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Friday, 4 September, 2026
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विजय सरकार चेन्नई में नया एकीकृत विधानसभा-सचिवालय परिसर बनाने की योजना बना रही है, 4 जगहों पर विचार

मई में सत्ता में आने के बाद से TVK सरकार सचिवालय को 100 साल से ज्यादा पुराने फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर से दूसरी जगह ले जाने की लगातार कोशिश कर रही है. इस परिसर में लंबे समय से जगह की बहुत कमी है.

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चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को चेन्नई में एक नया एकीकृत परिसर बनाने की योजना की घोषणा की. इसमें विधानसभा और सचिवालय दोनों होंगे. इसका मकसद मौजूदा परिसर में लंबे समय से चली आ रही जगह की कमी को दूर करना है.

प्रस्तावित परिसर में आधुनिक सुविधाएं होंगी और इसकी अनुमानित लागत 1,200 करोड़ रुपये होगी. सचिवालय करीब 20 लाख वर्ग फुट में फैला होगा और सभी विभाग एक ही इमारत में होंगे.

मई में सत्ता में आने के बाद से तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार सचिवालय को 100 साल से ज्यादा पुराने फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर से दूसरी जगह ले जाने की लगातार कोशिश कर रही है. इस परिसर में लंबे समय से जगह की बहुत कमी है.

यह ऐतिहासिक जगह कुछ हिस्सों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और रक्षा विभाग के नियंत्रण में है. इसलिए यहां बड़े स्तर पर ढांचे में बदलाव या विस्तार करना मुश्किल है.

प्रशासन की बढ़ती जरूरतों, रोजाना आने-जाने वाले लोगों की बड़ी संख्या, छोटे विभागीय कार्यालयों, पार्किंग की कमी और आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण एक बड़े और आधुनिक विधानसभा-सचिवालय परिसर की मांग उठ रही है.

मौजूदा परिसर में 30 से ज्यादा विभाग हैं. इसमें कई बार मरम्मत और बदलाव किए जा चुके हैं. अधिकारियों ने बार-बार जगह की कमी, पुरानी हो चुकी सुविधाओं, कई इमारतों में फैले कामकाज और अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए जगह बनाने में बढ़ती मुश्किलों की बात कही है. आधुनिक डिजिटल सिस्टम के लिए भी जगह की जरूरत बढ़ रही है.

राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कई जगहों का शुरुआती निरीक्षण कर रहे हैं. इनमें मिट्टी और चट्टान की जांच भी शामिल है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नई एकीकृत इमारत के लिए कौन-सी जगह सही है.

मद्रास हाई कोर्ट के उन निर्देशों के अनुसार पर्यावरण और कानूनी पहलुओं की भी जांच की गई है, जिनमें जलाशयों पर निर्माण करने या प्राकृतिक जलधाराओं को रोकने से मना किया गया है. एक शुरुआती रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है.

मुख्यमंत्री की मंजूरी और आधिकारिक घोषणा के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा.

सत्ता का केंद्र

ब्रिटिश शासन के दौरान और आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में फोर्ट सेंट जॉर्ज शासन का केंद्र रहा.

हालांकि, 2000 के शुरुआती वर्षों में जे. जयललिता के नेतृत्व वाली AIADMK सरकार ने आधुनिक सुविधाओं की जरूरत बताते हुए कामकाज को क्वीन मैरी कॉलेज या शोलिंगनल्लूर जैसी जगहों पर ले जाने की कोशिश की थी. लेकिन इन प्रस्तावों को बड़े विरोध और देरी का सामना करना पड़ा और आखिरकार ये योजनाएं लागू नहीं हो सकीं.

2006 से 2011 के बीच एम. करुणानिधि के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने अन्ना सालई पर ओमंदुरार सरकारी एस्टेट में नया विधानसभा-सचिवालय परिसर बनाया.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2010 में इसका उद्घाटन किया था. इस परियोजना पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. इसे एक आधुनिक, ऊर्जा बचाने वाली और पर्यावरण के अनुकूल इमारत के तौर पर बनाया गया था, जिसे प्रशासनिक प्रगति का प्रतीक बताया गया था.

