मुंबई: मुंबई में नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को ले जा रही पुलिस वैन रोकने के बाद वायरल हुईं मॉडल रिया यादव ने ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल का रुख किया है.
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके कदम की तारीफ की और उनका समर्थन किया, लेकिन रिया का कहना है कि उन्हें ऑनलाइन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए रिया ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद उन्हें साइबर सेल से फोन आया, जिसके बाद वह सोमवार को महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल पहुंचीं.
उन्होंने कहा, “कई लोग आपकी तारीफ करेंगे और आपका समर्थन करेंगे, लेकिन कुछ लोग आपके खिलाफ भी बोलेंगे. हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी किसी को नीचा दिखाने, उसकी छवि खराब करने, सार्वजनिक रूप से उसकी गरिमा पर हमला करने या यह कहने का अधिकार नहीं है कि किसी व्यक्ति को जीने का हक नहीं है. मैं यह भी साफ करना चाहती हूं कि हमने जो आंदोलन शुरू किया था, वह किसी राजनीतिक दल, धर्म या किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं था. यह हम सभी के लिए था.”
रिया ने आगे कहा, “एक महिला होने के नाते मैं उन सभी लोगों से कहना चाहती हूं, जो ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, कि वे अकेले नहीं हैं. मैं यह कदम इसलिए उठा रही हूं ताकि यह दिखा सकूं कि मैं सही बात के लिए आगे भी आवाज उठाती रहूंगी और डटी रहूंगी.”
37 दिनों तक चला आंदोलन शनिवार दोपहर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार से अपनी मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन वापस ले लिया.
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया.
आमतौर पर शांत रहने वाला जंतर-मंतर उस समय युवाओं और छात्रों से भर गया, जिन्होंने सीजेपी के नेतृत्व में रचनात्मक पोस्टर और जेन ज़ी की भाषा के साथ प्रदर्शन किया. एक हफ्ते से ज्यादा समय तक चले आंदोलन को नई गति तब मिली, जब लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इसमें शामिल हुए. उन्होंने 26 दिन की भूख हड़ताल की और आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गए.
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