरिकी आरोपपत्र में दावा किया गया है कि यह गैंग अमेरिका में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का आयात, निर्यात और सप्लाई करता था. साथ ही यह दूसरे ड्रग तस्करी करने वाले गिरोहों को सामान पहुंचाने की सेवाएं भी देता था. आरोप है कि गैंग अक्सर दूसरे तस्करी गिरोहों से बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन लूट लेता था. इसमें वे खेप भी शामिल थीं, जिन्हें पहुंचाने का काम उसी गैंग को दिया गया था.
आरोपपत्र के मुताबिक, गैंग अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों और अमेरिका-कनाडा सीमा तक लंबी दूरी तय करने वाले बड़े ट्रकों के जरिए कोकीन और मेथामफेटामाइन पहुंचाने के रास्तों का भी समन्वय करता था. साथ ही इन ट्रकों की सुरक्षा का भी इंतज़ाम करता था.
आरोपपत्र में कहा गया है, “बिश्नोई गैंग के सदस्य और उसके सहयोगी, गैंग की ओर से किए गए अपराधों से मिली कमाई को आपस में बांटते थे.”
इसमें आगे कहा गया है, “इस कमाई का कुछ हिस्सा उस इलाके में काम करने वाले गैंग के सदस्यों और सहयोगियों को दिया जाता था, जबकि बाकी पैसा भारत में मौजूद गैंग के सदस्यों और सहयोगियों तक भेजा जाता था.”
आरोपपत्र के अनुसार, बिश्नोई के लोग उसकी ओर से रंगदारी की रकम वसूलते थे. साथ ही अमेरिका, मेक्सिको और अन्य देशों के ड्रग तस्करी गिरोहों के लिए अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों और अमेरिका-कनाडा सीमा तक बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन पहुंचाने का काम भी संभालते थे.
नाबालिगों की भर्ती, स्टूडेंट वीज़ा पर विदेश भेजे
आरोपपत्र में दावा किया गया है कि बिश्नोई गैंग नए सदस्यों की भर्ती मुख्य रूप से भारत के गरीब और कमज़ोर तबके, खासकर पंजाब से करता था. इसके लिए सोशल मीडिया पर प्रचार वाले वीडियो और संदेश पोस्ट किए जाते थे.
आरोपपत्र में कहा गया है, “बिश्नोई संगठित अपराध समूह (OCG) जानबूझकर नाबालिगों की भर्ती करता था, ताकि अगर वे हिंसक अपराध करें तो उन्हें कम सज़ा मिले.”
इसमें कहा गया है कि बिश्नोई गैंग के भर्ती कराने वाले लोग भारत के गरीब नाबालिगों को पैसे, नाम और सुरक्षा का लालच देकर गैंग में शामिल होने के लिए तैयार करते थे.
आरोपपत्र में आगे कहा गया है, “बिश्नोई गैंग अपने भरोसेमंद लोगों को स्टूडेंट वीजा और विदेशी कर्मचारी वीजा पर भारत से बाहर, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भेजता था. इन वीज़ा के लिए कई बार फर्ज़ी जानकारी भी दी जाती थी, ताकि वे वहां गैंग की आपराधिक गतिविधियों में मदद कर सकें.”
‘बंटा हुआ नेटवर्क’
आरोपपत्र के मुताबिक, बिश्नोई गैंग का नेटवर्क इस तरह बनाया गया था कि उसके सदस्य अलग-अलग काम करते थे. बड़े नेताओं को छोड़कर, गैंग के ज्यादातर सदस्यों और सहयोगियों को दूसरे सदस्यों की पहचान या उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती थी.
आरोपपत्र में कहा गया है, “इस तरह के बंटे हुए ढांचे से गैंग के सदस्यों और उनके अपराधों के बीच दूरी बनी रहती थी. अगर कोई सदस्य गिरफ्तार होकर पुलिस की मदद करने लगता, तब भी इस ढांचे की वजह से पूरे गैंग और उसके बाकी सदस्यों को कानूनी कार्रवाई से बचाने में मदद मिलती थी.”
इसमें आगे कहा गया है, “गैंग के सभी बड़े नेताओं और सहयोगियों को पता था कि अगर उन्होंने गैंग से गद्दारी की, तो बिश्नोई गैंग के दूसरे सदस्य उन्हें या उनके परिवार को, खासकर भारत में रहने वाले परिवार वालों को, मार सकते हैं या नुकसान पहुंचा सकते हैं.”
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