हालांकि, 2011 में जयललिता के नेतृत्व में AIADMK के सत्ता में लौटने के बाद नए परिसर को तुरंत छोड़ दिया गया.

सरकार ने कामकाज को वापस फोर्ट सेंट जॉर्ज ले लिया और ओमंदुरार की इमारत को तमिलनाडु सरकार के मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बदल दिया गया. इसका उद्घाटन करीब 2014 में हुआ था.

सरकार के सूत्रों के मुताबिक, चेन्नई में चार जगहों पर विचार किया जा रहा है. इनमें पट्टिनापक्कम, नंदमबक्कम, कोयंबेडु और गिंडी का हाईवे विभाग कार्यालय शामिल हैं.

जगह चुनने के लिए ज़मीन की उपलब्धता, कर्मचारियों और आम लोगों के लिए पहुंच, मौजूदा सुविधाएं, पार्किंग की संभावना, कनेक्टिविटी और आधुनिक एकीकृत परिसर बनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है.

गिंडी में हाईवे विभाग के कार्यालय के पास करीब 35 एकड़ सरकारी जमीन है. यह एक बड़ी और लगातार जुड़ी हुई जमीन है, जहां कार्यालयों, विधानसभा की सुविधाओं, कर्मचारियों, आने वाले लोगों और पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह बनाई जा सकती है. यह चेन्नई के दक्षिणी हिस्से में एक ऐसी जगह पर है, जहां संस्थानों और परिवहन की अच्छी सुविधा है.

पट्टिनापक्कम समुद्र के किनारे का इलाका है. यहां शुरुआती स्तर पर सर्वे का काम हो चुका है. यह मुख्यमंत्री के आवास से भी अपेक्षाकृत पास है. इससे रोजाना आने-जाने में आसानी हो सकती है और शहर के बीचों-बीच काफिले के कारण होने वाली ट्रैफिक की परेशानी कम हो सकती है.

बताई गई जमीन 20 एकड़ से ज्यादा है, लेकिन समुद्र और जलधाराओं से जुड़े पर्यावरण के मुद्दों की सावधानी से जांच की जा रही है.

दूसरी ओर, नंदमबक्कम में फिनटेक सिटी इलाके के सामने 20 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन वाली जगह पर विचार किया जा रहा है.

इस जगह को चेन्नई के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में बढ़ती सुविधाओं और अच्छी कनेक्टिविटी का फायदा मिलता है. हालांकि, इस इलाके को बड़े व्यावसायिक और फिनटेक विकास के लिए भी तय किया गया है. इसलिए अगर इस जगह को सचिवालय के लिए चुना जाता है, तो इन योजनाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

कोयंबेडु में, जहां पहले पुराना मोफस्सिल बस टर्मिनस था, उसे भी एक संभावित जगह माना जा रहा है. बस टर्मिनस को किलांबक्कम ले जाने के बाद यहां बड़ी मात्रा में इस्तेमाल न होने वाली सरकारी जमीन उपलब्ध है. सड़क, मेट्रो और दूसरे परिवहन साधनों के जरिए यहां अच्छी कनेक्टिविटी है.

चेन्नई के बीच में स्थित होने के कारण मौजूदा सुविधाओं का दोबारा इस्तेमाल करके यहां लोगों के लिए पहुंच आसान हो सकती है और लागत भी बच सकती है. हालांकि, योजना बनाने वाले अधिकारियों को चिंता है कि इससे स्थानीय ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है.

अभी जगह को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि चुनी जाने वाली जगह में आधुनिक और डिजिटल सुविधाओं वाला परिसर बनाने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए. इसमें सभी विभागों, आम लोगों के लिए सुविधाओं, सुरक्षा और भविष्य में विस्तार की पर्याप्त जगह होनी चाहिए और यह जगह चेन्नई के अंदर ही होनी चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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